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Exclusive: सस्ती दवा बेचने वाली अमृत फार्मेसी आखिर है क्या? देश के कई एम्स के पास नहीं है कोई स्पष्ट जवाब

Wed, 20 Nov 2024 07:55 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 20 Nov 2024 07:55 PM IST
सार

मोदी सरकार की पहल पर केंद्र और राज्य सरकारों के अस्पतालों में सस्ती दवा बेचने के लिए अमृत फार्मेसी का रिटेल नेटवर्क खड़ा किया गया है। इसके बाद भी इसमें न तो पारदर्शिता बरती जा रही है और न ही कोई उजली तस्वीर सामने आ पा रही है। देश के चार एम्स से जब इस संबंध में RTI के तहत सवाल पूछे गए तो अलग-अलग जवाब सामने आए। 

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नागपुर एम्स का आरटीआई में सूचना देने से इंकार - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने सस्ती दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए अमृत रिटेल फार्मेसी का नेटवर्क खड़ा किया है। केंद्र सरकार के एम्स और राज्य सरकारों के बड़े अस्पतालों में अमृत फार्मेसी काम कर रही है। हालांकि, इससे खरीदी जाने वाली दवाओं और उपकरणों के हिसाब-किताब पर उठे सवालों पर एम्स ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी जानकारी पर गोल-मोल जवाब दिया। नागपुर एम्स ने अमृत फार्मेसी को थर्ड पार्टी करार दिया। इस आधार पर जानकारी देने से ही इनकार कर दिया। भोपाल एम्स ने जानकारी दी जरूर, लेकिन अधूरी और अस्पष्ट। इससे मोदी सरकार की फ्लैगशिप स्कीम की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

अफॉर्डेबल मेडिसिन्स एंड रिलायबल इम्प्लांट्स फॉर ट्रीटमेंट यानी AMRIT (अमृत)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह फ्लैगशिप स्कीम शुरू की है। दिल्ली एम्स में 15 नवंबर 2015 को अमृत फार्मेसी की पहली शॉप खोली गई थी। इसके बाद अब देश के 22 से अधिक राज्यों में अमृत फार्मेसी की करीब 150 दुकानें काम कर रही हैं। इनके जरिये 5200 से अधिक दवाएं, इम्प्लांट और चिकित्सा उपकरण एमआरपी से 60% तक सस्ती उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन फार्मेसी स्टोर के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जब फार्मेसी और उस पर मिलने वाली दवाओं के चुनाव को लेकर सवाल पूछे गए तो सूचना के अधिकार के तहत एम्स से गोल-माल जवाब ही सामने आए। 

भोपाल एम्स से मिली अधूरी और अस्पष्ट जानकारी 
भोपाल एम्स ने RTI के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर गोल-माल जवाब ही दिया है। आवेदक से 1085 पेज के लिए 2070 रुपये वसूल लिए गए। इसके बावजूद केवल 550 पेज की जानकारी उपलब्ध कराई गई। इन दस्तावेजों की न केवल प्रिंटिंग गुणवत्ता खराब है, बल्कि पर्चेस ऑर्डर और इनवॉइस जैसे आवश्यक दस्तावेज भी क्रमबद्ध नहीं हैं। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए ही नहीं, जिससे एम्स में अमृत फार्मेसी के संचालन में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।  

नागपुर एम्स का जवाब- अमृत फार्मेसी थर्ड पार्टी  
नागपुर एम्स प्रशासन ने अमृत फार्मेसी को थर्ड पार्टी करार दिया और RTI के तहत जानकारी देने से इनकार कर दिया। सरकारी कंपनी होने के बावजूद अमृत फार्मेसी की दवा खरीद प्रक्रिया और दरों को "गोपनीय" बताते हुए जानकारी देने से मना कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तर्क पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। RTI के नियमों की गलत व्याख्या भी करता है।  

बठिंडा और रायपुर एम्स ने दी जानकारी 
भोपाल, नागपुर के साथ ही बठिंडा, रायपुर एवं मदुरई एम्स से भी जानकारी मांगी गई थी। इन दोनों एम्स ने आवेदकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई। बठिंडा एम्स ने अमृत फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं के बिल भी साझा किए, जो पारदर्शिता को दिखाता है। हालांकि, नागपुर एम्स ने दस्तावेज छिपा लिए और भोपाल एम्स ने सही तरीके से जानकारी ही नहीं दी।   
 
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अमृत फार्मेसी - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञों की राय: पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी 
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों को न्यूनतम दर (L-1) पर होने वाली खरीद प्रक्रिया और आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। RTI के तहत सूचना उपलब्ध कराना न केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी है, बल्कि यह जनता के विश्वास को बढ़ाने में भी मदद करता है। पारदर्शिता सुनिश्चित होने से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी धन और संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है।  

भोपाल और नागपुर एम्स ने कहा- अपील कीजिए 
भोपाल एम्स के उप-अधीक्षक मयंक दीक्षित ने कहा कि इस संबंध में संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई थी। यदि उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आपत्ति है, तो आवेदक प्रथम सूचना अधिकारी के पास अपील कर सकता है। वहीं, नागपुर एम्स के लोक सूचना अधिकारी शबीर शेख ने भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति दी गई जानकारी से असंतुष्ट है, तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील कर सकता है।

क्या है अमृत फार्मेसी ?
अमृत का मतलब है इलाज के लिए सस्ती दवाइयां और विश्वसनीय इम्प्लांट मुहैया कराना। अमृत रिटेल फार्मेसी नेटवर्क 5200 से ज्यादा दवाइयां, इम्प्लांट, सर्जिकल डिस्पोजेबल और अन्य वस्तुएं अधिकतम रिटेल मूल्य (MRP) पर 60% तक की औसत छूट पर उपलब्ध कराता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की इस पहल 'अमृत' को नौ साल हो चुके हैं। अमृत की पहली खुदरा दुकान का उद्घाटन 15 नवंबर, 2015 को एम्स- दिल्ली में किया गया।
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