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500 करोड़ जमीन विवाद पर डैमेज कंट्रोल: दिग्विजय बोले- जीतू हमारे नेता, जानकारी नहीं थी इसलिए तथ्य स्पष्ट किए

Mon, 29 Jun 2026 08:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 29 Jun 2026 08:25 PM IST
सार

उज्जैन के वीर भारत न्यास को 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन आवंटन के आरोप को लेकर कांग्रेस में मतभेद सामने आ गया था। विवाद बढ़ने पर दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि जीतू पटवारी उनके नेता हैं और उन्हें ट्रस्ट की सही जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने केवल तथ्य स्पष्ट किए।

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Damage control over ₹500-crore land dispute: Digvijaya says Jeetu is 'our leader'; clarifies facts as he was p
दिग्विजय सिंह औऱ जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 उज्जैन के वीर भारत न्यास को जमीन आवंटन का मामला अब कांग्रेस के भीतर सियासी चर्चा का विषय बन गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया था कि करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन एक निजी ट्रस्ट को महज एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट से मुख्यमंत्री के सलाहकार जुड़े हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। पटवारी के आरोपों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेसवार्ता कर अलग रुख अपनाया था। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि जिस वीर भारत न्यास की बात हो रही है, वह निजी नहीं बल्कि शासकीय ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का गठन सरकार द्वारा किया गया है और इसकी संरचना भी सरकारी है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट बताकर आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
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जीतू पटवारी हमारे पुत्र के समान
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के दो बड़े नेताओं के बयान ही एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं। वहीं कांग्रेस के भीतर भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गईं और मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विवाद बढ़ने के बाद सोमवार को दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कि जीतू पटवारी जी मध्यप्रदेश में हमारे नेता हैं, मेरे पुत्र के समान हैं। उज्जैन के एक निजी ट्रस्ट के संबंध में उन्होंने एक बयान दिया था। परीक्षण के बाद मैंने बताया कि यह निजी नहीं, बल्कि सरकारी ट्रस्ट है। यह जानकारी उन्हें नहीं थी, इसलिए मैंने तथ्य स्पष्ट किए।
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क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस का आरोप है कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये के टोकन शुल्क पर आवंटित की गई। पार्टी का कहना है कि इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं दिग्विजय सिंह का कहना है कि ट्रस्ट की प्रकृति को लेकर गलतफहमी हुई है। उनके अनुसार यह निजी संस्था नहीं, बल्कि शासकीय ट्रस्ट है, इसलिए तथ्यों को स्पष्ट किए बिना इसे घोटाला कहना उचित नहीं है।
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डैमेज कंट्रोल की कोशिश
दिग्विजय सिंह की ताजा सफाई को कांग्रेस की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश माना जा रहा है। उन्होंने जीतू पटवारी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका उद्देश्य प्रदेश अध्यक्ष का विरोध करना नहीं, बल्कि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना था। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर समन्वय और विपक्ष की रणनीति को लेकर नए राजनीतिक सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।


 
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