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Bhopal News: भोपाल कोर्ट में वकीलों के दो गुट आमने-सामने,चुनावी विवाद ने पकड़ा तूल, आमसभा हंगामे में बदली
Sat, 25 Apr 2026 09:02 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 25 Apr 2026 09:02 AM IST
सार
भोपाल कोर्ट में बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आमसभा के दौरान वकीलों के दो गुटों में टकराव और झूमाझटकी की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस हस्तक्षेप के बाद शांत कराया गया। चुनाव प्रक्रिया को लेकर अभी भी असमंजस बरकरार है।
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जिला न्यायालय भोपाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिला बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर राजधानी के कोर्ट परिसर में माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। शुक्रवार को हालात तब बिगड़ गए, जब आमसभा के दौरान वकीलों के दो गुटों के बीच तीखी बहस शुरू हुई और देखते ही देखते मामला झूमाझटकी तक पहुंच गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हो सका।
चुनाव अधिकारी को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ है। एक पक्ष का आरोप है कि कार्यकारिणी ने पहले बहुमत से 19 वोटों के आधार पर जगमोहन शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी चुना था, लेकिन बाद में अचानक निर्णय बदलते हुए अध्यक्ष की सहमति से इंद्रजीत राजपूत को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसी फैसले ने वकीलों के बीच असंतोष को जन्म दिया।
पहले भी हो चुका था विरोध
यह विवाद अचानक नहीं भड़का, बल्कि एक दिन पहले गुरुवार शाम को भी इसी मुद्दे को लेकर कोर्ट परिसर में हंगामा हुआ था। उस समय स्थिति को संभालते हुए तय किया गया था कि शुक्रवार को आमसभा बुलाकर इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन शुक्रवार की बैठक भी विवाद से नहीं बच सकी।
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आमसभा में बढ़ा टकराव
शुक्रवार को जैसे ही आमसभा शुरू हुई, विरोध कर रहे वकीलों ने खुलकर अपनी नाराजगी जतानी शुरू कर दी। कुछ वकीलों ने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन महीने पहले ही खत्म हो चुका है, ऐसे में उसके द्वारा लिए गए फैसलों की वैधता पर संदेह है। इसी बात को लेकर बहस तेज हुई और माहौल गरमा गया। बहस के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। कोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद अन्य वकीलों और कर्मचारियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ता गया।
यह भी पढ़ें-मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी, छतरपुर सबसे ज्यादा तप रहा, आज 20 से ज्यादा जिलों में लू की चेतावन
पुलिस के हस्तक्षेप से थमा विवाद
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस को बुलाया गया। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को अलग किया गया और किसी तरह माहौल को शांत कराया गया। इसके बाद आमसभा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वकीलों के बीच जारी मतभेद के चलते चुनाव प्रक्रिया पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
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चुनाव अधिकारी को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ है। एक पक्ष का आरोप है कि कार्यकारिणी ने पहले बहुमत से 19 वोटों के आधार पर जगमोहन शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी चुना था, लेकिन बाद में अचानक निर्णय बदलते हुए अध्यक्ष की सहमति से इंद्रजीत राजपूत को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसी फैसले ने वकीलों के बीच असंतोष को जन्म दिया।
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पहले भी हो चुका था विरोध
यह विवाद अचानक नहीं भड़का, बल्कि एक दिन पहले गुरुवार शाम को भी इसी मुद्दे को लेकर कोर्ट परिसर में हंगामा हुआ था। उस समय स्थिति को संभालते हुए तय किया गया था कि शुक्रवार को आमसभा बुलाकर इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन शुक्रवार की बैठक भी विवाद से नहीं बच सकी।
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आमसभा में बढ़ा टकराव
शुक्रवार को जैसे ही आमसभा शुरू हुई, विरोध कर रहे वकीलों ने खुलकर अपनी नाराजगी जतानी शुरू कर दी। कुछ वकीलों ने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन महीने पहले ही खत्म हो चुका है, ऐसे में उसके द्वारा लिए गए फैसलों की वैधता पर संदेह है। इसी बात को लेकर बहस तेज हुई और माहौल गरमा गया। बहस के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। कोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद अन्य वकीलों और कर्मचारियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ता गया।
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पुलिस के हस्तक्षेप से थमा विवाद
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस को बुलाया गया। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को अलग किया गया और किसी तरह माहौल को शांत कराया गया। इसके बाद आमसभा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वकीलों के बीच जारी मतभेद के चलते चुनाव प्रक्रिया पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
