{"_id":"67fd0d72d6ee6b4e11023f31","slug":"aiims-bhopal-junior-doctor-treating-in-the-emergency-department-of-aiims-attacked-the-attacker-was-arrested-2025-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aiims Bhopal: एम्स के इमरजेंसी विभाग में इलाज कर रहे जूनियर डॉक्टर पर हमला, हमलावर को पुलिस ने किया गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aiims Bhopal: एम्स के इमरजेंसी विभाग में इलाज कर रहे जूनियर डॉक्टर पर हमला, हमलावर को पुलिस ने किया गिरफ्तार
Mon, 14 Apr 2025 07:04 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Mon, 14 Apr 2025 07:04 PM IST
सार
एम्स भोपाल के आपातकालीन विभाग में एक डॉक्टर के साथ मरीज के परिजनों ने मारपीट और अभद्रता की। हमलावर को सुरक्षा गार्डों और तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा तुरंत पकड़ लिया गया और उसे बागसेवनिया पुलिस थाने के हवाले कर दिया गया।
विज्ञापन
एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों से मरीज के परिजनों द्वारा मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आती रहती है। अब एम्स में भी जूनियर डॉक्टर पर मरीज के परिजनों ने हमला किया है। दरसअल सोमवार दोपहर एम्स भोपाल के आपातकालीन विभाग में एक डॉक्टर के साथ मरीज के परिजनों ने मारपीट और अभद्रता की। हालाकि सुरक्षा गार्डों और तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा तुरंत पकड़ लिया गया और उसे बागसेवनिया पुलिस थाने के हवाले कर दिया। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि यह घटना स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न करती है।
डॉक्टर के चेहरे पर किया हमला
घटना उस समय हुई जब डॉक्टर इमरजेंसी विभाग के येलो ट्रायेज क्रिटिकल एरिया में ड्यूटी पर तैनात थे। मरीज संतोष कुमार (उम्र 39 वर्ष) के साथ आए परिजनों ने डॉक्टर के साथ शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार किया। परिजनों ने न केवल धमकाया, बल्कि हिंसा भी की-डॉक्टर की शर्ट फाड़ दी, चेहरे पर हमला करने की कोशिश की और उनका गला पकड़ लिया।
यह भी पढ़ें-नीमच और गुना मामले को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, गुना एसपी-कलेक्टर को हटाने की मांग
विज्ञापन
गार्ड्स ने हमलावर को पड़कर पुलिस के हवाले किया
हमलावर को एम्स भोपाल के सुरक्षा गार्डों और तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा तुरंत पकड़ लिया गया और उसे बागसेवनिया पुलिस थाने के हवाले कर दिया गया। इस संबंध में मध्यप्रदेश चिकित्सा सेवा व्यक्ति और चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा और क्षति की रोकथाम) अधिनियम, 2008 की धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस अधिनियम के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल की सजा और 50,000 से 2 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनवाई अपनी किसान आईडी, किसानों से की यह अपील
सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के निर्देश
एम्स भोपाल प्रशासन ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों पर किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह घटना देशभर में चिकित्सकों पर बढ़ते हमलों की कड़ी का हिस्सा है, जिससे सख्त कानून और प्रभावी सुरक्षा उपायों की मांग और प्रबल हुई है।
विज्ञापन
डॉक्टर के चेहरे पर किया हमला
घटना उस समय हुई जब डॉक्टर इमरजेंसी विभाग के येलो ट्रायेज क्रिटिकल एरिया में ड्यूटी पर तैनात थे। मरीज संतोष कुमार (उम्र 39 वर्ष) के साथ आए परिजनों ने डॉक्टर के साथ शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार किया। परिजनों ने न केवल धमकाया, बल्कि हिंसा भी की-डॉक्टर की शर्ट फाड़ दी, चेहरे पर हमला करने की कोशिश की और उनका गला पकड़ लिया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-नीमच और गुना मामले को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, गुना एसपी-कलेक्टर को हटाने की मांग
विज्ञापन
गार्ड्स ने हमलावर को पड़कर पुलिस के हवाले किया
हमलावर को एम्स भोपाल के सुरक्षा गार्डों और तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा तुरंत पकड़ लिया गया और उसे बागसेवनिया पुलिस थाने के हवाले कर दिया गया। इस संबंध में मध्यप्रदेश चिकित्सा सेवा व्यक्ति और चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा और क्षति की रोकथाम) अधिनियम, 2008 की धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस अधिनियम के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल की सजा और 50,000 से 2 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनवाई अपनी किसान आईडी, किसानों से की यह अपील
सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के निर्देश
एम्स भोपाल प्रशासन ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों पर किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह घटना देशभर में चिकित्सकों पर बढ़ते हमलों की कड़ी का हिस्सा है, जिससे सख्त कानून और प्रभावी सुरक्षा उपायों की मांग और प्रबल हुई है।
