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Bhopal:सायबर हेल्प डेस्क होंगी मजबूत, प्रशिक्षित पुलिसकर्मी करेंगे विवेचकों की मदद, पुलिस को दे रहे प्रशिक्षण
Tue, 10 Dec 2024 05:55 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 10 Dec 2024 05:55 PM IST
सार
सायबर हेल्प डेस्क को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। प्रशिक्षित पुलिसकर्मी विवेचकों की मदद करेंगे। इसके लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
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साइबर प्रशिक्षण कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साइबर अपराधों की घटनाओं पर अंकुश लगाने और आगामी समय में आने वाली साइबर चुनौतियों से निपटने के लिए भोपाल शहर के सभी 37 थानों में 1 दिसंबर से साइबर हेल्प डेस्क शुरू किया गया है। जहां 5 लाख रुपये तक के मामलों की शिकायत की जा सकती है। सायबर हेल्प डेस्क को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। प्रशिक्षित पुलिसकर्मी विवेचकों की मदद करेंगे। इसके लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
सायबर क्राइम बनेगी बड़ी चुनौती
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसीपी क्राइम ब्रांच अखिल पटेल ने बताया कि सायबर क्राइम आने वाले समय में पुलिस और आमजनों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनेगी। सायबर ठग दिनों-दिन विभिन्न तरीकों से आमजनों को ठग रहे हैं। थानों में प्राप्त शिकायत पर तत्काल वैधानिक कार्यवाही कर पीडि़त की मदद करें तथा कार्यकुशलता का उपयोग करते हुए तकनीकी नॉलेज के आधार पर इनवेस्टिगेशन करें। जरूरत पडऩे पर सायबर तकनीकी टीम या सायबर फोरेंसिक लैब की मदद लें। प्रशिक्षण में एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सायबर क्राइम अनुसंधान में आने वाली तकनीकी दिक्कतें, दीगर प्रदेशों से समन्वय तथा अनुसंधान के दौरान एकत्रित किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज इत्यादि के सम्बंध में सारगर्भित मार्गदर्शन दिया।
प्रशिक्षित पुलिसकर्मी करेंगे मदद
पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता, तकनीकी नॉलेज बढ़ाने एवं उत्कृष्ट अनुसंधान हेतु नगरीय पुलिस भोपाल के 37 थानों के निरीक्षक से आरक्षक स्तर के लगभग 400 अधिकारियों और कर्मचारियों को पूर्व में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में एनसीसीआरपी, जेएमआईएस एवं सीईआईआर पोर्टल तथा सायबर क्राइम की रोकथाम, टेक्निकल एनॉलिसिस, पब्लिक अवेयरनेस, इन्वेस्टिगेशन इत्यादि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शहर के सभी 37 थानों में एक दिसंबर से सायबर हेल्ड डेस्क शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए बाकी पुलिस कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि सायबर हेल्प डेस्क को पूरी तरह से मजबूत बनाया जा सके।
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इस प्रकार रोंके सायबर क्राइम
1- अपने ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए मजबूत और अद्वितीय पासवर्ड का उपयोग करें. दो-कारक प्रमाणीकरण का उपयोग करें, जो आपके अकाउंट्स की सुरक्षा को बढ़ाता है।
2- अपने कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस पर वायरस स्कैनर सॉफ्टवेयर का उपयोग करें. केवल सुरक्षित वेबसाइट्स पर ही जाएं।
3- सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और अज्ञात लोगों से दोस्ती न करें. अपने बैंक अकाउंट्स, क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स और अन्य ऑनलाइन अकाउंट्स की नियमित रूप से जांच करें। यदि आपको लगता है कि आपके साथ सायबर अपराध हुआ है, तो तुरंत पुलिस या सायबर सेल को रिपोर्ट करें।
इस प्रकार की गलती नहीं करें
अज्ञात लिंक्स पर क्लिक न करें, क्योंकि वे मैलवेयर या फिशिंग हमलों का कारण बन सकते हैं। ऑनलाइन अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, जैसे कि आपका पता, फोन नंबर या बैंक खाते का विवरण। अज्ञात ईमेल्स का जवाब नहीं दें। अज्ञात सॉफ्टवेयर डाउनलोड नहीं करें। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवक्र्स का उपयोग न करें, क्योंकि वे असुरक्षित हो सकते हैं।
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सायबर क्राइम बनेगी बड़ी चुनौती
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसीपी क्राइम ब्रांच अखिल पटेल ने बताया कि सायबर क्राइम आने वाले समय में पुलिस और आमजनों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनेगी। सायबर ठग दिनों-दिन विभिन्न तरीकों से आमजनों को ठग रहे हैं। थानों में प्राप्त शिकायत पर तत्काल वैधानिक कार्यवाही कर पीडि़त की मदद करें तथा कार्यकुशलता का उपयोग करते हुए तकनीकी नॉलेज के आधार पर इनवेस्टिगेशन करें। जरूरत पडऩे पर सायबर तकनीकी टीम या सायबर फोरेंसिक लैब की मदद लें। प्रशिक्षण में एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सायबर क्राइम अनुसंधान में आने वाली तकनीकी दिक्कतें, दीगर प्रदेशों से समन्वय तथा अनुसंधान के दौरान एकत्रित किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज इत्यादि के सम्बंध में सारगर्भित मार्गदर्शन दिया।
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प्रशिक्षित पुलिसकर्मी करेंगे मदद
पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता, तकनीकी नॉलेज बढ़ाने एवं उत्कृष्ट अनुसंधान हेतु नगरीय पुलिस भोपाल के 37 थानों के निरीक्षक से आरक्षक स्तर के लगभग 400 अधिकारियों और कर्मचारियों को पूर्व में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में एनसीसीआरपी, जेएमआईएस एवं सीईआईआर पोर्टल तथा सायबर क्राइम की रोकथाम, टेक्निकल एनॉलिसिस, पब्लिक अवेयरनेस, इन्वेस्टिगेशन इत्यादि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शहर के सभी 37 थानों में एक दिसंबर से सायबर हेल्ड डेस्क शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए बाकी पुलिस कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि सायबर हेल्प डेस्क को पूरी तरह से मजबूत बनाया जा सके।
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इस प्रकार रोंके सायबर क्राइम
1- अपने ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए मजबूत और अद्वितीय पासवर्ड का उपयोग करें. दो-कारक प्रमाणीकरण का उपयोग करें, जो आपके अकाउंट्स की सुरक्षा को बढ़ाता है।
2- अपने कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस पर वायरस स्कैनर सॉफ्टवेयर का उपयोग करें. केवल सुरक्षित वेबसाइट्स पर ही जाएं।
3- सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और अज्ञात लोगों से दोस्ती न करें. अपने बैंक अकाउंट्स, क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स और अन्य ऑनलाइन अकाउंट्स की नियमित रूप से जांच करें। यदि आपको लगता है कि आपके साथ सायबर अपराध हुआ है, तो तुरंत पुलिस या सायबर सेल को रिपोर्ट करें।
इस प्रकार की गलती नहीं करें
अज्ञात लिंक्स पर क्लिक न करें, क्योंकि वे मैलवेयर या फिशिंग हमलों का कारण बन सकते हैं। ऑनलाइन अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, जैसे कि आपका पता, फोन नंबर या बैंक खाते का विवरण। अज्ञात ईमेल्स का जवाब नहीं दें। अज्ञात सॉफ्टवेयर डाउनलोड नहीं करें। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवक्र्स का उपयोग न करें, क्योंकि वे असुरक्षित हो सकते हैं।
