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मध्यप्रदेश: भाजपा का गढ़ रहे मालवा क्षेत्र में इस बार पलट सकती है बाजी, कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ीं

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Fri, 12 Oct 2018 03:26 PM IST
shivraj singh
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मालवा मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा क्षेत्र और भाजपा का सबसे बड़ा गढ़ है। लेकिन इस बार के चुनाव में यहां मतदाता किसके साथ जाएंगे यह अभी भी एक सवाल बना हुआ है। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि भगवा पार्टी क्या रुख अपनाती है लेकिन तथ्य यह है कि इस चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में भाजपा खुद को सहज महसूस नहीं कर रही है। वहीं कांग्रेस भी इस बार बाजी पलट देने की उम्मीद में है।
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मंदसौर के एक किसान भानुप्रताप सिंह ने कहा, "कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि इस बार चुनाव कौन जीतेगा।" उन्होंने कहा कि भाजपा के गढ़ मालवा क्षेत्र में राजनीति पिछले एक साल में खासतौर पर मंदसौर में गोलीवारी की घटना के बाद काफी हद तक बदल गई।

पिछले साल जून में छह किसानों की मौत हो गई थी जब पुलिस ने बेहतर कीमतों की मांग कर रहे किसान प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी थीं। सूखे से प्रभावित इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के कई मामले दर्ज किए गए हैं।

इस घटना से न केवल मंदसौर जिले में किसानों का गुस्सा भड़का बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र और कुछ हद तक निमाड़ क्षेत्र में भी इसका असर पड़ा। गोलीकांड की घटना के बाद से प्रदेश की भाजपा सरकार मालवा क्षेत्र के किसानों को शांत करने की कोशिशों में जुटी है।

मालवा क्षेत्र में अगर, देवास, धार, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन जिले शामिल हैं। मालवा क्षेत्र में कुल 50 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें पिछले दो चुनावों में भाजपा ने अधिकांश सीटें जीती हैं।

भाजपा ने 2008 के चुनावों में इस क्षेत्र में 50 सीटों में से 27 सीटें जीती थीं। और 2013 के चुनावों में 45 सीटों पर विजयी हुई थी। 2013 के चुनावों में भाजपा ने प्रदेश की 230 सीटों में से 165 जीती थीं, जो पिछले चुनावों के मुकाबले में लगभग 22 सीटें ज्यादा थीं। जीती गई अतिरिक्त 22 सीटों में से 18 सीटें मालवा क्षेत्र से जीती गईं थी।

भगवा पार्टी यह जानती है कि इन सभी 45 सीटों पर जीत बरकरार रख पाना बहुत कठिन होगा। लेकिन सत्ता विरोध लहर के अलावा भाजपा जिन बातों से परेशान है वो हैं बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत, प्रदेश में अपराध का बढ़ता ग्राफ, कृषि मुद्दों और सबसे बढ़कर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम का मुद्दा।
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भाजपा, कांग्रेस को 'जयस' से कड़ी टक्कर

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