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Bhopal: भोपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत,जिपं उपाध्यक्ष-सदस्य भूख हड़ताल पर बैठे,नल-जल योजना अधूरी

Thu, 24 Apr 2025 05:07 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 24 Apr 2025 05:07 PM IST
सार

भोपाल के ग्रमीण क्षेत्रों में  पानी की किल्लत को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट, सदस्य विनय मेहर, चंद्रेश राजपूत, देवकुवर हाड़ा समेत सुरेश राजपूत, अनिल हाड़ा और विनोद राजोरिया जिला पंचायत परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। 

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Bhopal: Water shortage in rural areas of Bhopal, Zilla Parishad vice-president and members go on hunger strike
भूख हड़ताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के ग्रमीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बढ़ रही है, जबकि सरकार नलजल योजना से सभी गांवों में पानी पहुंचाने का दावा करता है। पानी की किल्लत को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट, सदस्य विनय मेहर, चंद्रेश राजपूत, देवकुवर हाड़ा समेत सुरेश राजपूत, अनिल हाड़ा और विनोद राजोरिया जिला पंचायत परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। जाट ने चार दिन पहले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को इसकी जानकारी दे दी थी। जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन से जिम्मेदार अफसरों की सांसें फूल गई हैं। बीती रात वे जनप्रतिनिधियों को मनाने में जुटे रहे। 
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पानी की समस्या ले चुकी है विकराल रूप
उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या अपना विकराल रूप ले चुकी है और यह भी कहा सरकार,अधिकारी एवं ठेकेदार मिलकर भ्रष्टाचार करते हुए इस योजना को पतीला लगा रहे हैं। कई जगह बिजली की समस्या है तो कई जगह डीपी खराब पड़ी है नलों में टोटिया नहीं हैं । कई जगह पानी का स्तर काफी नीचे पहुंच चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की दूर-दूर से लाया जाता है।
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भोपाल के इन गांवों में पानी की परेशानी
भोपाल जिले के खजूरी, गुनगा, कनेरा, शाहपुरा, देवपुरा, गोलखेड़ी, कोठार, चंदेरी, दुपड़िया, कालापीपल, बागापुरा, तारा सेवनिया, आचारपुरा, करारिया, सेमरीखुर्द, खितवास, चाचाहेड़ी, गोंदीपुरा, परवलिया, बरेलाखेड़ा, लहारपुरा समेत कई पंचायतों में लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।


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जिल पंचायत की बैठक में उठा था मुद्दा
नलजल योजना अधूरी होने के कारण गांवों की बड़ी आबादी गर्मी में पानी के लिए परेशान हो रही है। इसे लेकर जिला पंचायत की बैठक में मुद्दा भी उठ चुका है, पर पीएचई विभाग के जिम्मेदार नहीं जागे। इस कारण जिपं उपाध्यक्ष जाट ने कलेक्टर को पत्र लिखा था। जिसमें कहा था कि जिपं ऑफिस परिसर में ही 24 अप्रैल से भूख हड़ताल पर बैठूंगा। हालांकि, कलेक्टर को पत्र लिखते ही सीईओ ईला तिवारी ने नल-जल योजनाओं के बारे में 3 दिन में रिपोर्ट मांग ली थी। उन्होंने जनपद पंचायत फंदा एवं बैरसिया अंतर्गत स्वीकृत, हस्तांतरित, ट्रायलरन, प्रगतिरत नल-जल योजनाओं के निरीक्षण, जांच कराने के लिए टीमें बना दीं। इस टीम में पीएचई, जनपद के इंजीनियर, सचिव, रोजगार सहायक शामिल किए गए, जो जिला पंचायत के सभी सदस्य को अवगत कराते हुए निरीक्षण/जांच करेंगे। यह रिपोर्ट भी गुरुवार को ही पेश कर दी जाएगी।


15 दिन में योजनाओं को पूरा करने का किया था वादा
जिपं उपाध्यक्ष जाट ने कलेक्टर को पत्र लिखा कि 27 मार्च को साधारण सभा की बैठक हुई थी। इसमें जल जीवन मिशन योजना के तहत विभागीय अधिकारियों को 15 दिन में अधूरी नल-जल योजनाओं को पूरा करने को कहा गया था, लेकिन 23 अप्रैल का दिन भी बीत गया। बावजूद अब तक न तो कोई रिपोर्ट दी गई और न ही गांवों में पेयजल संकट खत्म हुआ है।


 
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