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Bhopal: तीन जिंदगियां बचाने थम गई राजधानी,बने दो ग्रीन कॉरीडोर,ब्रेनडेड होने पर पुत्र ने लिया अंगदान का फैसला

Fri, 08 Nov 2024 07:45 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 08 Nov 2024 07:45 PM IST
सार

राजधानी में शुक्रवार को दो ग्रीन कॉरीडोर बनाए गए। दोनों ही कॉरीडोर बंसल अस्पताल से बने। इसमें एक कॉरीडोर बंसल से एम्स अस्पताल तक बना और दूसरा कॉरीडोर बंसल से इंदौर के लिए बना। ब्रेनडेड व्याक्ति का लिवर, दोनों किडनी और आंखें  दान की गईं।

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Bhopal: The capital stopped to save three lives, two green corridors were built, the son decided to donate his
गिरीष यादव की बॉडी ले जाते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में शुक्रवार को दो ग्रीन कॉरीडोर बनाए गए। दोनों ही कॉरीडोर बंसल अस्पताल से बने। इसमें एक कॉरीडोर बंसल से एम्स अस्पताल तक बना और दूसरा कॉरीडोर बंसल से इंदौर के लिए बना। ग्रीन कॉरीडोर के लिए राजधानी की कुछ प्रमुख सडक़ें थोड़ी देर के लिए थम गईं। ट्रेफिक डीसीपी संजय सिंह ने बताया कि प्रशासन से मिली जानकारी के आधार पर भोपाल में शुक्रवार को दो ग्रीन कॉरीडोर बनाए गए। इसमें किसी तरह का रूट डायवर्ट नहीं किया। बल्कि जिन रास्तों से एंबुलेंस को गुजरना था, सिर्फ वहीं कुछ देर के लिए ट्रेफिक हॉल्ट लेकर एंबुलेंस को रास्ता दिया गया। एम्स तक पहुंचने में एंबुलेंस को कुछ मिनट का समय लगा जबकि इंदौर का सफर करीब तीन घंटे में पूरा किया।
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ब्रेन स्ट्रोक के कारण हुई मौत 
बंसल अस्पताल से मिली जानकारी अनुसार बुधनी निवासी गिरीष यादव उम्र 73 वर्ष को कुछ दिन पहले ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। जिस वजह से उनके परिजनों ने उन्हें बंसल अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार को चिकित्सकों ने मरीज को ब्रेनडेड घोषित कर दिया। गिरीष के बड़े बेटे विनय यादव ने चिकित्सकों के परामर्श पर अपने पिता की देह से अंगदान करने का निर्णय लिया। विनय ने बताया कि उनके पिता गिरीष यादव बुधनी में एडवोकेट थे और अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई व समाज सेवा में खर्च किया। इसके साथ ही वह बुधनी कांग्रेस में सक्रिय सदस्य थे। यही वजह रही कि हमने उनकी देह से अंगदान करने का निर्णय लिया है, ताकि पिता जी का शरीर शांत होने के बाद भी किसी के काम आ सके। 
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किडनी एम्स और लिवर इंदौर भेजा 
विनय यादव ने बताया कि चिकित्सकों की टीम ने तमाम तरह की जांचें करने के बाद हमारे पिता जी को ब्रेनडेड घोषित किया, फिर हमने अंगदान की सहमति दी। इसके बाद शुक्रवार को पूरी प्रक्रिया शुरू हुई। बंसल अस्पताल से मिली जानकारी अनुसार दो किडनी में से एक किडनी भोपाल एम्स में दी गई, जहां एक 21 वर्षीय युवती का किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा। दूसरी किडनी बंसल अस्पताल में ही एक मरीज को दी गई। जबकि लिवर इंदौर में किसी मरीज को दिया जा रहा है। इसके लिए इंदौर तक ग्रीन कॉरीडोर बनाया जा रहा है। 
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हार्ट का नहीं हो सका इस्तेमाल  
ब्रेनडेड हुए मरीज की उम्र 73 वर्ष थी। जिस कारण उनके हार्ट का डोनेशन नहीं हो सका। चिकित्सकों ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के कारण मरीज के बाकी अंग तो ठीक थे, लेकिन हार्ट पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रहा था। यही कारण रहा कि हार्ट किसी के काम नहीं आ सका। आंखे गांधी मेडिकल कॉलेज में दान की गईं।
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