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Bhopal: फार्मेसी पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, घर बैठे रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा, तीन माह में 3500 नए पंजीयन
Wed, 10 Sep 2025 05:39 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 10 Sep 2025 05:39 PM IST
सार
मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध काराने की पहल की गई है। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। यह जानकारी मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में दी गई है।
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मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
लंबित मामले निपटाने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अभी बकी हैं, जिन्हें समय पर पूरा किया जाए। प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएं। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार हेतु सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें।
यह भी पढ़ें-औबेदुल्लागंज से गांजा तस्करी करने आए थे तस्कर, मिसरोद इलाके में नहीं गल पाई दाल, ऐसे पकड़े गए
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तीन माह में 3500 से अधिक नए पंजीयन हुए
बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है।
यह भी पढें-अवैध खनन मामले में विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ी, वकीलों ने केस लड़ने से इंकार
सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त
नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, मप्र.), आत्री (मुख्य विश्लेषक, मप्र. शासन) तथा चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
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लंबित मामले निपटाने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अभी बकी हैं, जिन्हें समय पर पूरा किया जाए। प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएं। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार हेतु सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें।
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तीन माह में 3500 से अधिक नए पंजीयन हुए
बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है।
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सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त
नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, मप्र.), आत्री (मुख्य विश्लेषक, मप्र. शासन) तथा चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
