{"_id":"69a58dd9d2923e23a10014ac","slug":"bhopal-news-allegations-of-percentage-raj-in-the-water-resources-department-tenders-stalled-for-one-and-a-ha-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal News: कांग्रेस का जल संसाधन से जुड़े कामकाज में गड़बड़ी का आरोप; विभाग ने कहा- सारी बातें बेबुनियाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal News: कांग्रेस का जल संसाधन से जुड़े कामकाज में गड़बड़ी का आरोप; विभाग ने कहा- सारी बातें बेबुनियाद
Mon, 02 Mar 2026 06:51 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 02 Mar 2026 06:51 PM IST
सार
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग से जुड़े कामकाज में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। हालांकि, जल संसाधन विभाग ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। विभाग ने कहा है कि एक शर्त को हटाने का दबाव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग में कथित परसेंटेज मॉडल और फिक्स टेंडर सिस्टम को लेकर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने सोमवार को भोपाल में प्रेस वार्ता में यह दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े टेंडरों में कमीशन आधारित साठगांठ का तंत्र सक्रिय है। हालांकि, अमर उजाला से बातचीत में जल संसाधन विभाग के सूत्रों ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि 300 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स में पहले से प्रतिशत तय किए जाते हैं। कथित रूप से बिचौलियों के जरिए विभागीय और उच्च स्तर तक कमीशन का नेटवर्क काम करता है। यदि तय “हिसाब” पूरा न पहुंचे तो टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होती है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रोजेक्ट्स में साइट पर सामग्री पहुंचे बिना भुगतान निकाले जाने और DI पाइप की जगह HDPE पाइप बिछाने जैसी शिकायतें मिली हैं। साथ ही L1 घोषित होने के बाद 2% तक की अनिवार्य कटौती का भी दावा किया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि टेंडर प्रक्रिया ठप है तो परियोजनाएं कैसे पूरी होंगी और किसानों तक पानी कैसे पहुंचेगा। कांग्रेस ने 2023-24 के सभी टेंडरों की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच, सार्वजनिक दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच तथा कथित संदिग्ध परिसरों की पड़ताल की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल टेंडर का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और किसानों के भविष्य से जुड़ा है।
विभाग बोला- आरोप बेबुनियाद
इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ डेढ़ साल से टेंडर नहीं होने की बात की जा रही है।
विज्ञापन
40 लाख हेक्टेयर की योजनाएं जमीन पर
विभाग ने कहा कि जल संसाधन विभाग की 40 लाख हेक्टेयर की योजनाएं जमीन पर चल रही हैं। अधिकतर काम केन बेतवा और पावर्ती काली सिंध चंबल नदी लिंक परियोजना के एमओयू उत्तरप्रदेश और राजस्थान के साथ हुए हैं। अधिकतर काम इन दोनों ही परियोजनाओं के ही रुके हुए हैं। इसमें केंद्रीय जल आयोग की अनापत्ति लगती है। इसमें सवाल-जवाब की प्रक्रिया में समय लगता है। दोनों ही राज्यों की तरफ की जानकारी सत्यापित होती है। जल संसाधन विभाग की योजनाओं के ई-टेंडर निकलते हैं। इसमें कोई भी कंपनी कहीं से भी भाग ले सकती है। पिछले टेंडर में बड़ी कंपनियों ने भाग लिया है।
शर्त हटाने का दबाव
विभाग ने कहा कि हमारे पास बड़े बांध और नहर के काम हैं। इनके टेंडर में प्रेशराइज्ड पाइप एरिगेशन के अनुभव की शर्त डाली है। इस शर्त को हटाने का दबाव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि 300 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स में पहले से प्रतिशत तय किए जाते हैं। कथित रूप से बिचौलियों के जरिए विभागीय और उच्च स्तर तक कमीशन का नेटवर्क काम करता है। यदि तय “हिसाब” पूरा न पहुंचे तो टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होती है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रोजेक्ट्स में साइट पर सामग्री पहुंचे बिना भुगतान निकाले जाने और DI पाइप की जगह HDPE पाइप बिछाने जैसी शिकायतें मिली हैं। साथ ही L1 घोषित होने के बाद 2% तक की अनिवार्य कटौती का भी दावा किया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि टेंडर प्रक्रिया ठप है तो परियोजनाएं कैसे पूरी होंगी और किसानों तक पानी कैसे पहुंचेगा। कांग्रेस ने 2023-24 के सभी टेंडरों की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच, सार्वजनिक दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच तथा कथित संदिग्ध परिसरों की पड़ताल की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल टेंडर का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और किसानों के भविष्य से जुड़ा है।
विज्ञापन
विभाग बोला- आरोप बेबुनियाद
इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ डेढ़ साल से टेंडर नहीं होने की बात की जा रही है।
विज्ञापन
40 लाख हेक्टेयर की योजनाएं जमीन पर
विभाग ने कहा कि जल संसाधन विभाग की 40 लाख हेक्टेयर की योजनाएं जमीन पर चल रही हैं। अधिकतर काम केन बेतवा और पावर्ती काली सिंध चंबल नदी लिंक परियोजना के एमओयू उत्तरप्रदेश और राजस्थान के साथ हुए हैं। अधिकतर काम इन दोनों ही परियोजनाओं के ही रुके हुए हैं। इसमें केंद्रीय जल आयोग की अनापत्ति लगती है। इसमें सवाल-जवाब की प्रक्रिया में समय लगता है। दोनों ही राज्यों की तरफ की जानकारी सत्यापित होती है। जल संसाधन विभाग की योजनाओं के ई-टेंडर निकलते हैं। इसमें कोई भी कंपनी कहीं से भी भाग ले सकती है। पिछले टेंडर में बड़ी कंपनियों ने भाग लिया है।
शर्त हटाने का दबाव
विभाग ने कहा कि हमारे पास बड़े बांध और नहर के काम हैं। इनके टेंडर में प्रेशराइज्ड पाइप एरिगेशन के अनुभव की शर्त डाली है। इस शर्त को हटाने का दबाव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
