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मध्यप्रदेश: कोरोना मृतकों की भस्म से बनेगा पार्क, जापान की मियावाकी तकनीक का होगा इस्तेमाल

Sun, 04 Jul 2021 10:56 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 04 Jul 2021 10:56 PM IST
सार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भदभदा विश्राम घाट प्रबंधन समिति ने फैसला किया है कि कोरोना वायरस से मरे लोगों की भस्म का खाद के रूप में उपयोग कर उनकी याद में भदभदा विश्राम घाट में ही एक पार्क विकसित किया जाएगा। यह जानकारी समिति के पदाधिकारियों ने रविवार को दी। इस पार्क को बनाने में जापान की मियावाकी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

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Bhadbhada Vishram Ghat to develop a park using ashes of people died of coronavirus
भदभदा विश्राम घाट में जलते शव - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार समिति के सचिव मम्तेश शर्मा ने बताया कि भदभदा विश्राम घाट में 15 मार्च से 15 जून तक 90 दिनों की अवधि के दौरान कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 6000 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। 

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उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश के परिजन कोरोना महामारी के कारण लगी पाबंदियों की वजह से पवित्र नदियों में प्रवाहित करने के लिए अपने परिचितों की थोड़ी-थोड़ी भस्म और हड्डियों के बचे टुकड़े ले गए और अधिकांश लोग भस्म वहीं पर छोड़ गए थे। 
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शर्मा ने आगे बताया कि ऐसी स्थिति में करीब 21 ट्रक भरकर भस्म हमारे विश्राम घाट में जमा हो गई है। उन्होंने कहा कि हमने विचार किया और फैसला किया कि इतनी बड़ी मात्रा में जमा भस्म नर्मदा नदी में प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है।
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उन्होंने बताया, 'इसलिए हमने फैसला किया है कि कोरोना वायरस महामारी से जान गंवाने वाले इन लोगों की याद में उनकी इस भस्म का खाद के रूप में उपयोग कर हम भदभदा विश्राम घाट में ही 12,000 वर्ग फुट की जमीन पर एक पार्क विकसित करेंगे। 

शर्मा ने बताया कि इस पार्क को तैयार करने के लिए हमने इस जमीन की मिट्टी के साथ इस भस्म, गाय के गोबर और लकड़ी के बुरादे को मिलाया है। उन्होंने बताया कि भस्म फॉस्फोरस खाद का बहुत बढ़िया काम करती है और पौधों के लिए अच्छी होती है।

जापान की मियावाकी तकनीक पर विकसित हो रहा पार्क
मम्तेश शर्मा ने बताया कि इस पार्क को जापान की 'मियावाकी तकनीक' के आधार पर पर विकसित किया जा रहा है और इसमें करीब 3500 से 4000 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के तहत इन पौधों को पेड़ बनने में 15 से 18 महीने लगेंगे।

वहीं, समिति के अध्यक्ष अरूण चौधरी ने कहा, हमने कोरोना से मरने वाले लोगों के परिजनों से आग्रह किया है कि वे इस पार्क में पौधरोपण करने के कार्य में सहभागी बनें। जब तक ये पौधे पेड़ नहीं बन जाते, तब तक घाट प्रबंधन समिति इनकी देखभाल करेगी। 


समिति के कोषाध्यक्ष अजय दुबे ने कहा, पौधरोपण का काम 5-7 जुलाई के बीच होगा। लोग इसमें योगदान दे सकते हैं। बता दें कि कोविड से मरे हिंदुओं का भोपाल में दो विश्राम घाटों में अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें भदभदा विश्राम घाट भी शामिल है।

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