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चार महीने से नहीं मिला मानदेय: हजारों महिलाओं का प्रदर्शन,शिवराज के बंगले के सामने घंटों डटी रहीं रसोइया बहनें

Sat, 10 Oct 2026 07:07 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 10 Oct 2026 07:07 PM IST
सार

 चार महीने से मानदेय नहीं मिलने के विरोध में भोपाल में हजारों रसोइया बहनों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने प्रदर्शन किया। शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने घंटों बैठीं महिलाओं ने 10 नवंबर तक भुगतान का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर सभी 55 जिलों में चक्काजाम की चेतावनी दी गई है। महासंघ ने मानदेय बढ़ाने, खाद्यान्न का पूरा आवंटन, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन सहित 16 मांगें उठाई हैं।

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Honorarium unpaid for four months: Thousands of women protest; cooks stood their ground outside Shivraj's bung
महिलाओं का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना में काम करने के बावजूद चार महीने से मानदेय नहीं मिलने से नाराज हजारों महिलाओं ने शनिवार को भोपाल में प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ीं महिलाएं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने पहुंचकर बैठ गईं। घंटों चले प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग उठाई। उन्होंने सरकार को 10 नवंबर तक का समय देते हुए चेतावनी दी कि तय समय में खातों में राशि नहीं आई तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में चक्काजाम किया जाएगा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि वे बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने और योजना का संचालन करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला मानदेय समय पर नहीं दिया जा रहा है। महिलाओं ने लाड़ली बहना योजना का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब महिलाओं के खातों में आर्थिक सहायता पहुंचाई जा सकती है, तो काम करने वाली रसोइया बहनों और स्व-सहायता समूहों का भुगतान क्यों अटका हुआ है। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाया और महिलाओं की समस्याएं उनके सामने रखवाईं। अधिकारियों से समाधान का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी महिलाएं लौट गईं। हालांकि, महासंघ ने भुगतान की समयसीमा तय करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
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हर महीने की पांच तारीख तक भुगतान की मांग
प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ (स्व-सहायता समूह एवं रसोइया संघ), मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लंबित मानदेय सहित 16 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की मांग की है। महासंघ का कहना है कि सांझा चूल्हा योजना की राशि तीन से चार महीने की देरी से मिलती है। इससे योजना का संचालन करने वाले समूहों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महासंघ ने मांग की है कि प्रत्येक महीने की पांच तारीख तक भुगतान सुनिश्चित किया जाए। योजना में काम करने वाली रसोइया बहनों का मासिक मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया जाए। यह राशि समूहों को मिलने वाली लागत से नहीं काटी जाए। इसके अलावा, पिछला बकाया तत्काल जारी करने और प्रदेश के सभी जिलों में भुगतान की एक निश्चित तारीख निर्धारित करने की मांग भी की गई है।
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खाद्यान्न आवंटन में कटौती से समूह परेशान
महासंघ ने पोषण आहार योजना में खाद्यान्न आवंटन का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के अनुसार, पोर्टल पर दर्ज वास्तविक हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में समूहों को पर्याप्त खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। कई जगह केवल 20 से 25 प्रतिशत खाद्यान्न उपलब्ध होने की शिकायत है। महासंघ ने वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर 100 प्रतिशत खाद्यान्न आवंटन और वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है। खाद्यान्न उठाव की प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए संगठन ने कहा है कि समूह के अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट से ही खाद्यान्न उठाव कराया जाए। दुकानदारों के फिंगरप्रिंट के माध्यम से उठाव की व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी रखी गई है। महासंघ ने भोजन और नाश्ते के लिए निर्धारित दरों में बढ़ोतरी की मांग की है। फिलहाल नाश्ते के लिए 2.88 रुपये और भोजन के लिए 4.82 रुपये प्रति हितग्राही की दर का हवाला देते हुए संगठन ने कहा है कि महंगाई के अनुरूप इन दरों की समीक्षा की जानी चाहिए।
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मानदेय बढ़ाने के साथ सेवा अवधि में विस्तार की मांग
मांगपत्र में रसोइया बहनों की सेवा अवधि 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव भी शामिल है। महासंघ ने वर्ष 2023, 2024, 2025 और 2026 के जून महीने में 15 दिनों की लंबित मजदूरी का मुद्दा उठाते हुए जांच के बाद एकमुश्त भुगतान करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, प्रदेश की करीब 2 लाख 32 हजार रसोइया बहनों को इसका लाभ मिलना चाहिए। महासंघ ने रसोइया बहनों को कर्मचारियों के समान दर्जा देने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों के अध्यक्ष और सचिव को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप 1,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग की गई है।


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स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और पूरा भुगतान देने की मांग
महासंघ ने रसोइया बहनों के साथ समूहों के अध्यक्ष और सचिव के लिए 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था लागू करने की भी मांग कर रहा है, ताकि लंबे समय तक योजना में काम करने वाली महिलाओं को भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।इसके अलावा, समूहों को खाद्यान्न और राशि का केवल 50 प्रतिशत भुगतान किए जाने की समस्या उठाते हुए शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। महासंघ का कहना है कि भुगतान में देरी और आवंटन में कमी के कारण समूहों के लिए योजनाओं का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने महिलाओं को समाधान का आश्वासन दिया है। अब महासंघ की नजर 10 नवंबर की समयसीमा पर है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि तब तक लंबित भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।


 
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