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Bhopal: एमपी में फार्मासिस्ट, नेत्र सहायक की भर्ती के नियम में होगा बदलाव, डिप्टी सीएम शुक्ल ने दिए निर्देश
Tue, 13 May 2025 08:35 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 13 May 2025 08:35 PM IST
सार
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट, नेत्र सहायक, ओटी टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती के नियम में बदलाव किया जाएगा। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने विभाग के अधिकारियों को नियमों में बदलाव के निर्देश दिए हैं।
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बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट, नेत्र सहायक, ओटी टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती के नियम में बदलाव किया जाएगा। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने विभाग के अधिकारियों को नियमों में बदलाव के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर कहा है कि नए नियमों के बनने से पात्र आवेदकों को अवसर मिल सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। उन्होंने नर्सिंग संवर्ग के पदों पर सीधी भर्ती के लिए भी आवश्यक औपचारिकताएं जल्दी पूरी करने को कहा है। साथ ही नियमों में आवश्यक संशोधन कर भर्ती के लिए मांग पत्र ईएसबी (एम्प्लाई सिलेक्शन बोर्ड) को तत्काल भेजने के निर्देश दिए हैं।
खाली पदों को भरने के निर्देश
कैबिनेट बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा की। बैठक में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, अधोसंरचना विकास एवं रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के संबंध में निर्देश दिए। डिप्टी सीएम ने कहा कि भुगतान की प्रक्रिया नियमित की जाए, ताकि बजट का समुचित उपयोग हो और विकास कार्यों में गति लाई जा सके। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। रीवा एवं इंदौर मेडिकल कॉलेज के उन्नयन का प्रस्ताव कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजें।
यह भी पढे़-CBSE बोर्ड ने जारी किया परीक्षा परिणाम, 10वीं में भोपाल के शौर्य वर्धन और अथर्व ने प्रदेश में बनाई जगह
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स्वास्थ्य और पोषण विषय की समीक्षा
इधर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने यूनिसेफ भोपाल कार्यालय में प्रदेश में स्वास्थ्य एवं पोषण विषयक पहलों की समीक्षा की। इस दौरान शुक्ल ने कहा है कि मातृ मृत्युदर और शिशु मृत्युदर में सुधार के लिए समाज और सरकार दोनों के साझा प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं है, स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक चेतना को संस्कार के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिये जन-सामान्य को प्रेरित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ किशोरी ही भविष्य में स्वस्थ मां बनती है। किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य की नियमित जांच, गर्भावस्था से पूर्व की तैयारियां, गर्भकालीन निगरानी और प्रसव पश्चात देखरेख अत्यंत आवश्यक है।
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खाली पदों को भरने के निर्देश
कैबिनेट बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा की। बैठक में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, अधोसंरचना विकास एवं रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के संबंध में निर्देश दिए। डिप्टी सीएम ने कहा कि भुगतान की प्रक्रिया नियमित की जाए, ताकि बजट का समुचित उपयोग हो और विकास कार्यों में गति लाई जा सके। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। रीवा एवं इंदौर मेडिकल कॉलेज के उन्नयन का प्रस्ताव कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजें।
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स्वास्थ्य और पोषण विषय की समीक्षा
इधर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने यूनिसेफ भोपाल कार्यालय में प्रदेश में स्वास्थ्य एवं पोषण विषयक पहलों की समीक्षा की। इस दौरान शुक्ल ने कहा है कि मातृ मृत्युदर और शिशु मृत्युदर में सुधार के लिए समाज और सरकार दोनों के साझा प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं है, स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक चेतना को संस्कार के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिये जन-सामान्य को प्रेरित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ किशोरी ही भविष्य में स्वस्थ मां बनती है। किशोरियों के पोषण और स्वास्थ्य की नियमित जांच, गर्भावस्था से पूर्व की तैयारियां, गर्भकालीन निगरानी और प्रसव पश्चात देखरेख अत्यंत आवश्यक है।
