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Bhopal: जनता की आवाज दबाने की नहीं, सुनने की जरूरत, नेता प्रतिपक्ष सिंघार बोले-जिम्मेदार अफसरों की हो जांच

Sat, 27 Sep 2025 04:32 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 27 Sep 2025 04:32 PM IST
सार

सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को लेकर हाल ही में जारी एक सरकारी आदेश पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आदेश में शिकायतकर्ताओं को ब्लैकमेलर और आदतन शिकायती जैसे शब्दों से संबोधित किए जाने को लेकर सिंघार ने सवाल खड़े किए हैं।

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Bhopal: The voice of the people needs to be heard, not suppressed; Leader of the Opposition Singhar said – res
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीएम हेल्पलाइन और सरकारी पोर्टलों पर कथित झूठी या बार-बार की जाने वाली शिकायतों के आधार पर ब्लैकमेलर्स की सूची तैयार कराने के निर्देशों पर सियासत गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस आदेश को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही, इसलिए अब शिकायतकर्ताओं को 'ब्लैकमेलर' बताकर डराने का प्रयास कर रही है। जबकि असली जांच तो उन अधिकारियों की होनी चाहिए जो शिकायतों का समाधान किए बिना उन्हें फोर्स क्लोज कर देते हैं।
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सीएम हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें फोर्स क्लोज की गईं
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों ऐसी शिकायतें हैं जिन्हें बिना किसी ठोस कार्यवाही के केवल कागजों पर निराकृत दिखा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार अगर पारदर्शिता चाहती है तो उन अधिकारियों की कुंडली बनाए जिन्होंने गलत जवाब देकर मामलों को बंद किया, न कि उन नागरिकों की जो अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठा रहे हैं।
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यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है
सिंघार ने कहा कि आम जनता को ब्लैकमेलर की श्रेणी में डालना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। अगर जनता अपनी बात सरकार से नहीं कहेगी, तो किससे कहेगी? उन्होंने कहा कि इस तरह के आदेश से जिम्मेदार और जागरूक नागरिकों को डराया नहीं जा सकता।

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जाने क्या है सरकार का आदश?
दरअसल, लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 25 सितंबर को एक आदेश जारी कर सभी कलेक्टरों से कहा है कि वे आदतन झूठी शिकायत करने वालों और ब्लैकमेलिंग की नीयत से शिकायतें दर्ज कराने वालों की सूची मोबाइल नंबर सहित तैयार कर सरकार को भेजें। यह कदम कथित रूप से व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उठाया गया है।

 
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