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Bhopal: MP के 6 बड़े शहरों में भोपाल में सबसे कम डॉग बाइट्स के मामले, नेशनल हेल्थ मिशन के सर्वे में हुआ खुलासा
Sat, 09 Aug 2025 05:41 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 09 Aug 2025 05:41 PM IST
सार
भोपाल में कुत्ते के काटने के मामले में काफी गिरावट आई है। प्रदेश के 6 शहरों में भोपाल में डॉग बाइट्स के सबसे कम मामले दर्ज हुए, जबकि रतलाम इस मामले में पहले स्थान पर रहा । यह खुलासा नेशनल हेल्थ मिशन के सर्वे में हुआ है।
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आवारा कुत्ते
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल में कुत्ते के काटने के मामले में काफी गिरावट आई है। दरअसल नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) द्वारा राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश के छह बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम में डॉग बाइट्स के मामलों का सर्वे किया गया। यह सर्वे वर्ष 2024 और जनवरी से जून 2025 की अवधि को लेकर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, छह शहरों में भोपाल में डॉग बाइट्स के सबसे कम मामले दर्ज हुए, जबकि रतलाम इस मामले में पहले स्थान पर रहा।
डॉग बाइट्स के मामलों में उल्लेखनीय कमी
उज्जैन दूसरे, इंदौर तीसरे, जबलपुर चौथे और ग्वालियर पांचवें स्थान पर रहा। वर्ष 2024 में भोपाल में कुल 19 हजार 285 डॉग बाइट्स के मामले सामने आए, जो औसत 0.8 प्रतिशत रहा। वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में यह औसत घटकर मात्र 0.07 प्रतिशत रह गया। यह आंकड़ा बताता है कि शहर में डाग बाइट्स के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
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हर साल 22 हजार आवारा श्वानों की कर रहे नसबंदी
रैबीज मुक्त शहर-2030 कार्यक्रम के तहत भोपाल नगर निगम ने विस्तृत कार्य योजना तैयार कर भारत सरकार को भेजी है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में यह योजना भेजने वाला भोपाल ही एकमात्र शहर है। योजना के क्रियान्वयन के तहत नगर निगम शहर में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर संचालित कर रहा है, जहां हर साल लगभग 22 हजार आवारा श्वानों की नसबंदी की जा रही है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में आज सिटी बसों में बहनों के लिए फ्री सफर, रक्षाबंधन पर बीएमसी का गिफ्ट,रात 9 बजे तक मिलेगा लाभ
प्रत्येक 10 वार्ड पर होना चाहिए एक नसबंदी केंद्र
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक 10 वार्ड पर एक नसबंदी केंद्र होना चाहिए, लेकिन भोपाल में मानक से कम केंद्रों के बावजूद अधिक से अधिक आवारा श्वानों की नसबंदी की जा रही है । उपलब्ध संसाधनों की तुलना में नसबंदी आपरेशन की संख्या काफी अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप डाग बाइट्स के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
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डॉग बाइट्स के मामलों में उल्लेखनीय कमी
उज्जैन दूसरे, इंदौर तीसरे, जबलपुर चौथे और ग्वालियर पांचवें स्थान पर रहा। वर्ष 2024 में भोपाल में कुल 19 हजार 285 डॉग बाइट्स के मामले सामने आए, जो औसत 0.8 प्रतिशत रहा। वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में यह औसत घटकर मात्र 0.07 प्रतिशत रह गया। यह आंकड़ा बताता है कि शहर में डाग बाइट्स के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
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हर साल 22 हजार आवारा श्वानों की कर रहे नसबंदी
रैबीज मुक्त शहर-2030 कार्यक्रम के तहत भोपाल नगर निगम ने विस्तृत कार्य योजना तैयार कर भारत सरकार को भेजी है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में यह योजना भेजने वाला भोपाल ही एकमात्र शहर है। योजना के क्रियान्वयन के तहत नगर निगम शहर में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर संचालित कर रहा है, जहां हर साल लगभग 22 हजार आवारा श्वानों की नसबंदी की जा रही है।
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प्रत्येक 10 वार्ड पर होना चाहिए एक नसबंदी केंद्र
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक 10 वार्ड पर एक नसबंदी केंद्र होना चाहिए, लेकिन भोपाल में मानक से कम केंद्रों के बावजूद अधिक से अधिक आवारा श्वानों की नसबंदी की जा रही है । उपलब्ध संसाधनों की तुलना में नसबंदी आपरेशन की संख्या काफी अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप डाग बाइट्स के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
