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Ashadhi Ekadashi 2023: सागर में शुरू होगा पांच दिन का पंढरीनाथ महोत्सव, गुरु पूर्णिमा तक होगी विट्ठल की आराधना
Wed, 28 Jun 2023 11:59 AM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 28 Jun 2023 11:59 AM IST
सार
सागर जिले के रहली में आषाढ़ी (देवशयनी) एकादशी पर 29 जून से पंढरीनाथ महोत्सव शुरू होगा। गुरु पूर्णिमा तक यह महोत्सव चलेगा।
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सागर के रहली में भी है पंढरपुर और विट्ठल का मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सागर जिले के रहली में भी एक पंढरपुर है। यहां भी भगवान विट्ठल (श्रीकृष्ण का एक स्वरूप) का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां आषाढ़ी एकादशी या देवशयनी एकादशी पर पांच दिवसीय विशेष धार्मिक आयोजन शुरू होगा, जो गुरु पूर्णिमा तक चलेगा। मराठा काल से ही यहां पारंपरिक मेला लगता है। यह सब वैसा ही है, जैसा महाराष्ट्र के पंढरपुर में होता है।
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रहली के पंढरपुर का यह मंदिर मराठा शासकों ने बनवाया था। रहली-पंढरपुर मंदिर ट्रस्ट पुजारी अजीत सप्रे ने बताया यह मंदिर हु-ब-हू महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित पंढरपुर जैसा ही है। देश-प्रदेश से भक्त यहां भगवान का दर्शन करने पहुंचते हैं। दो साल पहले महाभारत में श्रीकृष्ण का किरदार निभा चुके नीतिश भारद्वाज यहां पर भगवान विट्ठल का अभिषेक करने पहुंचे थे। महाराष्ट्र और रहली दोनों ही स्थानों पर दो नदियों का संगम है। दोनों ही जगह नदियां चंद्राकार रूप में बहती हैं। यही कारण है कि मराठों के शासन काल में यहां पंढरपुर नाम से नगर बसाया गया। महाराष्ट्र के पंढरपुर जैसा ही मंदिर बनाया गया। रहली के पंढरपुर में साल में दो बार गुरु पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर पांच दिवसीय मेला लगता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां राधा कृष्ण की लीला का मंचन होता है। उस समय दही-हांडी होती है और टूटी हांडी लूटने लोग टूट पड़ते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण द्वारा तोड़ी गई दही हांडी के इन टुकड़ों को तिजोरी में रखने से धन और गौशाला में रखने से गोधन की वृद्धि होती है। पुजारी अजित सप्रे ने बताया कि रहली स्थित पंढरपुर मंदिर में 29 जून एकादशी से आषाढ़ की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा तक पांच दिन विभिन्न धार्मिक आयोजन सम्पन्न होंगे। 29 जून को परंपरागत भव्य मेले का आयोजन होगा।
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