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Bhopal News: एमपी में साइबर ठगी का जाल गहरा, 4 साल में 1054 करोड़ साफ, नेता प्रतिपक्ष ने सिस्टम पर उठाए सवाल
Sat, 21 Mar 2026 05:48 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 21 Mar 2026 05:48 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में चार साल में 1054 करोड़ रुपए की साइबर ठगी ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। बेहद कम रिकवरी और कमजोर सिस्टम के चलते अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं, जिस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा है।
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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध अब बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार साल में ठगों ने 1054 करोड़ रुपए उड़ा दिए, जबकि व्यवस्था उन्हें रोकने में नाकाम नजर आ रही है। इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हर साल करोड़ों की ठगी, आम लोग बन रहे शिकार
सिंघार के मुताबिक 1 मई 2021 से 13 जुलाई 2025 के बीच राज्य में 1054 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई। यानी हर साल औसतन करीब 263.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी। उन्होंने कहा कि रोजाना लोग फर्जी कॉल, मैसेज और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीकों से ठगे जा रहे हैं।
रिकवरी बेहद कम, 99% पैसा गायब
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी गई राशि में से केवल करीब 1.94 करोड़ रुपए ही वापस मिल सके। यानी 99.82 प्रतिशत रकम अब तक वापस नहीं आ पाई है, जो सिस्टम की बड़ी कमजोरी को उजागर करता है।
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कमजोर सिस्टम से बढ़ रहे अपराध
सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य में न तो मजबूत साइबर फॉरेंसिक डिवीजन है और न ही पर्याप्त पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर। करीब 8 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए संसाधन बेहद सीमित हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
यह भी पढ़ें-नमाज में उमड़ा जनसैलाब, शिया समुदाय का विरोध, अमेरिका-इजराइल के खिलाफ लगे नारे
दोषसिद्धि दर भी बेहद कम
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2021 से 2023 के बीच 2100 साइबर अपराध दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ 191 मामलों में सजा हो सकी। यानी दोषसिद्धि दर करीब 9 प्रतिशत ही रही।
यह भी पढ़ें-एमपी में बारिश का दौर जारी, पूर्वी क्षेत्र के 14 जिलों में आज भी अलर्ट, तापमान मे आई गिरावट
अन्य राज्यों से पीछे एमपी
तुलना करते हुए सिंघार ने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और केरल जैसे राज्यों में साइबर क्राइम थानों की संख्या कहीं ज्यादा है, जबकि मध्य प्रदेश इस मामले में काफी पीछे है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश उन गिने-चुने राज्यों में है जहां साइबर फॉरेंसिक डिवीजन तक नहीं है। सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाया कि लापरवाही के कारण मध्य प्रदेश साइबर अपराधियों के लिए “आसान टारगेट” बनता जा रहा है। आम लोग लगातार ठगी का शिकार हो रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई और मजबूत व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
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हर साल करोड़ों की ठगी, आम लोग बन रहे शिकार
सिंघार के मुताबिक 1 मई 2021 से 13 जुलाई 2025 के बीच राज्य में 1054 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई। यानी हर साल औसतन करीब 263.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी। उन्होंने कहा कि रोजाना लोग फर्जी कॉल, मैसेज और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीकों से ठगे जा रहे हैं।
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रिकवरी बेहद कम, 99% पैसा गायब
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी गई राशि में से केवल करीब 1.94 करोड़ रुपए ही वापस मिल सके। यानी 99.82 प्रतिशत रकम अब तक वापस नहीं आ पाई है, जो सिस्टम की बड़ी कमजोरी को उजागर करता है।
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कमजोर सिस्टम से बढ़ रहे अपराध
सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य में न तो मजबूत साइबर फॉरेंसिक डिवीजन है और न ही पर्याप्त पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर। करीब 8 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए संसाधन बेहद सीमित हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
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दोषसिद्धि दर भी बेहद कम
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2021 से 2023 के बीच 2100 साइबर अपराध दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ 191 मामलों में सजा हो सकी। यानी दोषसिद्धि दर करीब 9 प्रतिशत ही रही।
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अन्य राज्यों से पीछे एमपी
तुलना करते हुए सिंघार ने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और केरल जैसे राज्यों में साइबर क्राइम थानों की संख्या कहीं ज्यादा है, जबकि मध्य प्रदेश इस मामले में काफी पीछे है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश उन गिने-चुने राज्यों में है जहां साइबर फॉरेंसिक डिवीजन तक नहीं है। सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाया कि लापरवाही के कारण मध्य प्रदेश साइबर अपराधियों के लिए “आसान टारगेट” बनता जा रहा है। आम लोग लगातार ठगी का शिकार हो रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई और मजबूत व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
