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Anuppur News: पावन पथरा गांव में मिले श्रीराम, मां सीता और लक्ष्मण के पदचिन्ह, ग्रामीणों ने की संरक्षण की मांग
Sun, 05 Jan 2025 10:46 AM IST
अनूपपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
Published by: अनूपपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2025 10:46 AM IST
सार
अनूपपुर के रेउसा ग्राम में पावन पथरा चरण तीर्थ पर रामशिला, लक्ष्मणशिला, पांडवशिला जैसे स्थल, दर्जनों चरणचिह्न, पंच कुंड, एक प्राचीन गुफा और एक बावड़ी मिले हैं। ये सभी स्थल रामायण और महाभारत काल के प्रमाणस्वरूप माने जाते हैं।
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श्री राम के आगमन से जुड़े स्थान को दिखाते हुए ग्रामीण
विस्तार
अनूपपुर जिला अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां रामायण और महाभारत काल से जुड़े अनेक स्थल देखने और उनसे संबंधित कथाएं एवं किंवदंतियां सुनने को मिलती हैं। कोतमा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम रेउसा स्थित पावन पथरा चरण तीर्थ एक ऐसा ही स्थल है, जहां रामायण काल के दौरान भगवान श्रीराम के चरणों के निशान बड़ी संख्या में मिले हैं। स्थानीय मान्यता है कि श्रीराम ने वनवास के दौरान कोतमा, सीतामढ़ी और पावन पथरा चरण तीर्थ में कुछ समय व्यतीत किया था।
1 गुफा, 5 कुंड, 1 बावड़ी और पदचिह्नों से अतीत की गवाही
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सीतामढ़ी ग्राम में श्रीराम के आगमन से जुड़े प्रमाण पहले ही मिल चुके हैं। वहीं, इसके पास स्थित रेउसा ग्राम में पावन पथरा चरण तीर्थ पर रामशिला, लक्ष्मणशिला, पांडवशिला जैसे स्थल, दर्जनों चरणचिह्न, पंच कुंड, एक प्राचीन गुफा और एक बावड़ी मिले हैं। ये सभी स्थल रामायण और महाभारत काल के प्रमाणस्वरूप माने जाते हैं। रेउसा के ग्रामीणों ने इस चरण तीर्थ पर पूजा-अर्चना और यज्ञ शुरू कर दिया है। यह स्थल अब धार्मिक आस्था का केंद्र बनता जा रहा है और लोग इसे "चरण तीर्थ" के नाम से पुकार रहे हैं।
जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज करेंगे कथा का वाचन
फरवरी महीने में पावन पथरा चरण तीर्थ पर जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज, मानसपीठ खजूरी ताल द्वारा राम कथा का वाचन और यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही नौ दिवसीय रामलीला का भी आयोजन किया जाएगा। कोतमा विधानसभा क्षेत्र का यह स्थान अब ग्रामीणों की धार्मिक आस्था का केंद्र बन चुका है। लोगों का मानना है कि गुफा के अंदर स्थित बावड़ी सैकड़ों वर्षों पुरानी है, जिसे अब ग्रामीणों द्वारा साफ कराया गया है।
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1 गुफा, 5 कुंड, 1 बावड़ी और पदचिह्नों से अतीत की गवाही
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सीतामढ़ी ग्राम में श्रीराम के आगमन से जुड़े प्रमाण पहले ही मिल चुके हैं। वहीं, इसके पास स्थित रेउसा ग्राम में पावन पथरा चरण तीर्थ पर रामशिला, लक्ष्मणशिला, पांडवशिला जैसे स्थल, दर्जनों चरणचिह्न, पंच कुंड, एक प्राचीन गुफा और एक बावड़ी मिले हैं। ये सभी स्थल रामायण और महाभारत काल के प्रमाणस्वरूप माने जाते हैं। रेउसा के ग्रामीणों ने इस चरण तीर्थ पर पूजा-अर्चना और यज्ञ शुरू कर दिया है। यह स्थल अब धार्मिक आस्था का केंद्र बनता जा रहा है और लोग इसे "चरण तीर्थ" के नाम से पुकार रहे हैं।
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जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज करेंगे कथा का वाचन
फरवरी महीने में पावन पथरा चरण तीर्थ पर जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज, मानसपीठ खजूरी ताल द्वारा राम कथा का वाचन और यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही नौ दिवसीय रामलीला का भी आयोजन किया जाएगा। कोतमा विधानसभा क्षेत्र का यह स्थान अब ग्रामीणों की धार्मिक आस्था का केंद्र बन चुका है। लोगों का मानना है कि गुफा के अंदर स्थित बावड़ी सैकड़ों वर्षों पुरानी है, जिसे अब ग्रामीणों द्वारा साफ कराया गया है।
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