{"_id":"681dffcbe7811b6a0e00a9d5","slug":"bhopal-bhopal-municipal-corporation-is-preparing-fuel-management-system-new-software-will-come-soon-diesel-2025-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal: भोपाल नगर निगम तैयार कर रहा फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम, जल्द आएगा नया सॉफ्टवेयर, डीजल चोरी पर लगेगा अंकुश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal: भोपाल नगर निगम तैयार कर रहा फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम, जल्द आएगा नया सॉफ्टवेयर, डीजल चोरी पर लगेगा अंकुश
Fri, 09 May 2025 06:45 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 09 May 2025 06:45 PM IST
सार
भोपाल नगर निगम में फ्यूल लेनदेन का काम कागजों पर चलता है। अब इसे पूरी तरह से डिजिटल करने की तैयारी शुरू की गई है। निगम प्रशासन फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की तैयारियों में जुट गया है।
विज्ञापन
भोपाल नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी भोपाल नगर निगम में डीजल चोरी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। इसे लेकर कई बार कार्रवाई भी हुई लेकिन निगम इस पर अभी तक पूरी तरह रोक नहीं लग पाया है। दरअसल अभी तक फ्यूल लेनदेन का काम कागजों पर चलता है। अब इसे पूरी तरह से डिजिटल करने की तैयारी शुरू की गई है। निगम प्रशासन फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की तैयारियों में जुट गया है। निगम से मिली जानकारी के मुताबिक अगले चार महीने में नया सॉफ्टवेयर काम करना शुरू कर देगा। सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद नगर निगम के वाहनों को ऑनलाइन मांगपत्र जारी होगा। संबंधित विभाग के अधिकारी एप पर जाकर परमिशन देंगे कि किस वाहन में कितना ईंधन देना है।
फ्यूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर यह होगा फायदा
जानकारी के लिए बतांदे कि नगर निगम के किसी वाहन को ईंधन चाहिए रहता है तो उसका ड्राइवर संबंधित विभाग के अधिकारी से कागज पर मागत्र साइन करवाते हैं। फिर निगम के पंप जाकर ईंधन लेते हैं। कई बार अधिकारी सीट पर नहीं होते तो वाहन चालकों को इंडेन लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। वहीं ऐसे भी मामले सामने आते हैं, जिसमें मांगपत्र पर तो 30 लीटर लिखा होता है, लेकिन ड्राइवर इसे मिटाकर 40 तो कभी 50 लीटर कर लेते हैं, लेकिन इसका खुलासा मांगपत्र की पूरी बुक खत्म होने के बाद मिलान के समय होता है। इन समस्याओं को खत्म करने के लिए निगम फ्यूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर ला रहा है।
यह भी पढ़ें-सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक, सीएम बोले राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहे
विज्ञापन
अगले महीने से शुरू होगा ट्रायल
नगर निगम मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के सहयोग से यह फ्यूल मैनजमेंट ला रहा है। निगम अधिकारियों के मुताबिक जो कंपनी इस सॉफ्टवेयर को तैयार कर रही है, उसे निगम की ओर से डाटा उपलब्ध करवा दिया गया है। अगले महीने से इस पर ट्रायल शुरू हो जाएगा जबकि चार महीने में इस सॉफ्टवेयर से सभी अधिकारियों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए उन्हें बकायदा ट्रैनिंग दी जाएगी।
यह भी पढ़ें-भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भोपाल में अलर्ट, चौराहों पर पुलिस तैनात, लोगों ने टैंक पर लहराया तिरंगा
निगम के पास हैं 1679 वाहन
निगम अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में निगम के पास 1679 वाहन है। इनमें बेक हुक लोडर (जेबीसी) मशीन, रोड स्वीपर मशीन, पोकलेन, बुल्डोजर, रोबोट (स्कीड स्टीयर), क्रेन, रोड रोलर, डम्पर, रिफ्यूज काम्पेक्टर, डम्पर प्लेसर, ट्रक, टिपर, मिनी गारबेज, सीएनजी मिनी गारबेज टिपर, टाटा-407, वॉटर टैंकर, ट्रैक्टर-ट्राली, सवारी वाहन एम्बेसेडर कार, जी, इंडिगो, इनोवा, सफारी, नैनो कार, झीलों की सफाई के लिए वॉटर हारवेस्टिंग मशीन, फॉगंग मशीन, हेड ऑपरेटिंव फॉगिंग मशीन, शांति वाहन, सीवेज क्लीनिंग मशीन, हाईड्रोलिक प्लेटफार्म, डॉग स्क्वॉड वाहन, पशु वाहन, मोबाईल टॉयलेट। वहीं 312 मशीनरी, जिसमें वॉटर एक्सेवेटर, ट्राली, फॉग मशीनें, जनरेटर सेट, क्रिलास्कर पम्प, मरच्यूरी बॉक्स, वुड चीप शेडर, चेन शॉ और ग्रास कटर शामिल है। इन सभी वाहनों को ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
फ्यूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर यह होगा फायदा
जानकारी के लिए बतांदे कि नगर निगम के किसी वाहन को ईंधन चाहिए रहता है तो उसका ड्राइवर संबंधित विभाग के अधिकारी से कागज पर मागत्र साइन करवाते हैं। फिर निगम के पंप जाकर ईंधन लेते हैं। कई बार अधिकारी सीट पर नहीं होते तो वाहन चालकों को इंडेन लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। वहीं ऐसे भी मामले सामने आते हैं, जिसमें मांगपत्र पर तो 30 लीटर लिखा होता है, लेकिन ड्राइवर इसे मिटाकर 40 तो कभी 50 लीटर कर लेते हैं, लेकिन इसका खुलासा मांगपत्र की पूरी बुक खत्म होने के बाद मिलान के समय होता है। इन समस्याओं को खत्म करने के लिए निगम फ्यूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर ला रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी पर रोक, सीएम बोले राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहे
विज्ञापन
अगले महीने से शुरू होगा ट्रायल
नगर निगम मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के सहयोग से यह फ्यूल मैनजमेंट ला रहा है। निगम अधिकारियों के मुताबिक जो कंपनी इस सॉफ्टवेयर को तैयार कर रही है, उसे निगम की ओर से डाटा उपलब्ध करवा दिया गया है। अगले महीने से इस पर ट्रायल शुरू हो जाएगा जबकि चार महीने में इस सॉफ्टवेयर से सभी अधिकारियों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए उन्हें बकायदा ट्रैनिंग दी जाएगी।
यह भी पढ़ें-भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भोपाल में अलर्ट, चौराहों पर पुलिस तैनात, लोगों ने टैंक पर लहराया तिरंगा
निगम के पास हैं 1679 वाहन
निगम अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में निगम के पास 1679 वाहन है। इनमें बेक हुक लोडर (जेबीसी) मशीन, रोड स्वीपर मशीन, पोकलेन, बुल्डोजर, रोबोट (स्कीड स्टीयर), क्रेन, रोड रोलर, डम्पर, रिफ्यूज काम्पेक्टर, डम्पर प्लेसर, ट्रक, टिपर, मिनी गारबेज, सीएनजी मिनी गारबेज टिपर, टाटा-407, वॉटर टैंकर, ट्रैक्टर-ट्राली, सवारी वाहन एम्बेसेडर कार, जी, इंडिगो, इनोवा, सफारी, नैनो कार, झीलों की सफाई के लिए वॉटर हारवेस्टिंग मशीन, फॉगंग मशीन, हेड ऑपरेटिंव फॉगिंग मशीन, शांति वाहन, सीवेज क्लीनिंग मशीन, हाईड्रोलिक प्लेटफार्म, डॉग स्क्वॉड वाहन, पशु वाहन, मोबाईल टॉयलेट। वहीं 312 मशीनरी, जिसमें वॉटर एक्सेवेटर, ट्राली, फॉग मशीनें, जनरेटर सेट, क्रिलास्कर पम्प, मरच्यूरी बॉक्स, वुड चीप शेडर, चेन शॉ और ग्रास कटर शामिल है। इन सभी वाहनों को ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
