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Bhopal: नर्सिंग कॉलेजों पर फिर उठे सवाल, कांग्रेस का आरोप 13 सरकारी नर्सिंग कॉलेज में नियम अनुसार फैकल्टी नहीं
Wed, 27 Aug 2025 06:14 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 27 Aug 2025 06:14 PM IST
सार
प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेज पर आवश्यकता के अनुसार फैकल्टी नहीं होने का आरोप लगा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की कमी से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
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पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में गड़बड़ी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब एक बार फिर से प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेज पर आवश्यकता के अनुसार फैकल्टी नहीं होने का आरोप लगा है। पीसीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश नायक, एनएसयूआई के उपाध्यक्ष रवि परमार और प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की कमी से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। इसके साथ ही प्रदेश की शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो
कांग्रेस मीडिया विभाग अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने कहा कि यह शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है। यदि सरकार चाहती है कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे तो उसे तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे। वर्तमान स्थिति प्रदेश के लिए चिंताजनक है।
दोगुनी-तिगुनी फीस चुकाने को मजबूर छात्र
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को माफिया संचालित कर रहे हैं और सरकार की मौन स्वीकृति से छात्रों को निजी महाविद्यालयों में दोगुनी-तिगुनी फीस चुकाने पर मजबूर किया जा रहा है। शासकीय कालेजों की उपेक्षा कर भाजपा सरकार कमीशन के लालच में निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। नर्सिंग कॉलेज घोटाले की दो बार सीबीआई जांच हो चुकी है, लेकिन गड़बड़ियां जस की तस बनी हैं।
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तीन कॉलेजों में केवल एक-एक फैक्ल्टी
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं। इनमें नियमानुसार प्राचार्य, उप प्राचार्य, प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं। हैरानी की बात है कि 3 कॉलेजों में तो सिर्फ 1-1 फैकल्टी के भरोसे पूरी व्यवस्था है। हम दावे के साथ कह रहे हैं कि 2025-26 सत्र में इन 13 नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता नहीं मिलेगी। 13 नर्सिंग कॉलेज में से 04 नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जिनमें सीबीआई ने कमियां पाईं थी।इन्हें डिफिशिएंसी कैटेगरी में रखा था, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा सूटेबल कर दिया गया ।
यह भी पढ़ें-शारिक मछली की कोठी का टूटा ताला, प्रशासन आज से करेगा 99 एकड़ जमीन की नपती
कांग्रेस की यह प्रमुख मांगें
1. नर्सिंग कॉलेजों में संदिग्ध नियुक्तियों और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. जिन शासकीय कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है, वहां तत्काल नियम अनुसार स्टाफ की नियुक्ति की जाए।
3. हाईकोर्ट द्वारा गठित जुलानिया समिति की रिपोर्ट की फोरेंसिक जांच कर वास्तविक कमियों को सार्वजनिक किया जाए।
4. दोषी प्राचार्य, फैकल्टी और अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्यवाही की जाए।
5. छात्रों को शैक्षणिक नुकसान से बचाने के लिए ऑप्शनल व्यवस्था और अस्थायी समाधान तत्काल लागू किए जाएं।
यह भी पढ़ें-निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज पर संकट! बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस ग्राहकों की बढ़ी मुश्किले
इन नर्सिंग कॉलेजों पर आरोप
- शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग (जीएमसी) में प्राचार्य से लेकर प्रोफेसर पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नत किया गया।
- भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में आउटसोर्स एजेंसी पर निर्भरता।
- पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान में प्राचार्य ही नहीं हैं। अन्य की नियुक्तियां मानकों के विरुद्ध हुई।
- इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी अनूपपुर और शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद मेडिकल उज्जैन में सिर्फ एक-एक फैकल्टी है।
- जबलपुर के ऑटोनोमस आयुर्वेद नर्सिंग कॉलेज में केवल 2 फैकल्टी है। इसी तरह अन्य कॉलेजों की स्थिति है।
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छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो
कांग्रेस मीडिया विभाग अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने कहा कि यह शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर मामला है। यदि सरकार चाहती है कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे तो उसे तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे। वर्तमान स्थिति प्रदेश के लिए चिंताजनक है।
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दोगुनी-तिगुनी फीस चुकाने को मजबूर छात्र
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को माफिया संचालित कर रहे हैं और सरकार की मौन स्वीकृति से छात्रों को निजी महाविद्यालयों में दोगुनी-तिगुनी फीस चुकाने पर मजबूर किया जा रहा है। शासकीय कालेजों की उपेक्षा कर भाजपा सरकार कमीशन के लालच में निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। नर्सिंग कॉलेज घोटाले की दो बार सीबीआई जांच हो चुकी है, लेकिन गड़बड़ियां जस की तस बनी हैं।
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तीन कॉलेजों में केवल एक-एक फैक्ल्टी
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं। इनमें नियमानुसार प्राचार्य, उप प्राचार्य, प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं। हैरानी की बात है कि 3 कॉलेजों में तो सिर्फ 1-1 फैकल्टी के भरोसे पूरी व्यवस्था है। हम दावे के साथ कह रहे हैं कि 2025-26 सत्र में इन 13 नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता नहीं मिलेगी। 13 नर्सिंग कॉलेज में से 04 नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जिनमें सीबीआई ने कमियां पाईं थी।इन्हें डिफिशिएंसी कैटेगरी में रखा था, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा सूटेबल कर दिया गया ।
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कांग्रेस की यह प्रमुख मांगें
1. नर्सिंग कॉलेजों में संदिग्ध नियुक्तियों और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. जिन शासकीय कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी है, वहां तत्काल नियम अनुसार स्टाफ की नियुक्ति की जाए।
3. हाईकोर्ट द्वारा गठित जुलानिया समिति की रिपोर्ट की फोरेंसिक जांच कर वास्तविक कमियों को सार्वजनिक किया जाए।
4. दोषी प्राचार्य, फैकल्टी और अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्यवाही की जाए।
5. छात्रों को शैक्षणिक नुकसान से बचाने के लिए ऑप्शनल व्यवस्था और अस्थायी समाधान तत्काल लागू किए जाएं।
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इन नर्सिंग कॉलेजों पर आरोप
- शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग (जीएमसी) में प्राचार्य से लेकर प्रोफेसर पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नत किया गया।
- भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में आउटसोर्स एजेंसी पर निर्भरता।
- पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान में प्राचार्य ही नहीं हैं। अन्य की नियुक्तियां मानकों के विरुद्ध हुई।
- इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी अनूपपुर और शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद मेडिकल उज्जैन में सिर्फ एक-एक फैकल्टी है।
- जबलपुर के ऑटोनोमस आयुर्वेद नर्सिंग कॉलेज में केवल 2 फैकल्टी है। इसी तरह अन्य कॉलेजों की स्थिति है।
