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Indore News: इंदौर में सुरों की बारिश! 70-80 के दशक के डुएट गीतों ने बांधा श्रोताओं का मन
Sun, 15 Mar 2026 10:39 PM IST
Ashutosh Pratap Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Sun, 15 Mar 2026 10:39 PM IST
सार
इंदौर में रविवार को डुएट संगीत की यादगार महफिल हुई। 70-80 के दशक के मशहूर गीतों को गायकों सर्वेश मिश्रा, संगीता मेलेकर, श्रुति भिड़े और धवल चंदावडकर ने श्रोताओं के सामने पेश किया।
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0-80 के दशक के गीतों ने बांधा समां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर में रविवार की शाम संगीत प्रेमियों के लिए यादगार साबित हुई। शहर के बड़े हॉल में डुएट संगीत की शानदार महफिल सजी, जिसमें 70-80 के दशक के मशहूर संगीतकारों मदनमोहन, एसडी बर्मन और आरडी बर्मन के गीतों ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वेश मिश्रा और संगीता मेलेकर ने "आंखों ही आंखों में इशारा" गीत से की। इस सुरमयी शुरुआत ने महफिल में एक खास माहौल बना दिया और श्रोताओं को पुरानी यादों में ले गया।
डुएट गीतों ने बांधा समां
इसके बाद श्रुति भिड़े और धवल चंदावडकर ने "ये रात भीगी भीगी" गाकर महफिल में अलग रंग भर दिया। इसके बाद “आपकी आंखों में कुछ महके हुए”, “राज है”, “ये दिल तुम बिन” और “इशारों इशारों में दिल देने वाली” जैसे गीतों ने श्रोताओं को पुराने दौर की याद दिलाई। मार्च की गर्मियों में “मेघा रे मेघा रे” और “हुस्न पहाड़ों का” जैसे गीतों को गायकों ने डूब कर प्रस्तुत किया। इन गीतों की ठंडी फुहार ने श्रोताओं को भीगी हुई शाम का अहसास कराया। पूरे हॉल में खचाखच भीड़ थी और हर प्रस्तुति पर श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।
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गायकों की प्रस्तुति और अलग अंदाज
श्रुति भिड़े ने कुछ गीतों को अलग रेंज में पेश किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। संगीता मेलेकर और धवल चंदावडकर ने “दीप जले आना” को भी अलग अंदाज में गाकर महफिल को और यादगार बनाया। इस शाम का आयोजन सारेगामा की अगुवाई में किया गया। कलाकारों का स्वागत जीतु जिराती, टीनू जैन और अभिषेक गावड़े ने किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पटेल ने किया। इस दौरान संगीत निशा में 25 से ज्यादा गीत पेश किए गए।
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डुएट गीतों ने बांधा समां
इसके बाद श्रुति भिड़े और धवल चंदावडकर ने "ये रात भीगी भीगी" गाकर महफिल में अलग रंग भर दिया। इसके बाद “आपकी आंखों में कुछ महके हुए”, “राज है”, “ये दिल तुम बिन” और “इशारों इशारों में दिल देने वाली” जैसे गीतों ने श्रोताओं को पुराने दौर की याद दिलाई। मार्च की गर्मियों में “मेघा रे मेघा रे” और “हुस्न पहाड़ों का” जैसे गीतों को गायकों ने डूब कर प्रस्तुत किया। इन गीतों की ठंडी फुहार ने श्रोताओं को भीगी हुई शाम का अहसास कराया। पूरे हॉल में खचाखच भीड़ थी और हर प्रस्तुति पर श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।
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गायकों की प्रस्तुति और अलग अंदाज
श्रुति भिड़े ने कुछ गीतों को अलग रेंज में पेश किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। संगीता मेलेकर और धवल चंदावडकर ने “दीप जले आना” को भी अलग अंदाज में गाकर महफिल को और यादगार बनाया। इस शाम का आयोजन सारेगामा की अगुवाई में किया गया। कलाकारों का स्वागत जीतु जिराती, टीनू जैन और अभिषेक गावड़े ने किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पटेल ने किया। इस दौरान संगीत निशा में 25 से ज्यादा गीत पेश किए गए।
