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प्रोबेशन में 100% वेतन पर सरकार SC पहुंची: हाईकोर्ट के आदेश से 2019 से एरियर का रास्ता खुला, खजाने पर बोझ
Thu, 17 Sep 2026 09:36 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 17 Sep 2026 09:36 AM IST
सार
प्रोबेशन में 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था खत्म कर नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने के हाईकोर्ट के आदेश को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार का कहना है कि 2019 से एरियर देने और वेतन बढ़ाने से सरकारी खजाने पर बड़ा अतिरिक्त भार पड़ेगा।
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मंत्रालय भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रोबेशन के दौरान पूरा वेतन देने के हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार ने याचिका में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। उसका तर्क है कि अगर 2019 से प्रोबेशन पर रहे कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन के हिसाब से बकाया राशि देनी पड़ी, तो राज्य के खजाने पर बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। मध्यप्रदेश में 12 दिसंबर 2019 से सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन अवधि में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की व्यवस्था लागू थी। हाईकोर्ट ने सितंबर में इस व्यवस्था को निरस्त करते हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने का आदेश दिया था।
सरकार के सामने दोहरा वित्तीय भार
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश लागू होने पर सिर्फ मौजूदा वेतन बढ़ाना ही नहीं पड़ेगा, बल्कि पुराने कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान भी करना होगा। यानी 2019 से अब तक जिन कर्मचारियों को प्रोबेशन के दौरान कम वेतन मिला है, उन्हें 100 प्रतिशत वेतन के हिसाब से अंतर की राशि देनी पड़ सकती है। सरकार के मुताबिक इसका असर भविष्य की भर्तियों के बजट पर भी पड़ सकता है।
पुलिस, पटवारी और शिक्षक भर्तियों का भी हवाला
याचिका में सरकार ने पुलिस, पटवारी और शिक्षक जैसी बड़ी भर्तियों का उल्लेख किया है। सरकार का कहना है कि इन भर्तियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी नियुक्त हुए हैं। ऐसे में पुराने एरियर और बढ़े हुए वेतन का वित्तीय प्रभाव काफी ज्यादा हो सकता है। सरकार ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त खर्च का असर पूंजीगत कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट पर पड़ सकता है।
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सरकार बोली- सेवा शर्तों के नियम बनाने का अधिकार राज्य का
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविधान के अनुच्छेद 309 का हवाला दिया है। उसका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है। सरकार के अनुसार 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था अचानक या मनमाने तरीके से लागू नहीं की गई थी। इसे वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में प्रक्रिया, परीक्षण और विचार-विमर्श के बाद सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने पर लागू किया गया था।
प्रोबेशन को प्रशिक्षण और दक्षता से जोड़ा
सरकार ने अपने तर्क में सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार नियुक्ति के शुरुआती दौर में कर्मचारी प्रोबेशन के दौरान प्रशिक्षण और दक्षता के आकलन से गुजरते हैं। इसी आधार पर चरणबद्ध वेतन की व्यवस्था रखी गई थी। सरकार का यह भी कहना है कि नीतिगत फैसलों और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए, जब तक किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान का उल्लंघन न हुआ हो।
हाईकोर्ट पहले भी दे चुका है पूरा वेतन देने का आदेश
प्रोबेशन में कम वेतन का मामला पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बाद सितंबर में डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त कर दिया और नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया।
यह भी पढ़ें-एमपी में मानसून की आखिरी परीक्षा: 33.1 इंच बारिश, कोटे से 11% पीछे, 21 सितंबर के बाद फिर तेज पानी के आसार
अब सुप्रीम कोर्ट में तय होगा आगे का रास्ता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में सरकार ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। इस मामले में अब मुख्य मुद्दा यह है कि प्रोबेशन में चरणबद्ध वेतन की राज्य की व्यवस्था कायम रहती है या हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन और बकाया राशि देनी होगी।
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सरकार के सामने दोहरा वित्तीय भार
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश लागू होने पर सिर्फ मौजूदा वेतन बढ़ाना ही नहीं पड़ेगा, बल्कि पुराने कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान भी करना होगा। यानी 2019 से अब तक जिन कर्मचारियों को प्रोबेशन के दौरान कम वेतन मिला है, उन्हें 100 प्रतिशत वेतन के हिसाब से अंतर की राशि देनी पड़ सकती है। सरकार के मुताबिक इसका असर भविष्य की भर्तियों के बजट पर भी पड़ सकता है।
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पुलिस, पटवारी और शिक्षक भर्तियों का भी हवाला
याचिका में सरकार ने पुलिस, पटवारी और शिक्षक जैसी बड़ी भर्तियों का उल्लेख किया है। सरकार का कहना है कि इन भर्तियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी नियुक्त हुए हैं। ऐसे में पुराने एरियर और बढ़े हुए वेतन का वित्तीय प्रभाव काफी ज्यादा हो सकता है। सरकार ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त खर्च का असर पूंजीगत कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट पर पड़ सकता है।
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सरकार बोली- सेवा शर्तों के नियम बनाने का अधिकार राज्य का
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविधान के अनुच्छेद 309 का हवाला दिया है। उसका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है। सरकार के अनुसार 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था अचानक या मनमाने तरीके से लागू नहीं की गई थी। इसे वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में प्रक्रिया, परीक्षण और विचार-विमर्श के बाद सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने पर लागू किया गया था।
प्रोबेशन को प्रशिक्षण और दक्षता से जोड़ा
सरकार ने अपने तर्क में सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार नियुक्ति के शुरुआती दौर में कर्मचारी प्रोबेशन के दौरान प्रशिक्षण और दक्षता के आकलन से गुजरते हैं। इसी आधार पर चरणबद्ध वेतन की व्यवस्था रखी गई थी। सरकार का यह भी कहना है कि नीतिगत फैसलों और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए, जब तक किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान का उल्लंघन न हुआ हो।
हाईकोर्ट पहले भी दे चुका है पूरा वेतन देने का आदेश
प्रोबेशन में कम वेतन का मामला पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बाद सितंबर में डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त कर दिया और नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया।
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अब सुप्रीम कोर्ट में तय होगा आगे का रास्ता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में सरकार ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। इस मामले में अब मुख्य मुद्दा यह है कि प्रोबेशन में चरणबद्ध वेतन की राज्य की व्यवस्था कायम रहती है या हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन और बकाया राशि देनी होगी।
