बिन हाथों के भी चलाई कार, आरटीओ लाइसेंस देने को नहीं तैयार
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कई बार कुदरत इंसान के जीवन में कुछ कमियां छोड़कर उसकी परीक्षा लेने की कोशिश करती है, ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कुदरत के दिए हर इत्मिहान को हंसते हुए पार करते हैं। कुछ ऐसे ही हैं इंदौर निवासी विक्रम अग्निहोत्री।
बचपन से ही अपना जीवन बिना हाथों के जी रहे विक्रम अग्निहोत्री आसानी से वो काम भी कर लेते हैं जो कई बार हष्टपुष्ट शरीर वाले भी नहीं कर पाते। पेशे से व्यापारी विक्रम अग्निहोत्री ने अब अपनी काबियित के बल पर शहर के आरटीओ के सामने एक दुविधा खड़ी कर दी है।
अंगेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार विक्रम अग्निहोत्री ने बिना हाथों के दोनों पैरों के सहारे कार को बेहतरीन तरीके से ड्राइव कर आरटीओ के सामने लाइसेंस की मांग कर दी है। उन्होंने खुद अपनी कार में आरटीओ को बैठाकर कार ड्राइव की, यह नजारा देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया।
शारीरिक अक्षमता के कारण आरटीओ ने जताई असमर्थता
दिक्कत ये है कि सबकुछ देखने के बाद भी आरटीओ ने उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में असमर्थता जता दी। विक्रम अग्निहोत्री ने अपने दोनों हाथ उस समय ही खो दिए थे जब वे मात्र सात साल के थे। इसके बाद से ही वे अपने सारे काम पैरों के सहारे करते हैं।
पैरों के सहारे ही उन्होंने कार चलाना भी सीख लिया। उन्होंने अपने अनुसार कार में कुछ बदलाव भी किए। इसके बाद वह अपने पैरों के सहारे ही कार चलाते हुए आरटीओ ऑफिस पहुंचे। उन्होंने दाएं पैर से स्टेयरिंग को संचालित किया तो बाएं पैर से एक्सीलेटर और ब्रेक पर नियंत्रण बनाए रखा।
उन्हें बिना हाथों के कार चलाते देख आरटीओ ऑफिस के कर्मचारी भी हैरत में पड़ गए। उन्होंने आरटीओ एमपी सिंह और डिप्टी आरटीओ को अपने साथ कार में बैठने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने बाप रोड से विजय नगर तो कार ड्राइविंग करके दिखाई।
मामला पहुंचा परिवहन आयुक्त के पास
हालांकि इस सबके बाद भी आरटीओ ऑफिस ने उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस देने में असमर्थता जता दी। डिप्टी आरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि अधिकारिक नियमों के अनुसार फिलहाल उन्हें लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता।
लेकिन जल्द इस संबंध में भोपाल में परिवहन आयुक्त को रिपोर्ट भेजी जाएगी। जिसके बाद वहीं से इस संबंध में कोई निर्णय हो पाएगा।
वहीं इस सबसे निराश अग्निहोत्री कहते हैं कि वो कई देशों में गए हैं जहां लोग पैरों से वाहन चलाते हैं और उन्हें इसकी अनुमति होती है, लेकिन इंडिया में एक अशक्त व्यक्ति को इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
