MP अजब है: पूरे स्कूल में एक ही छात्र, वह भी मांग रहा टीसी
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एक तरफ तो सरकारें देश की शिक्षा को बेहतर बनाने की बात करती हैं लेकिन दूसरी ओर कई ऐसे उदाहरण सामने आते हैं जिससे ये विश्वास ही नहीं होता कि सरकारें इस दशा में कोई काम कर रही है।
हाल का मामला मध्य प्रदेश के खंडवा का है जहां सीवर पुनर्वास स्थित एक ग्रामीण स्कूल में 15 दिन पहले तक कुल तीन बच्चे और दो शिक्षिकाएं थी लेकिन कुछ दिनों पहले दो बच्चों ने निजी स्कूल में प्रवेश ले लिया।
जिसके बाद पूरे स्कूल में केवल एक बच्चा बचा है जिसके अभिभावक अब ट्रांसफर सेर्टिफिकेट मांग रहे हैं लेकिन स्कूल प्रशासन ने टीसी देने से मना कर दिया है क्योंकि अगर ये बच्चा चला गया तो फिर स्कूल में बच्चों की संख्या शून्य हो जाएगी।
अभिभावकों की है शिकायत
स्कूल में दोनों शिक्षिकाएं आने की अपनी औपचारिकता निभा रही हैं। स्कूल की प्रधान पाठक उपासना पहारे ने कहा कि स्कूल में बच्चे न हों तो हमें भी अच्छा नहीं लगता।
बच्चे के अभिभावक रोज टीसी मांगने आते हैं लेकिन बीआरसी की ओर से टीसी न देने को कहा गया है। बच्चे के अभिभावक ने कहा कि स्कूल घर के पास ही है जिस वजह से बच्चे हमेशा घर चले आते हैं।
मिड डे मील भी रोज नहीं मिलता था। बच्चे का प्रवेश दूसरे स्कूल में इसलिए कराना चाहते हैं ताकि वो वहां बैठ कर पढ़ाई तो कर सके।
हो सकता है दूसरे स्कूल में विलय
अभी तक बच्चे की टीसी नहीं दी गई है और उसकी उपस्थिति रोज दर्ज होती है। स्कूली शिक्षा मंत्री पारस जैन के मुताबिक जिन स्कूलों में 20 से कम बच्चे हैं उन्हें पास के ही स्कूल में स्टाफ सहित विलय कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति है है तो डीईओ को ऐसा करना चाहिए था। सीवर पुनर्वास स्कूल के पास कुछ दूरी पर सैटेलाइट प्राथमिक स्कूल है।
