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नल-जल योजना पर कांग्रेस के सवाल: योजना में 3200 करोड़ खर्च,काम सिर्फ 500 करोड़ का?,काम का मिलान कराने की मांग

Sat, 17 Oct 2026 06:03 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 17 Oct 2026 06:03 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में नल-जल योजना के क्रियान्वयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए सतना और मैहर की करीब 3200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है। पार्टी ने वास्तविक निर्माण, बिलिंग, पाइपलाइन क्षति, जलापूर्ति और कथित अनियमितताओं की जांच कराने के साथ कैग रिपोर्ट तथा मंत्री की कथित नोटशीट पर हुई कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।

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Congress raises questions about the 'Nal-Jal' (tap-water) scheme: Rs 3,200 crore spent, yet only Rs 500 crore
पीसीसी में प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में नल-जल योजना के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद वास्तविक निर्माण और गांवों में जलापूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस ने सतना और मैहर जिलों की करीब 3200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में खर्च और जमीन पर हुए काम का मिलान कराने की मांग की है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि करीब 500 करोड़ रुपये के बराबर ही वास्तविक काम होने की बात सामने आई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता रितेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में नल-जल योजना के क्रियान्वयन, बिलिंग, निर्माण में देरी और पाइपलाइन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सतना-मैहर सहित प्रदेश के सभी जिलों में परियोजनावार वित्तीय ऑडिट, तकनीकी जांच और गांवों में भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
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1200 करोड़ की योजना, कितने गांवों तक पहुंचा पानी?
कांग्रेस नेताओं ने मैहर जिले की बाणसागर समूह जलप्रदाय योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुई इस परियोजना का बजट करीब 1200 करोड़ रुपये बताया गया है। लगभग 980 पंचायतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। नायक के मुताबिक, कंपनी की ओर से करीब 100 गांवों में जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है, जबकि शिकायतों में केवल 30 से 40 गांवों में पानी पहुंचने की बात कही गई है। कांग्रेस ने सरकार से गांववार स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केवल कार्य प्रगति या बिलिंग के आंकड़ों से योजना की सफलता तय नहीं हो सकती। यह भी बताना होगा कि कितने घरेलू कनेक्शन चालू हैं और किन गांवों में नियमित रूप से पानी मिल रहा है।
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2000 करोड़ की परियोजना में देरी पर सवाल
सतना जिले में एलएंडटी से संबंधित करीब 2000 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। नेताओं ने पूछा कि मार्च 2025 की निर्धारित समयसीमा के बाद काम में देरी हुई तो संबंधित कंपनी पर संविदात्मक प्रावधानों के तहत क्या कार्रवाई की गई। विलंब दंड, भुगतान और निर्माण की वास्तविक प्रगति का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई। कांग्रेस ने विभिन्न गांवों में सड़क मरम्मत और रेस्टोरेशन के नाम पर प्रति पंचायत दो से तीन करोड़ रुपये तक की कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच कराने की भी मांग की। पार्टी के अनुसार, संबंधित भुगतान और मौके पर हुए काम का मिलान किया जाना चाहिए।
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पाइपलाइन क्षति और बिलिंग की हो जांच
नायक ने पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि एलएंडटी की ओर से 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की पाइपलाइन क्षति के दावे और मैहर के बगहा से मझगवां क्षेत्र में करीब 65 किलोमीटर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच जरूरी है। उन्होंने नुकसान की वास्तविक राशि, जिम्मेदार पक्ष और वसूली की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने करीब 87 प्रतिशत कार्य प्रगति अथवा बिलिंग के दावों का वास्तविक निर्माण से मिलान कराने पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि प्रत्येक पंचायत में पाइपलाइन की लंबाई, घरेलू कनेक्शन, निर्माण की गुणवत्ता और नियमित जलापूर्ति का सत्यापन होना चाहिए।

पाइप की गुणवत्ता से लेकर एफआईआर तक उठाए सवाल
कांग्रेस ने पाइप जॉइंट में इस्तेमाल ग्रीस की गुणवत्ता पर उठे सवालों की जांच कराने की मांग की। नेताओं के मुताबिक, संबंधित सामग्री के नमूनों की स्वतंत्र मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह निर्धारित तकनीकी और पेयजल सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। प्रदेश प्रवक्ता रितेश त्रिपाठी ने मैहर के रामनगर क्षेत्र स्थित बड़ा इटमा गांव में पाइप चोरी की एफआईआर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि एफआईआर, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट का मिलान कराया जाए, ताकि पाइपलाइन बिछाने और चोरी की शिकायत से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके। अमरपाटन क्षेत्र के पापड़ा में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित मेगा टैंक के मामले में भूमि अभिलेखों, निर्माण अनुमतियों और न्यायालयीन आदेशों की समीक्षा कराने की मांग भी की गई।

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कैग रिपोर्ट और मंत्री की कथित नोटशीट पर जवाब मांगा
कांग्रेस नेताओं ने कैग रिपोर्ट, अधिकारियों की कथित आपत्तियों, एफआईआर और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का हवाला देते हुए सरकार से अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा। उन्होंने मंत्री प्रतिमा बागरी की ओर से जांच संबंधी कथित नोटशीट जारी किए जाने की बात का उल्लेख करते हुए संबंधित नोटशीट, जांच आदेश और उपलब्ध रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने कहा कि जांच ऐसी स्वतंत्र एजेंसी या अधिकारी से कराई जाए, जिसका संबंधित परियोजनाओं अथवा आरोपों से जुड़े पक्षों के साथ हितों का टकराव न हो। अनियमितताएं प्रमाणित होने पर संबंधित कंपनियों, अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ सरकारी धन की वसूली की जाए।

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जल शुल्क से पहले नियमित आपूर्ति का हिसाब मांगा
कांग्रेस ने वर्ष 2027 में नल-जल योजना के तहत जल शुल्क वसूली की संभावनाओं पर भी सवाल उठाए। नेताओं का कहना है कि शुल्क वसूलने से पहले सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन गांवों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, कितने कनेक्शन चालू हैं और कहां नियमित जलापूर्ति हो रही है।त्रिपाठी ने कहा कि जिन गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा, वहां शुल्क वसूली का आधार और वैधता स्पष्ट करना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की कि जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति, बिलिंग और शुल्क व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। पार्टी ने सतना, मैहर समेत प्रदेश की सभी नल-जल परियोजनाओं की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई। पत्रकार वार्ता में मैहर जिला कांग्रेस कमेटी के। अध्यक्ष धर्मेश घई भी उपस्थित रहे।


 
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