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Bhopal:किशोरों की मानसिक सेहत के लिए नए प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च,डिप्टी CM बोले-मानसिक स्वास्थ्य के समाधान संभव
Tue, 22 Jul 2025 10:07 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 22 Jul 2025 10:07 PM IST
सार
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने यूनिसेफ और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस के साथ मिलकर किशोर और युवा मानसिक स्वास्थ्य पर एक नेशनल फैक्ट शीट और ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स’ (मै अपने मित्र का समर्थन करता हूं) नामक नया प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किया।
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मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में किशोरों और युवाओं की बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने यूनिसेफ और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS) के साथ मिलकर मंगलवार को भोपाल में आयोजित एक राष्ट्रीय परामर्श सत्र में किशोर और युवा मानसिक स्वास्थ्य पर एक नेशनल फैक्ट शीट और ‘आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स’ (मै अपने मित्र का समर्थन करता हूं) नामक नया प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पूर्ण स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की समग्र स्थिति है। किशोरों में बढ़ते मानसिक दबावों को देखते हुए समय रहते सटीक हस्तक्षेप आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के समाधान संभव हैं, और इस दिशा में विशेषज्ञ मंथन और युवा संवाद जैसे प्रयासों से आउटरीच को गति मिलेगी। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कारणों और प्रभावों की पहचान के साथ-साथ मेडिकल और सामाजिक हस्तक्षेप के बिंदु भी चिन्हित किए जाएंगे।
पीयर-सपोर्ट मॉड्यूल का विस्तार
दरअसल यह मॉड्यूल पहले से चल रहे राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अंतर्गत मौजूद पीयर-सपोर्ट मॉड्यूल का विस्तार है। यह पूरक मॉड्यूल किशोरों को व्यावहारिक पहलुओं में दक्ष करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि वे भावनात्मक संकट के लक्षणों की पहचान कर, सहानुभूतिपूर्ण समर्थन देते हुए अपने साथियों को आवश्यक सहायता से जोड़ सकें।
किशोर कई प्रकार के दबावों का कर रहे सामना
स्वास्थ्य राज्य मंत्री एन.शिवाजी पटेल ने कहा कि आज के किशोर कई प्रकार के दबावों का सामना कर रहे हैं-चाहे वह शिक्षा, परिवार या सामाजिक वातावरण हो। हमें ऐसे तंत्र बनाने होंगे जो उन्हें बोलने, सुने जाने और समर्थन प्राप्त करने का अवसर दें। उनके मानसिक स्वास्थ्य में निवेश करना सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और हमारे साझा भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता है।
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यह भी पढ़ें-सीएम डॉ. यादव बोले-अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति में पुख्ता सूचना-तंत्र की व्यवस्था हो सुनिश्चित
मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर
मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश डॉ. सलोनी सिडाना ने किशोर मानसिक स्वास्थ्य की व्यापकता में प्रदेश के प्रयासों की प्रतिबध्दता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित भारत शासन की प्रतिनिधि डॉ. जोया अली रिज़वी उप आयुक्त (किशोर स्वास्थ्य) ने इस मॉड्यूल को भारत की एकीकृत और युवा-उत्तरदायी मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ते कदम का हिस्सा बताया। डॉ. प्रतिमा मूर्ति, निदेशक, NIMHANS बैंग्लोर ने रोजमर्रा के परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर दिया। यूनिसेफ इंडिया के स्वास्थ्य प्रमुख डॉ. विवेक सिंह ने भारत में हाल के वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना करते हुए एकीकृत मानसिक स्वास्थ्य ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की बात की और इस बदलाव में सरकार को व्यापक, युवा-नेतृत्व वाले दृष्टिकोणों के माध्यम से सहयोग देने के लिए यूनिसेफ की प्रतिबद्धता जाहिर की।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में फिर शुरू हुआ बारिश का दौर, 10 जिलों में गिरा पानी, अगले दो दिन तेज बारिश का अलर्ट
किशोरों को मिलनी चाहिए शुरुआती मदद
सत्रों के दौरान यह ज़ोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां, जैसे कि चिंता, आत्म-संकोच, डिजिटल लत, मानसिक अवसाद और आत्म-हानि, से जूझ रहे किशोरों को शुरुआती मदद मिलनी चाहिए और इनके इर्द-गिर्द बने सामाजिक कलंक को दूर करना होगा। चर्चा में यह भी उभरा कि सामाजिक सोच, पारिवारिक अपेक्षाएं, शैक्षणिक दबाव और रिश्तों में तनाव जैसे कारक किशोरों पर गहरा असर डालते हैं। देशभर से आए युवा प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस बात को रेखांकित किया कि युवाओं के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण सबसे ज़रूरी है।
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पीयर-सपोर्ट मॉड्यूल का विस्तार
दरअसल यह मॉड्यूल पहले से चल रहे राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के अंतर्गत मौजूद पीयर-सपोर्ट मॉड्यूल का विस्तार है। यह पूरक मॉड्यूल किशोरों को व्यावहारिक पहलुओं में दक्ष करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, ताकि वे भावनात्मक संकट के लक्षणों की पहचान कर, सहानुभूतिपूर्ण समर्थन देते हुए अपने साथियों को आवश्यक सहायता से जोड़ सकें।
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किशोर कई प्रकार के दबावों का कर रहे सामना
स्वास्थ्य राज्य मंत्री एन.शिवाजी पटेल ने कहा कि आज के किशोर कई प्रकार के दबावों का सामना कर रहे हैं-चाहे वह शिक्षा, परिवार या सामाजिक वातावरण हो। हमें ऐसे तंत्र बनाने होंगे जो उन्हें बोलने, सुने जाने और समर्थन प्राप्त करने का अवसर दें। उनके मानसिक स्वास्थ्य में निवेश करना सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और हमारे साझा भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता है।
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मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर
मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश डॉ. सलोनी सिडाना ने किशोर मानसिक स्वास्थ्य की व्यापकता में प्रदेश के प्रयासों की प्रतिबध्दता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित भारत शासन की प्रतिनिधि डॉ. जोया अली रिज़वी उप आयुक्त (किशोर स्वास्थ्य) ने इस मॉड्यूल को भारत की एकीकृत और युवा-उत्तरदायी मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ते कदम का हिस्सा बताया। डॉ. प्रतिमा मूर्ति, निदेशक, NIMHANS बैंग्लोर ने रोजमर्रा के परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर दिया। यूनिसेफ इंडिया के स्वास्थ्य प्रमुख डॉ. विवेक सिंह ने भारत में हाल के वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना करते हुए एकीकृत मानसिक स्वास्थ्य ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की बात की और इस बदलाव में सरकार को व्यापक, युवा-नेतृत्व वाले दृष्टिकोणों के माध्यम से सहयोग देने के लिए यूनिसेफ की प्रतिबद्धता जाहिर की।
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किशोरों को मिलनी चाहिए शुरुआती मदद
सत्रों के दौरान यह ज़ोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां, जैसे कि चिंता, आत्म-संकोच, डिजिटल लत, मानसिक अवसाद और आत्म-हानि, से जूझ रहे किशोरों को शुरुआती मदद मिलनी चाहिए और इनके इर्द-गिर्द बने सामाजिक कलंक को दूर करना होगा। चर्चा में यह भी उभरा कि सामाजिक सोच, पारिवारिक अपेक्षाएं, शैक्षणिक दबाव और रिश्तों में तनाव जैसे कारक किशोरों पर गहरा असर डालते हैं। देशभर से आए युवा प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस बात को रेखांकित किया कि युवाओं के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण सबसे ज़रूरी है।
