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भोपाल: महिला वकील का नाम गुंडा सूची में डालने पर पुलिस को राहत, 2 लाख का हर्जाना जिला अदालत ने हटाया

Sat, 03 Oct 2026 08:49 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sat, 03 Oct 2026 08:49 AM IST
सार

भोपाल में महिला अधिवक्ता वीणा गौतम का नाम गुंडा सूची में दर्ज करने के मामले में पुलिस अधिकारियों को जिला अदालत से राहत मिली है।अदालत ने निचली अदालत का 2 लाख रुपए हर्जाने का फैसला रद्द करते हुए कहा कि केस खारिज होना मात्र पुलिस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण साबित नहीं करता।

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Bhopal: Police Get Relief as Court Cancels ₹2 Lakh Fine in Woman Lawyer’s Gunda List Case
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

महिला अधिवक्ता वीणा गौतम का नाम गुंडा सूची में दर्ज करने और उनके खिलाफ की गई निवारक कार्रवाई को लेकर पुलिस अधिकारियों को जिला अदालत से राहत मिली है। न्यायाधीश अजय पेंदाम की अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर 2 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति लगाई गई थी। जिला अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस की ओर से की गई निवारक कार्रवाई को सिर्फ इसलिए दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता, क्योंकि बाद में एसडीएम कोर्ट ने संबंधित प्रकरण को निरस्त कर दिया था। अदालत के अनुसार, केवल प्रकरण खारिज हो जाने से अपने आप क्षतिपूर्ति का अधिकार नहीं बनता।
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2020 में गुंडा सूची में दर्ज हुआ था नाम
मामला वर्ष 2020 का है। वीणा गौतम ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक ने उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण तरीके से झूठा इस्तगासा तैयार किया। 22 सितंबर 2020 को पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए नाम गुंडा सूची में क्रमांक 721 पर दर्ज किया और मामला एसडीएम नजूल कोर्ट भेज दिया। एसडीएम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2021 को प्रकरण को आगे चलाने योग्य नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया। इसके बाद वीणा गौतम ने पुलिस की कार्रवाई से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का हवाला देते हुए 2 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए सिविल दावा दायर किया था। निचली अदालत ने उनका दावा स्वीकार करते हुए पुलिस अधिकारियों पर 2 लाख रुपए का हर्जाना लगाया था। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी।
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तीन आपराधिक मामलों को बनाया था आधार
जिला अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि वीणा गौतम के खिलाफ ऐशबाग थाने में तीन आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस ने इन्हीं मामलों को आधार बनाते हुए उनका नाम गुंडा सूची में दर्ज किया और निवारक कार्रवाई के लिए प्रकरण एसडीएम नजूल कोर्ट भेजा था। हालांकि, एसडीएम कोर्ट ने उन्हें आदतन अपराधी नहीं माना और प्रकरण को निरस्त कर दिया। जिला अदालत ने कहा कि एसडीएम कोर्ट का यह निर्णय अपने आप में पुलिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। 

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निचली अदालत का फैसला हुआ निरस्त
जिला अदालत ने इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए 2 लाख रुपए के हर्जाने के आदेश को रद्द कर दिया। फैसले का मुख्य आधार यह रहा कि बाद में किसी निवारक प्रकरण का निरस्त होना मात्र इस बात का प्रमाण नहीं है कि पुलिस ने कार्रवाई दुर्भावना से की थी।
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