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Ashok Singh vs Scindia: क्या सिंधिया के लिए उनके ही गढ़ में चुनौती बन सकेंगे अशोक सिंह? क्या है अदावत की वजह

Thu, 15 Feb 2024 07:44 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 15 Feb 2024 07:44 PM IST
सार

जब से ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में आए हैं, कांग्रेस में ग्वालियर-चंबल इलाके में कोई बड़ा नेता नहीं था। ऐसे में अशोक सिंह को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने इलाके के लिए नया चेहरा पेश किया है। 

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Ashok Singh vs Scindia: Will Ashok Singh be able to become a challenge for Scindia in his own stronghold? What
कांग्रेस राज्यसभा प्रत्याशी अशोक सिंह और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश से कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक सिंह ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उनकी जीत भी सुनिश्चित है क्योंकि मध्य प्रदेश से इस समय पांच सीटें रिक्त हैं और भाजपा ने अपने चार उम्मीदवार ही उतारे हैं। कोई चुनौती न मिलने पर निर्विरोध निर्वाचन तय है। कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक सिंह को चंबल इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने चुनौती की तरह पेश किया जाएगा। 
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अशोक सिंह के नामांकन के अवसर पर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को यूपी और बिहार को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री बनाया है। हमने मध्य प्रदेश के यादवों को प्रतिनिधित्व देने और सिंधिया जी के चंबल में सेंधमारी के लिए अशोक सिंह के तौर पर शेर दिया है। यह चंबल में नई शुरुआत होगी। सिंधिया के किले को ध्वस्त करने में हमारे अशोक सिंह जी बड़ी भूमिका अदा करेंगे। वह हमारे जमीनी कार्यकर्ता हैं। सभी विधायक उनके साथ हैं। 
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अशोक सिंह के दादा ने किया था सिंधिया का विरोध
अशोक सिंह का परिवार स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहा है। उनके दादा कक्का डोंगर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने तत्कालीन सिंधिया शासकों के खिलाफ आंदोलन भी किया था। इसके बाद कथित तौर पर सिंधिया परिवार की प्रताड़ना भी झेली। अशोक सिंह के पिता राजेंद्र सिंह भी मंत्री रहे हैं। हालांकि, 1980 में माधवराव सिंधिया कांग्रेस में आए और तब से उनके पिता को एक तरह से दरकिनार कर दिया गया था। महल की राजनीति उस इलाके में हावी हो गई थी। अशोक सिंह के पिता को उसके बाद कांग्रेस से कोई टिकट नहीं मिला था।   
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चार बार हारे हैं लोकसभा चुनाव
ग्वालियर के कांग्रेस सांसद रामसेवक सिंह बाबूजी ऑपरेशन चक्रव्यूह में फंसे थे तब अशोक सिंह को लोकसभा के उपचुनाव में उतारा गया था। 2007 में यशोधरा राजे सिंधिया ने उन्हें 35 हजार वोट से हराया था। इसके बाद 2009 में भी यशोधरा राजे ने उन्हें 26 हजार वोट से हराया। फिर 2014 में नरेंद्र सिंह तोमर ने 29 हजार वोट से और 2019 में विवेक शेजवलकर से 1.47 लाख वोट से हारे थे। 


नजदीकी है लेकिन आए नहीं 
अशोक सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के करीबी रहे हैं। यानी उन्हें गुटों को साधने में महारत हासिल है। कमलनाथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने तो अशोक सिंह उनके कोर ग्रुप के सदस्य रहे। फिर प्रदेश में उपाध्यक्ष, महामंत्री और वर्तमान में कोषाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे थे।
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