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कोरोना का असर: पैरोल पर छूटेंगे 400 दुष्कर्मी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रही मध्यप्रदेश सरकार

Sat, 19 Jun 2021 08:20 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 19 Jun 2021 08:20 AM IST
सार

कोरोना महामारी के चलते मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य की जेलों में आजीवन कारावास काट रहे दुष्कर्मियों को पैरोल पर रिहा करने का फैसला लिया गया है। इसमें नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले बंदी भी शामिल हैं।

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corona impact 400 rapists to be released on parole Madhya Pradesh govt contempt of supreme court
जेल की सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी के मद्देनजर मध्यप्रदेश की जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दुष्कर्मियों को भी पैरोल पर रिहा करने की तैयारियां चल रही हैं। जेल मुख्यालय ने इस बाबत पांच जून को सभी जेल अधीक्षकों को पत्र लिखा, जिसमें दुष्कर्म के मामलों सजा काट रहे 400 बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का जिक्र है।

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इनमें 100 बंदी ऐसे हैं, जो नाबालिग बच्चियों से ज्यादती के मामलों में कैद हैं। हालांकि, राज्य सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 2015 के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ऐसे बंदी, जिन्होंने दुष्कर्म का अपराध किया और जिन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के मामले में सजा मिली है, उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता। ऐसे में सरकार के फैसले से पीड़ित परिवार नाराज हैं।
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पीड़ितों के परिजनों ने कही यह बात
जानकारी के मुताबिक, पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि पैरोल अवधि की गणना सजा में नहीं होनी चाहिए। पैरोल पर छोड़ने से पहले जेल प्रबंधन को पीड़ित परिवार का भी पक्ष जानना चाहिए। इस मामले में डीआईजी जेल मुख्यालय संजय पांडे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही बंदियों को पहले 60 दिन और बाद में 30 दिन की पैरोल स्वीकृत है। दुष्कर्म के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों की भी पैरोल पर रोक नहीं है। उन्हें पहले भी पैरोल दी जाती रही है। प्रत्येक मामले में मेरिट के आधार पर पैरोल तय होती है।
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पैरोल पर उठाया यह सवाल
बताया जा रहा है कि पीड़ितों के परिजन बंदियों को पैरोल मिलने के फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि जब कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पा लिया गया है तो पैरोल देने की क्या जरूरत है? पीड़ितों का कहना है कि ऐसे दोषियों को पैरोल पर छोड़ना हमें जीते जी मारने जैसा है। इन दरिंदों को बड़ी मुश्किल में गिरफ्तार किया गया था। अब उन्हें पैरोल पर छोड़ना गलत है। जेल सूत्रों के मुताबिक, नियमानुसार उन सभी बंदियों को पैरोल मिल सकती है, जो दो साल की सजा काट चुके हैं। वहीं, कोरोना काल में राज्य सरकार ने बंदियों की पैरोल अवधि बढ़ा दी है।

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