{"_id":"61965209498d1231ef3b8ad0","slug":"5-thousand-rupees-cost-on-mp-high-court-hc-mgmt-proves-to-be-wrong-for-not-promoting-woman-stenographer","type":"story","status":"publish","title_hn":"मप्र हाईकोर्ट पर 5 हजार रुपये की कॉस्ट: महिला स्टेनोग्राफर को प्रमोशन नहीं देने के लिए हाईकोर्ट मैनेजमेंट की गलती साबित हुई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मप्र हाईकोर्ट पर 5 हजार रुपये की कॉस्ट: महिला स्टेनोग्राफर को प्रमोशन नहीं देने के लिए हाईकोर्ट मैनेजमेंट की गलती साबित हुई
Thu, 18 Nov 2021 06:45 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 18 Nov 2021 06:45 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला स्टेनोग्राफर को प्रमोशन न देने के लिए हाईकोर्ट प्रबंधन की गलती मानी है। इसी वजह से उस पर 5 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई गई है।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खुद पर ही 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला एक महिला स्टेनोग्राफर के प्रमोशन से जुड़ा है। उसे निर्धारित योग्यता के बाद भी प्रमोशन नहीं मिला तो उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने 10% प्रतिशत ब्याज के साथ वेतन सहित अन्य लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट प्रबंधन पर पांच हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए यह राशि याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा करने के आदेश दिए हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस शील नागू और जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने हाईकोर्ट मैनेजमेंट पर पांच हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए यह राशि महिला के खाते में जमा करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता प्राची पांडे ने कहा था कि वह हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर थी। वरिष्ठ होने के बाद भी अक्टूबर 2018 में उसे कनिष्ठ स्टेनोग्राफर पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। इसी मामले में उन्होंने आवेदन लगाया था। इस पर सुनवाई करते हुए डीपीसी ने जुलाई 2019 में पदोन्नति तो दे दी, पर नो वर्क नो पेमेंट के आधार पर वेतन वृद्धि सहित अन्य लाभ देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ ही प्राची पांडे ने यह याचिका दाखिल की थी।
योग्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया था
हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि अक्टूबर 2018 में डीपीसी के सामने याचिकाकर्ता का प्रमाण पत्र पेश नहीं हुआ था। इस प्रमाण पत्र में स्टेनोग्राफर के रूप में प्रति मिनट 100 अंग्रेजी शब्द लिखने की योग्यता साबित हो रही थी। इसी आधार पर प्रमोशन नहीं दिया गया। यह सर्टिफिकेट याचिकाकर्ता के सर्विस रिकॉर्ड में मौजूद था। हाईकोर्ट ने माना कि जब सर्टिफिकेट महिला के सर्विस रिकॉर्ड में था तो उसे पेश न करने के आधार पर प्रमोशन न देना, गलती है। इसी को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने कॉस्ट लगाई है। याचिकाकर्ता की तरफ से आदर्श हीरा और शांतनु अयाची ने पैरवी की।
विज्ञापन
विज्ञापन
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस शील नागू और जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की बेंच ने हाईकोर्ट मैनेजमेंट पर पांच हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए यह राशि महिला के खाते में जमा करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता प्राची पांडे ने कहा था कि वह हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर थी। वरिष्ठ होने के बाद भी अक्टूबर 2018 में उसे कनिष्ठ स्टेनोग्राफर पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। इसी मामले में उन्होंने आवेदन लगाया था। इस पर सुनवाई करते हुए डीपीसी ने जुलाई 2019 में पदोन्नति तो दे दी, पर नो वर्क नो पेमेंट के आधार पर वेतन वृद्धि सहित अन्य लाभ देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ ही प्राची पांडे ने यह याचिका दाखिल की थी।
विज्ञापन
योग्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया था
हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि अक्टूबर 2018 में डीपीसी के सामने याचिकाकर्ता का प्रमाण पत्र पेश नहीं हुआ था। इस प्रमाण पत्र में स्टेनोग्राफर के रूप में प्रति मिनट 100 अंग्रेजी शब्द लिखने की योग्यता साबित हो रही थी। इसी आधार पर प्रमोशन नहीं दिया गया। यह सर्टिफिकेट याचिकाकर्ता के सर्विस रिकॉर्ड में मौजूद था। हाईकोर्ट ने माना कि जब सर्टिफिकेट महिला के सर्विस रिकॉर्ड में था तो उसे पेश न करने के आधार पर प्रमोशन न देना, गलती है। इसी को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने कॉस्ट लगाई है। याचिकाकर्ता की तरफ से आदर्श हीरा और शांतनु अयाची ने पैरवी की।
विज्ञापन
