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Mp: दूसरी पार्टियों से कांग्रेस में आए नेता नहीं बनेंगे जिला अध्यक्ष, पटवारी बोले-उम्र की कोई क्राइटेरिया नहीं
Wed, 11 Jun 2025 04:19 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 11 Jun 2025 04:19 PM IST
सार
पीसीसी चीफ ने कहा है कि जिला अध्यक्षों के पद के लिए उम्र की कोई क्राइटेरिया नहीं है। केवल योग्यता ही पैमाना है। योग्य व्यक्तियों को जिला अध्यक्ष बनाया जाएगा। दूसरे पार्टियों से आने वाले नेताओं को जिला अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए संगठन को नए तरीके से तैयार किया जा रहा है। पार्टी में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका दिया जा रहा है। प्रदेश में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है। जिसका शुभारंभ भोपाल में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 3 जून को किया था। उसके बाद हुई बैठक के बाद खबर आई थी कि जिला अध्यक्षों के लिए 35 से 45 साल तक की उम्र रखी गई है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे खारिज कर दिया है। उन्होंने बुधवार को पीसीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिला अध्यक्ष के लिए 45 साल अधिकता उम्र की बात कही जा रही है। लेकिन यह निराधार है जिला अध्यक्षों के लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं है केवल योग्यता ही पैमाना है। योग्य व्यक्तियों को जिला अध्यक्ष बनाया जाएगा। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि दूसरे पार्टियों से आने वाले नेताओं को जिला अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। कम से कम पार्टी में 5 साल का काम करने का अनुभव होना जरूरी है।
विधानसभा चुनाव से पहले तैयारी
जानकारी के लिए बता दें कि बीते करीब 20 सालों से सत्ता से बाहर कांग्रेस अब बदलाव के रास्ते आगे बढ़कर वापसी करना चाह रही है। पार्टी ने अभी से 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन मजबूत करने की रणनीति बनानी शुरू कर दिया है। प्रदेश के सभी जिलों में बनाए जाने वाले जिला अध्यक्ष को लेकर अब मंथन चल रहा है।
यह भी पढ़ें-दिग्विजय के भाई और पूर्व MLA लक्ष्मण सिंह कांग्रेस से निष्कासित, राहुल पर दिया बयान पड़ा भारी
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5 साल पार्टी में कार्यकर्ता के तौर पर गुजारना होगा
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने साफतौर पर कह दिया है कि BJP से आये हुए नेताओं को कम से कम 5 साल पार्टी में कार्यकर्ता के तौर पर गुजारना होगा। जिसके बाद संगठन आगे इस पर फैसला लेगा। यह निर्णय कांग्रेस के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को देखकर लिया गया है, जो पिछले कई सालों से कांग्रेस में सक्रिय रहकर पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 165 ऑब्जर्वर्स को नियुक्ति की है।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, पदोन्नति में आरक्षण नीति जल्द होगी लागू
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं योजनाएं
जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं, जो गरीबों, किसानों और ग्रामीण जनता के उत्थान के लिए शुरू की गई थीं, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। जल जीवन मिशन से लेकर स्वच्छ भारत मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में अरबों रुपये का गबन, फर्जी बिलिंग, और कागजी प्रगति का घिनौना खेल सामने आया है। उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र की हर योजना भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी है। यह भ्रष्टाचार न केवल जनता के विश्वास को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि गरीबों, किसानों और ग्रामीणों के हक को छीन रहा है।
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विधानसभा चुनाव से पहले तैयारी
जानकारी के लिए बता दें कि बीते करीब 20 सालों से सत्ता से बाहर कांग्रेस अब बदलाव के रास्ते आगे बढ़कर वापसी करना चाह रही है। पार्टी ने अभी से 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन मजबूत करने की रणनीति बनानी शुरू कर दिया है। प्रदेश के सभी जिलों में बनाए जाने वाले जिला अध्यक्ष को लेकर अब मंथन चल रहा है।
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5 साल पार्टी में कार्यकर्ता के तौर पर गुजारना होगा
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने साफतौर पर कह दिया है कि BJP से आये हुए नेताओं को कम से कम 5 साल पार्टी में कार्यकर्ता के तौर पर गुजारना होगा। जिसके बाद संगठन आगे इस पर फैसला लेगा। यह निर्णय कांग्रेस के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को देखकर लिया गया है, जो पिछले कई सालों से कांग्रेस में सक्रिय रहकर पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 165 ऑब्जर्वर्स को नियुक्ति की है।
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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं योजनाएं
जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं, जो गरीबों, किसानों और ग्रामीण जनता के उत्थान के लिए शुरू की गई थीं, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। जल जीवन मिशन से लेकर स्वच्छ भारत मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में अरबों रुपये का गबन, फर्जी बिलिंग, और कागजी प्रगति का घिनौना खेल सामने आया है। उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र की हर योजना भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी है। यह भ्रष्टाचार न केवल जनता के विश्वास को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि गरीबों, किसानों और ग्रामीणों के हक को छीन रहा है।
