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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal 'Ekatma Parv': Kerala Governor Arif Mohammad Khan said India's knowledge tradition is the basis of India's world guru

भोपाल ‘एकात्म पर्व’: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान बोले- भारत की ज्ञान परंपरा ही भारत के विश्व गुरु होने का आधार है

Sat, 07 May 2022 12:06 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 07 May 2022 12:06 AM IST
सार

राजधानी भोपाल में आदि शंकराचार्य की जयंती एकात्म पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्म्द ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ही भारत के विश्व गुरु होने का आधार है।

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Bhopal 'Ekatma Parv': Kerala Governor Arif Mohammad Khan said India's knowledge tradition is the basis of India's world guru
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद दीप प्रज्वलित करते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में आदि शंकराचार्य की जयंती एकात्म पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख्नान ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ही भारत के विश्व गुरु होने का आधार है।
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भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभा गृह में शुक्रवार को संस्कृति विभाग के आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा एकात्म पर्व अनेक संतों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। आदि शंकराचार्य जी की जयंती को दार्शनिक दिवस के रूप में मनाने के कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत ज्ञान विज्ञान का ऐसा केंद्र है जहां सदियों तक अन्य राष्ट्रों के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते रहे। अनेक धर्मों और दर्शनों की शिक्षा भारत में मिलती थी। भारत की ज्ञान परम्परा ही भारत के विश्व गुरू होने का आधार है। जहां अन्य देश साहस, सुंदरता और अन्य गुणों के कारण जाने जाते हैं, भारत ज्ञान विज्ञान की परम्परा के लिए जाना जाता है।
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राज्यपाल ने कहा कि आदि शंकराचार्य जिस राज्य केरल से यात्रा पर चले थे, उस राज्य का राज्यपाल होने का मुझे सौभाग्य मिला है। आदि शंकराचार्य महान दार्शनिक थे। उन्होंने एकता के सूत्र में सभी को बांधने का कार्य किया। वे गुरू की तलाश में हजारों किलोमीटर चलकर मध्यप्रदेश भी आए। शंकराचार्य जी के अद्वैतवाद को किसी प्रदेश या देश में सीमित नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश के प्रकल्प को विश्व में पहचान मिलेगी। शंकराचार्य जी का मनाना था कि सभी मानवता का पाठ पढ़ें। प्रत्येक व्यक्ति साधारण न होकर दिव्य है।
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राज्यपाल खान ने विभिन्न वेदों की पंक्तियों और श्लोकों के उद्धहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि नैसर्गिक या प्रकृति के कानून में विविधिता को स्वीकार किया गया है। भारत में हजारों वर्ष से इसे स्वीकार किया गया जो दुनिया के कई देशों में सौ डेढ़ सौ साल से स्वीकार किया जा रहा है। हम सनातन सिद्धांतों पर गर्व करते हैं। हम अपने ऋषियों की बात दुनिया को बता नहीं सके। शंकराचार्य जी ने देश के विभिन्न स्थानों पर मठ स्थापित किए। उन्होंने वेदों से एक-एक महा वाक्य इन मठों को प्रदान किया। राज्यपाल ने कहा कि हर मनुष्य मोक्ष का अधिकारी है। क्योंकि उसमें आत्मा समाहित है।



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शंकराचार्य जी के दर्शन के अनुरूप समस्त भेदभाव तिरोहित हो जाएं , इसलिए ओंकारेश्वर प्रकल्प का महत्व है। वर्ष 2017 से हुई प्रकल्प की शुरूआत के पश्चात अब तेजी से कार्य हो रहे हैं। वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने प्रकल्प के कार्यों को जारी रखने के अनुरोध को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन अब यह प्रकल्प शीघ्र साकार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य जी की भव्य प्रतिमा की स्थापना के लिए धातु संग्रहण का कार्य जनभागीदारी से हुआ था। एकात्म यात्रा में कलश भर भर के  सभी सहयोग दे रहे थे। ऐसे महत्वपूर्ण प्रकल्प सिर्फ सरकारों के माध्यम से नहीं बल्कि जन-जन के सहयोग से पूर्ण होते हैं।

 
वहीं, आर्ष विद्यामंदिर राजकोट के संस्थापक स्वामी परमात्मानंद ने कहा कि मध्यप्रदेश में आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान प्रारंभ करने और आदि शंकराचार्य की विशाल एवं भव्य प्रतिमा स्थापित करने की संकल्पना प्रेरक है। हमारा दर्शन विश्व में स्थापित होगा। आज सर्वसमावेशी भाव स्थापित करने की आवश्यकता है।

प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन एवं न्यासी सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि जगदगुरू आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए इस पर्व का आयोजन किया गया है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से छात्र-छात्राएँ, युवा, कलाकार, पत्रकार, साहित्यकार, रंगकर्मी और शिक्षाविद आदि ने भी हिस्सेदारी की है। शुक्ला ने ओंकारेश्वर प्रकल्प की प्रगति की जानकारी भी दी।
 
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