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Bhopal: चिकित्सा उपकरणों के दुष्प्रभावों को रोकने एम्स चला रहा जागरूकता अभियान, ग्रामीण इलाकों में उतरी टीम

Sun, 17 Aug 2025 06:19 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 17 Aug 2025 06:19 PM IST
सार

एम्स इलाज के साथ-साथ अब मेडिकल उपकरणों के दुष्प्रभावों को रोकने जागरूकता अभियान शुरू किया है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि अक्सर मेडिकल डिवाइस से जुड़े लक्षण मरीज और उनके परिजन सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लोगों को सतर्क करने जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।

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Bhopal: AIIMS Bhopal is running an awareness campaign to prevent side effects of medical devices, team reaches
जागरूकता अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल स्थित एम्स इलाज के साथ-साथ अब मेडिकल उपकरणों के दुष्प्रभावों को रोकने जागरूकता अभियान शुरू किया है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि अक्सर मेडिकल डिवाइस से जुड़े लक्षण मरीज और उनके परिजन सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी लापरवाही को रोकने और लोगों को सतर्क करने जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, जिसकी शुरुआत ग्रामीण इलाकों से की जा रही है। इसके लिए संस्थान को मेडिकल डिवाइस एडवर्स इवेंट रिपोर्टिंग मॉनिटरिंग सेंटर (MDMC) और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर (RTC-M) का दर्जा मिला है। एम्स के फार्माकोलॉजी विभाग ने सामुदायिक और परिवार चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर ओबैदुल्लागंज ब्लॉक के नंदोरा और टेकरी गांव में यह कार्यक्रम आयोजित किया। यह पहल मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के तहत की जा रही है।
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स्टेंट, पेसमेकर और इंप्लांट में परेशानी तो डॉक्टर से करें संपर्क
एम्स ने इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई पोस्टर बनाए हैं। इनमें बताया गया कि मेडिकल उपकरणों जैसे स्टेंट, पेसमेकर और इंप्लांट लगाने के बाद अगर कोई असामान्य समस्या या परेशानी होती है, तो तुरंत डॉक्टर को सूचित करना बेहद जरूरी है। मरीज और उनके परिजनों को सरल भाषा में समझाया गया कि समय पर रिपोर्टिंग करने से न सिर्फ उनकी जान बच सकती है बल्कि भविष्य में अन्य मरीजों के इलाज में भी मदद मिलती है।
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हर गांव से हो दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों और रिसर्च एसोसिएट्स ने मेडिकल डिवाइस से जुड़े दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया भी समझाई। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों को जागरूक करना उतना ही जरूरी है, जितना इलाज। यह पहल दिखाती है कि कैसे स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को सीधे गांव-गांव तक पहुंचाना चाहिए। एम्स भोपाल ने नंदोरा और टेकरी गांव (जिला रायसेन) में मेडिकल डिवाइस से जुड़ी दिक्कतों (Adverse Events) पर जागरूकता कार्यक्रम चलाया। यह पहल “मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI)” के तहत हुई, जिसमें लोगों को समझाया गया कि स्टेंट, पेसमेकर, जोड़ों के इंप्लांट, इंसुलिन पंप, ग्लूकोमीटर जैसे उपकरण बेहद उपयोगी हैं, लेकिन इनकी गड़बड़ी की तुरंत पहचान व रिपोर्टिंग जान बचा सकती है।
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यह रखें सावधानी
1- डिवाइस मिलते ही यूजर मैनुअल पढ़ें। इसमें मौजूद चेतावनी संकेत और अलार्म को समझें।
2- पेसमेकर, स्टेंट, इंप्लांट के लिए तय अंतराल पर जांच जरूरी होती है। इन्हें मिस न करें।
3- डिवाइस की साफ-सफाई और देखभाल समय पर करें।
4- कोई असामान्य लक्षण दिखे, इसे नॉर्मल मानकर टालें नहीं।
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