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Iztima: बड़ी मजलिस से जाएगी बात तो असर करेगी, महासभा की मांग इज्तिमा में हो महंगी शादियों पर बात, जानें मामला
Fri, 15 Nov 2024 05:07 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 15 Nov 2024 05:07 PM IST
सार
मुस्लिम महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुनव्वर अली खान ने इज्तिमा प्रबंधन को दिए प्रस्ताव में 5 बिंदुओं पर ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि इस बड़े मजमे में अगर यह व्यवस्थाएं शामिल की जाएं तो सामाजिक बुराइयां दूर किए जाने में बड़ा सहयोग मिल सकता है।
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भोपाल इज्तिमा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आलमी तबलीगी इज्तिमा का आगाज इस माह की 29 तारीख को होने वाला है। देश दुनिया के लाखों लोगों की मौजूदगी से सजने वाले इस आयोजन में अगर सामाजिक बुराइयां दूर करने पर भी बात की जाए तो इसका बड़ा असर हो सकता है। मुस्लिम महासभा ने इस उम्मीद के साथ इज्तिमा प्रबंधन को एक प्रस्ताव दिया है। इसमें काजी ए शहर की एक खास तकरीर रखने की मंशा जताई है।
मुस्लिम महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुनव्वर अली खान ने इज्तिमा प्रबंधन को दिए प्रस्ताव में 5 बिंदुओं पर ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि इस बड़े मजमे में अगर यह व्यवस्थाएं शामिल की जाएं तो सामाजिक बुराइयां दूर किए जाने में बड़ा सहयोग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में महंगी शादियां और दहेज के पीछे लाखों गरीब घर की लड़कियां शादी के इंतज़ार में बैठी हैं। दहेज की बढ़ती बुराई और शादियों में नई-नई रस्मों की वजह से बेटियों को लोग बोझ समझने लगे हैं। बेटी होते ही मां बाप उसके दहेज और शादी के लिए पैसे जोड़ने लगते हैं जो कि एक बड़ी बीमारी के तौर पर समाज में फैलता जा रहा है।
मुस्लिम महासभा ने कहा कि भोपाल शहर क़ाज़ी इन बिदात और रस्मों रिवाज के खिलाफ काफी सालों से मेहनत कर रहे हैं। इसका नतीजा देखने को मिल रहा है। ऐसे में क़ाज़ी सैय्यद मुश्ताक़ अली नदवी का इज्तेमा मे बयान कराया जाना चाहिए। इससे क़ाज़ी साहब के इज्तेमा में बयान से न केवल हमारे मुल्क में बल्कि पूरी दुनिया में लोग दहेज के खिलाफ फिक्रमन्द होंगे और नबी की सुन्नत पर अमल करेंगे।
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प्रस्ताव यह भी दिए
मुस्लिम महासभा ने इज्तिमा प्रबंधन को दिए प्रस्ताव में कहा है कि इज्तिमा मे जितने भी निकाह कराए जाते हैं, उनसे ये एहद लिया जाए कि लड़की के घर वालों को गवाह बनाकर के बिना दहेज और बारात के खाने के दुल्हन को घर से सादगी से ही नबी के तरीक़े पर विदा कराएंगे। साथ ही अपना वलीमा अपनी हैसियत से करेंगे फिज़ूल खर्ची से परहेज़ करेंगे तो ही ऐसे लोगों के निकाह इज्तिमा में कराए जाएं। मुस्लिम महासभा ने कहा इज्तिमा के आखिरी दिन दुआ का वक़्त पहले से तय करके अवाम तक पहुंचा दिया जाए। ताकि लोग इस बड़े आयोजन में शामिल हो सकें।
फजिर, मगरिब, ईशा की नमाज़ों मे नमाज़ के दौरान माइक खोले जाने की मांग भी की गई है। महासभा ने कहा कि साल के 365 दिन पूरी दुनिया में जिसमें हरम शरीफ भी शामिल है जहां नमाज़ों में क़ुरान की तिलावत माइक पर अदा की जाती है। इज्तिमागाह में किरात की आवाज़ नहीं आने से पांचों नमाज़ें सिर्रि मालूम होती हैं जो की शरीयत के ऐतेबार से भी गलत है। जिससे लाखों मुख्तदियौं की इमाम के साथ आमीन कहने की फजीलत से भी मेहरुम हो जाते हैं।
मुस्लिम महासभा ने कहा कि स्टेज के पास भोपाल संभाग की जमातों की जगह दीगर सूबों से आई हुई जमातों को ठहराया जाए। अभी की व्यवस्था में स्टेज के पास भोपाल संभाग की जमातें रुकी होती हैं। 74 सालों से भोपाल इज्तिमा की मेज़बानी करता आ रहा है। लिहाज़ा जो जमातें दीगर सूबों से आई हुई हों, उनको स्टेज के पास ठहराया जाए और आसपास भोपाल संभाग के लोगों को ठहराया जाए, जिससे उन लोगों का इकराम भी होगा और अकाबिरिंन को क़रीब से मुतावज्जे होकर सुनने मौका मिलेगा।
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मुस्लिम महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुनव्वर अली खान ने इज्तिमा प्रबंधन को दिए प्रस्ताव में 5 बिंदुओं पर ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि इस बड़े मजमे में अगर यह व्यवस्थाएं शामिल की जाएं तो सामाजिक बुराइयां दूर किए जाने में बड़ा सहयोग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में महंगी शादियां और दहेज के पीछे लाखों गरीब घर की लड़कियां शादी के इंतज़ार में बैठी हैं। दहेज की बढ़ती बुराई और शादियों में नई-नई रस्मों की वजह से बेटियों को लोग बोझ समझने लगे हैं। बेटी होते ही मां बाप उसके दहेज और शादी के लिए पैसे जोड़ने लगते हैं जो कि एक बड़ी बीमारी के तौर पर समाज में फैलता जा रहा है।
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मुस्लिम महासभा ने कहा कि भोपाल शहर क़ाज़ी इन बिदात और रस्मों रिवाज के खिलाफ काफी सालों से मेहनत कर रहे हैं। इसका नतीजा देखने को मिल रहा है। ऐसे में क़ाज़ी सैय्यद मुश्ताक़ अली नदवी का इज्तेमा मे बयान कराया जाना चाहिए। इससे क़ाज़ी साहब के इज्तेमा में बयान से न केवल हमारे मुल्क में बल्कि पूरी दुनिया में लोग दहेज के खिलाफ फिक्रमन्द होंगे और नबी की सुन्नत पर अमल करेंगे।
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प्रस्ताव यह भी दिए
मुस्लिम महासभा ने इज्तिमा प्रबंधन को दिए प्रस्ताव में कहा है कि इज्तिमा मे जितने भी निकाह कराए जाते हैं, उनसे ये एहद लिया जाए कि लड़की के घर वालों को गवाह बनाकर के बिना दहेज और बारात के खाने के दुल्हन को घर से सादगी से ही नबी के तरीक़े पर विदा कराएंगे। साथ ही अपना वलीमा अपनी हैसियत से करेंगे फिज़ूल खर्ची से परहेज़ करेंगे तो ही ऐसे लोगों के निकाह इज्तिमा में कराए जाएं। मुस्लिम महासभा ने कहा इज्तिमा के आखिरी दिन दुआ का वक़्त पहले से तय करके अवाम तक पहुंचा दिया जाए। ताकि लोग इस बड़े आयोजन में शामिल हो सकें।
फजिर, मगरिब, ईशा की नमाज़ों मे नमाज़ के दौरान माइक खोले जाने की मांग भी की गई है। महासभा ने कहा कि साल के 365 दिन पूरी दुनिया में जिसमें हरम शरीफ भी शामिल है जहां नमाज़ों में क़ुरान की तिलावत माइक पर अदा की जाती है। इज्तिमागाह में किरात की आवाज़ नहीं आने से पांचों नमाज़ें सिर्रि मालूम होती हैं जो की शरीयत के ऐतेबार से भी गलत है। जिससे लाखों मुख्तदियौं की इमाम के साथ आमीन कहने की फजीलत से भी मेहरुम हो जाते हैं।
मुस्लिम महासभा ने कहा कि स्टेज के पास भोपाल संभाग की जमातों की जगह दीगर सूबों से आई हुई जमातों को ठहराया जाए। अभी की व्यवस्था में स्टेज के पास भोपाल संभाग की जमातें रुकी होती हैं। 74 सालों से भोपाल इज्तिमा की मेज़बानी करता आ रहा है। लिहाज़ा जो जमातें दीगर सूबों से आई हुई हों, उनको स्टेज के पास ठहराया जाए और आसपास भोपाल संभाग के लोगों को ठहराया जाए, जिससे उन लोगों का इकराम भी होगा और अकाबिरिंन को क़रीब से मुतावज्जे होकर सुनने मौका मिलेगा।
