{"_id":"680cae4e6b2240d131060eaf","slug":"bhopal-the-budget-of-the-new-building-of-bhopal-municipal-corporation-increased-from-22-crores-to-39-crores-2025-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal: भोपाल नगर निगम की नई बिल्डिंग का बजट 22 करोड़ से 39 करोड़ तक पहुंचा, बिल्डिंग का काम अभी भी अधूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal: भोपाल नगर निगम की नई बिल्डिंग का बजट 22 करोड़ से 39 करोड़ तक पहुंचा, बिल्डिंग का काम अभी भी अधूरा
Sat, 26 Apr 2025 03:32 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 26 Apr 2025 03:32 PM IST
सार
भोपाल नगर निगम की नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य दो साल में पूरा होना था, लेकिन तीन साल बाद भी काम अधूरा है। जबकि इसकी लागत कई बार बढ़ चुकी है। 22 करोड़ से 39 करोड़ तक पहुंच गई है।
विज्ञापन
बीएमसी की नई बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल में नगर निगम के अलग-अलग कई ऑफिस हैं। सभी दफ्तरों को एक जगह लाने के लिए सेकंड स्टाफ के पास नई बिल्डिंग तैयार की जा रही है। निगम मुख्यालय की इस नई बिल्डिंग का काम सन फरवरी 2022 में शुरू किया गया था और 2 सला में इसे पूरा करना था। अब 3 साल से ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन बिल्डिंग पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। खास बात यह है कि इस बिल्डिंग के लिए 22 करोड़ 57 लाख 95 हजार 423 रुपए अनुमानित खर्च आंका गया था। इसमें महापौर परिषद अधिकतम 20% का इजाफा कर सकती थी लेकिन इसमें सीधे 50% से भी ज्यादा बढ़ोतरी कर दी गई। अब इसकी लागत 39 करोड़ 95 लाख 35 हजार 47 रुपए पहुंच गई है। जबकि बिल्डिंग का काम अभी भी अधूरा है। नगर निगम परिषद की बैठक में इसे लेकर सवाल लगाए गए थे और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे थे। हालांकि नगर निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने मामले की जांच करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
बार-बार बजट में की जा रही बढ़ोतरी, निर्माण कार्य अधूरा
नगर निगम भोपाल की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी का कहना है कि नगर निगम का भवन 3 फरवरी 2022 को बनना शुरू हुआ, जो 2 साल में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन अब तक नहीं बन पाया है। नगर निगम के नए मुख्यालय निर्माण के लिए बार-बार बजट में बढ़ोत्तरी की जा रही है।शबिस्ता जकी ने बताया कि जब निगम मुख्यालय भवन का टेंडर हुआ था।उस समय 12 प्रतिशत जीएसटी दी गई। नियम है कि एक बार काम शुरू हो गया तो भले ही बाद में जीएसटी की दर बढ़ें, लेकिन पुराने कामों में बढ़ी हुई जीएसटी की दर लागू नहीं होती। यानि कि जो निर्माण शुरू करने के दौरान जीएसटी का भुगतान हुआ, वहीं निर्माण के अंत तक भुगतान करना है। लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए जीएसटी 12 प्रतिशत की बजाय 18 प्रतिशत वापस कर दी।हालांकि, इस मामले जांच कराने का निर्देश नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दिए हैं।
यह भी पढ़े-मध्य प्रदेश में आज कुछ क्षेत्रों में गर्मी से मिल सकती है राहत, 19 जिलों में बारिश का अलर्ट
विज्ञापन
ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश
शबिस्ता जकी ने बताया कि नगर निगम में अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए तरह-तरह से नियमों का उल्लंघन किया है। वहीं एक तरफ काम पूरा नहीं होने के बावजूद एमआईसी ने ठेकेदार पर पेनाल्टी नहीं लगाई है। अधिकारियों ने ठेकेदार की जमा 43 लाख रुपए की एफडीआर और 42 लाख रुपए की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी वापस कर दी। इसके बदले अधिकारियों ने ठेकेदार से बैंक गारंटी जमा करवा ली है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।
विज्ञापन
बार-बार बजट में की जा रही बढ़ोतरी, निर्माण कार्य अधूरा
नगर निगम भोपाल की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी का कहना है कि नगर निगम का भवन 3 फरवरी 2022 को बनना शुरू हुआ, जो 2 साल में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन अब तक नहीं बन पाया है। नगर निगम के नए मुख्यालय निर्माण के लिए बार-बार बजट में बढ़ोत्तरी की जा रही है।शबिस्ता जकी ने बताया कि जब निगम मुख्यालय भवन का टेंडर हुआ था।उस समय 12 प्रतिशत जीएसटी दी गई। नियम है कि एक बार काम शुरू हो गया तो भले ही बाद में जीएसटी की दर बढ़ें, लेकिन पुराने कामों में बढ़ी हुई जीएसटी की दर लागू नहीं होती। यानि कि जो निर्माण शुरू करने के दौरान जीएसटी का भुगतान हुआ, वहीं निर्माण के अंत तक भुगतान करना है। लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए जीएसटी 12 प्रतिशत की बजाय 18 प्रतिशत वापस कर दी।हालांकि, इस मामले जांच कराने का निर्देश नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दिए हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़े-मध्य प्रदेश में आज कुछ क्षेत्रों में गर्मी से मिल सकती है राहत, 19 जिलों में बारिश का अलर्ट
विज्ञापन
ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश
शबिस्ता जकी ने बताया कि नगर निगम में अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए तरह-तरह से नियमों का उल्लंघन किया है। वहीं एक तरफ काम पूरा नहीं होने के बावजूद एमआईसी ने ठेकेदार पर पेनाल्टी नहीं लगाई है। अधिकारियों ने ठेकेदार की जमा 43 लाख रुपए की एफडीआर और 42 लाख रुपए की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी वापस कर दी। इसके बदले अधिकारियों ने ठेकेदार से बैंक गारंटी जमा करवा ली है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।
