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बैतूल: स्वास्थ्य विभाग के खाली पड़े आवास में छिपा रखी थी लाखों की सागौन, पुलिस और वन विभाग की रेड, मामला दर्ज
Thu, 08 Oct 2026 01:51 PM IST
बैतूल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: बैतूल ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:51 PM IST
सार
बैतूल के भैंसदेही में पुलिस और वन विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के खाली सरकारी क्वार्टर से 23 नग सागौन की चरपट जब्त की है। लकड़ी की कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई गई है। वन विभाग अब इसके स्रोत और क्वार्टर में रखे जाने की जांच कर रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के आवास से लाखों की सागौन पकड़ी
विस्तार
जिले के भैंसदेही में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग के एक खाली पड़े सरकारी क्वार्टर से 23 नग सागौन की चरपट बरामद की गई हैं। जब्त लकड़ी की कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर लकड़ी वन विभाग के सुपुर्द कर दी है।
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बीएमओ की सूचना पर पहुंची पुलिस
पुलिस के अनुसार 8 अक्टूबर की रात भैंसदेही बीएमओ ने पुलिस को लिखित सूचना दी थी कि स्वास्थ्य विभाग के एक रिक्त शासकीय आवास में इमारती लकड़ी रखे होने की जानकारी मिली है। सूचना मिलने के बाद भैंसदेही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान क्वार्टर के अंदर 23 नग सागौन की चरपट रखी मिली। पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर लकड़ी जब्त की और आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया।
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कहां से आई लकड़ी?
वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद सागौन की लकड़ी किसने और कब काटी तथा उसे सरकारी आवास में किस उद्देश्य से रखा गया था। सरकारी आवास लंबे समय से खाली होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पुलिस और वन विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं किसी ने खाली आवास का इस्तेमाल लकड़ी रखने के लिए तो नहीं किया। पुलिस मामले में स्वास्थ्य विभाग के किसी कर्मचारी की भूमिका की भी जांच कर रही है। फिलहाल इस संबंध में किसी कर्मचारी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। कार्रवाई थाना प्रभारी राजेश सातनकर के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक रामप्रकाश कीर, सहायक उपनिरीक्षक बलीराम बम्हनेले और आरक्षक नारायण जाट शामिल रहे।
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने लोगों से अपील की है कि जंगल की लकड़ी के अवैध कटान, परिवहन या भंडारण की जानकारी तत्काल पुलिस या वन विभाग को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने और आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
