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मियां भोपाली के झोले-बतोले: को खां, टाइगर अब डंडा लेके निकला हे..!
सार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हाल ही में अफसरों को धमकाने वाले अंदाज में दहाड़े कि मैं यहां का टाइगर हूं। यहां कोई टाइगर-वाइगर नहीं है। इसके मायने क्या हैं, यह पढ़िए खास भोपाली लहजे में।
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अमर उजाला ग्राफिक्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
को खां, अपने भोपाल के आसपास असली टाइगर तो अक्सर मंडराते रेते ई हें मगर यहां का सियासी टाइगर भी जब तब हुंकार मारने लगता हें। हाल में पिरदेश के मुखमंत्री शिवराजसिंह चोहान ने पुलिस वालों को फिर याद दिलाया कि उनके भीतर का ‘टाइगर अभी जिंदा हे।‘ कोई मुगालते में न रहे।
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सूबे में पिछले दिनो हुए पंचायत ओर मुनिसपालटी चुनावो में भाजपा को मिली जीत के मोके पर भोपाल में एक कारक्रम रखा गया था। नाम था ‘मामा की चाय, अपनो के साथ’।‘ यूं मियां भोपाल की नमकवाली सुलेमानी चाय अपना अलग मुकाम रखती हे मगर चाय का ये एक अलहदा सियासी पोरोगराम था। कारक्रम में हमेशा की तरह सीएम शिवराज ने बोला के खां, ये आभार सभा नई, विशवास सभा हेगी। में कोई का भरोसा टूटने नई दूंगा। सबका भला होगा। तभी कोई बंदे ने शिकायत करी के मियां, इलाके में लोग टाइगर नाम के किसी गुंडे से परेशान हें। शिवराज ने तुरंत कलक्टर ओर पुलिस को हुकम दिया के इलाके में परमानेंट पुलिस चोकी बनाओ ओर डंडा लेके निकल पड़ो। सई कर दो टाइगर-फाइगर को। सूबे में कहीं कोई की गुंडागर्दी नई चलेगी। कान खोल के सुन लो के खां, असली टाइगर तो यहां बेठा हे।
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शिवराज ने ये ई डायलाग साढ़े चार साल पेले भी मारा था। उस वकत विधानसभा चुनाव बीजेपी बहुत कम अंतर से हारी थी ओर बरसों बाद मामा बिना सरकारी गाड़ी के थे। लेकिन जोश वो ई पुराना था। अपने बंगले पे कारकरताओं से मुखातिब मामा ने बोला था के खां, में कहीं नई जा रिया। यहीं रहूंगा। पार्टी कारकरता चिंता न करें के इस चुनाव में मिली शिकस्त के बाद उनका क्या होगा। में यहां हूं। क्योंकि ‘टाइगर अभी जिंदा हे।‘ दरअसल ये शिवराज की सियासी दहाड़ ओर हार से भेराए कारकरताओं को दिलासा थी। मतलब ये के हमने बाजी हारी हे, होसला नई। बता दें के शिवराज ने ये डायलाग उस जमाने में आई सलमान खान ओर कटरीना केफ की हिट फिलिम ‘टाइगर अभी जिंदा हे’ से उठाया था। गोरतलब हे के इस डायलाग के सवा साल बाद ई कांगरेस की कमलनाथ सरकार ‘आपरेशन लोटस’ का शिकार होकर गिर गई। टाइगर फिर अपने तखत पे जा बेठा।
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यूं तो मियां, हकीकत में भी भोपाल के आसपास टाइगरों का जमावड़ा बढ़ हे। फारेस्ट वालों का केना हे के राजधानी के आसपास के जंगलों में 13 सिकंदर बाघ घूम रिए हें, जो बाज दफे शेहेर में भी आ जाते हें। खास बात ये हे के ये तमाम टाइगर एक मां की ओलादें हें ओर इनकी पेदाइश भी टाइगर शिवराज के बतोर मुखमंत्री तीसरे कारकाल में हुई थी। यानी टाइगरों का जलवा तभी से हे। इन टाइगरों के नाम भी टी 1, टी 2 वगेरा रखे गए हें। ये टाइगर भोत समझदार हें। वो अपने इलाके में दूसरे कोई को घुसने नई देते पर एक दूसरे से भिड़ते भी नई हें। ये टाइगर शिकार की तलाश में रात को निकलते हें ओर कई बार शेहेर की मशहूर इमारतों के आसपास मंडराते भी हें। मगर किसी इंसान पे इन्होंने हमला अभी तक नई करा हे। लिहाजा ये नए जमाने की तासीर वाले नए टाइगर हें। जिनको पता हेगा कि कोई उनका कुछ नई बिगाड़ सकता। सियासी दुश्मन कित्ती भी खार खाते रहें। यानी ‘टाइगर जिंदा’ तो पेले ई था, अब ‘डंडा लेके भी निकल पड़ा हे।‘ सियासत के जंगल में कोन कोन निपटेगा, इसका इंतजार तो मीडियावालों को भी हे।
- बतोलेबाज
(मार्फत-अजय बोकिल)
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