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Bhopal News: इंदौर के बाद भी भोपाल BMC सुस्त,पानी की सैंपलिंग पर महापौर खुद अनजान,15 प्लांट 4 केमिस्ट के भरोसे
Fri, 02 Jan 2026 04:52 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 02 Jan 2026 04:52 PM IST
सार
इंदौर में दूषित पानी की घटना के बाद भी भोपाल नगर निगम की पेयजल व्यवस्था सुस्त नजर आ रही है। पानी की सैंपलिंग, जांच और पिछले तीन दिनों में किए गए टेस्ट को लेकर महापौर मालती राय कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकीं और हर सवाल पर पता करके बताते हैं कहती रहीं।
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पानी का सैंपल लेता निगम कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इंदौर में दूषित पानी से हुई गंभीर घटना के बाद जहां पूरे प्रदेश में सतर्कता बरती जा रही है, वहीं राजधानी भोपाल में पेयजल की जांच और सैंपलिंग व्यवस्था को लेकर नगर निगम की सुस्ती सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में महापौर मालती राय खुद भी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहीं। शहर में मौजूद 15 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 30 लाख लोगों को पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन इस पूरे सिस्टम की गुणवत्ता जांच महज चार केमिस्टों के भरोसे चल रही है। विशेषज्ञ इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ मान रहे हैं।
भोपाल की जल आपूर्ति का गणित
- नर्मदा नदी से 30–35% पानी
- कोलार डैम से प्रतिदिन करीब 170 एमएलडी
- बड़ा तालाब और केरवा डैम से लगभग 20 एमएलडी
इतने बड़े जल स्रोतों के बावजूद निगरानी व्यवस्था सीमित संसाधनों में चल रही है।
तकनीकी स्टाफ की भारी कमी
भोपाल नगर निगम (BMC) में लंबे समय से तकनीकी स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि नियमित और संवेदनशील सैंपलिंग जैसे काम के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की बजाय निगम के ड्राइवर को लगाया गया है। आरोप है कि शहर के अलग-अलग इलाकों से पानी के सैंपल ड्राइवर द्वारा इकट्ठा किए जा रहे हैं, जो नियमों और मानकों के विपरीत है।
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यह भी पढ़ें-आरजीपीवी में गड़बड़ियों के साए के बाद नए कुलपति की तलाश, राजभवन ने शुरू की आवेदन प्रक्रिया
महापौर ने जताई अनभिज्ञता
महापौर मालती राय ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों से जानकारी लेकर बताया जाएगा कि कितने सैंपल की जांच हो रही है और कितने केमिस्ट कार्यरत हैं।
यह भी पढ़ें-सरसंघचालक मोहन भागवत आज से दो दिवसीय भोपाल प्रवास पर, विभिन्न कार्यक्रमों में करेंगे सहभागिता
ड्राइवर के भरोसे सैंपलिंग
जानकारी के अनुसार, निगम के ड्राइवर पंकज जांगड़े द्वारा कई इलाकों से पानी के सैंपल भरे जा रहे हैं। बुधवार को भी टीटी नगर सहित अन्य क्षेत्रों से सैंपल लिए गए। जबकि नियमों के मुताबिक सैंपलिंग एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें थोड़ी सी लापरवाही भी रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती है।
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भोपाल की जल आपूर्ति का गणित
- नर्मदा नदी से 30–35% पानी
- कोलार डैम से प्रतिदिन करीब 170 एमएलडी
- बड़ा तालाब और केरवा डैम से लगभग 20 एमएलडी
इतने बड़े जल स्रोतों के बावजूद निगरानी व्यवस्था सीमित संसाधनों में चल रही है।
तकनीकी स्टाफ की भारी कमी
भोपाल नगर निगम (BMC) में लंबे समय से तकनीकी स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि नियमित और संवेदनशील सैंपलिंग जैसे काम के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की बजाय निगम के ड्राइवर को लगाया गया है। आरोप है कि शहर के अलग-अलग इलाकों से पानी के सैंपल ड्राइवर द्वारा इकट्ठा किए जा रहे हैं, जो नियमों और मानकों के विपरीत है।
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महापौर ने जताई अनभिज्ञता
महापौर मालती राय ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों से जानकारी लेकर बताया जाएगा कि कितने सैंपल की जांच हो रही है और कितने केमिस्ट कार्यरत हैं।
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ड्राइवर के भरोसे सैंपलिंग
जानकारी के अनुसार, निगम के ड्राइवर पंकज जांगड़े द्वारा कई इलाकों से पानी के सैंपल भरे जा रहे हैं। बुधवार को भी टीटी नगर सहित अन्य क्षेत्रों से सैंपल लिए गए। जबकि नियमों के मुताबिक सैंपलिंग एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें थोड़ी सी लापरवाही भी रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती है।
