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लखनऊ में युवक की गोली मारकर हत्या, अफवाह समझ पुलिस वापस लौटी
Fri, 29 Jan 2021 09:10 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 29 Jan 2021 09:10 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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सरोजनीनगर में बंथरा इलाके में बृहस्पतिवार रात एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारों ने उसके ही फोन से गोली मारने की सूचना बंथरा पुलिस को दी। बाद में उसका मोबाइल स्विच ऑफ कर वहीं छोड़कर चले गए। सूचना के बाद पहुंची पुलिस गांव के पास कई चक्कर काटने के बाद इसे अफवाह समझकर वापस लौट गई। शुक्रवार सुबह परिवारीजनों से सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने खून से लथपथ पड़े युवक को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, लेकिन वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। गांव के ही कुछ युवकों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।
बंथरा के माती गांव निवासी स्व. रामआसरे का बेटा अमरेश (21) कारपेंटर का काम करता था। परिवारीजनों के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे अमरेश घर पहुंचा और उसके घर पहुंचते ही उसके फोन पर एक कॉल आई। इसके बाद अमरेश घर से बाहर चला गया। देर रात तक जब वह नहीं लौटा तो परिवारीजनों ने उसके फोन पर कॉल की, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला। शुक्रवार सुबह गांव के लोग टहलने निकले तो प्राथमिक विद्यालय के पीछे एक खाली प्लॉट में युवक को खून से लथपथ पड़ा देखा।
घायल पड़े युवक के पास शराब की खाली बोतल, गिलास और नमकीन व बिस्कुट के खाली रैपर व पानी की बोतल पड़ी हुई थी। उससे कुछ ही दूरी पर एक जोड़ी चप्पल, 20 रुपये और युवक का मोबाइल स्विच ऑफ हालत में पड़ा था। युवक की दाहिनी कनपटी में गोली मारने का निशान बना था और उससे खून का रिसाव होने के साथ ही वहां पर काफी खून फैला पड़ा था। वहां पर आग जलने के बाद उपलों की राख भी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि घटना को अंजाम देने वालों ने उसको जलाने की भी कोशिश की थी।
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ग्रामीणों ने सूचना अमरेश के परिवारीजनों को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की जांच करने के साथ ही खून से लथपथ पड़े युवक को आनन-फानन ट्रॉमा सेंटर भेजा, लेकिन वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं पुलिस ने घटनास्थल के पास पड़ी सभी वस्तुओं को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। मृतक के परिवारीजनों की माने तो पुलिस ने उन्हें बताया कि रात में ही अमरेश के मोबाइल से उसे गोली मारने की सूचना मिली थी।
जिस पर उसी समय पुलिस गांव पहुंची, लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं पता चला। इसके बाद पुलिस लौट गई। फिलहाल मृतक के परिवारीजनों ने इस घटना में गांव के ही कुछ लोगों पर आरोप लगाया है। पुलिस गांव के ही करीब आधा दर्जन युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है, जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
कहीं अमरेश को पुलिस की गोली तो नहीं लगी!
ग्रामीणाें में चर्चा है किबृहस्पतिवार रात क्राइम ब्रांच की टीम ने माती गांव में अपराधियों को पकड़ने के लिए कुछ बदमाशों को दौड़ाया था। उस समय बदमाशों पर फायरिंग भी की थी। ग्रामीणों को संदेह है कि क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा चलाई गई गोली से ही अमरेश घायल हो गया। उसे घायलावस्था में देख क्राइम ब्रांच की टीम वहां से भाग निकली। ग्रामीणों में चर्चा है कि क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा मारी गई गोली से ही उसकी मौत हुई है।
लेकिन बंथरा पुलिस इस मामले को दबाने में जुटी है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में गांव के करीब एक दर्जन युवक घटनास्थल के पास आग जलाकर ताप रहे थे, तभी पुलिस ने वहां पर दबिश दी। जिससे सभी युवक इधर-उधर भागने लगे। उस दौरान पुलिस ने वहां पर फायरिंग भी की थी। लेकिन बाद में पुलिस वहां से चली गई। उधर सूत्रों का कहना है कि बुधवार रात पीजीआई इलाके में दवा कारोबारी सौरभ कपूर के साथ हुई लूट के मामले में संदिग्ध अपराधियों की धरपकड़ के लिए क्राइम ब्रांच की टीम माती गांव गई थी। तभी उसने एक जगह इकट्ठा युवकों को दौड़ाकर फायरिंग की थी।
पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा बदमाशों को दौड़ाकर फायरिंग करने की ग्रामीणों में फैली चर्चा भी पुलिस कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रही है। क्योंकि इसमें सोचने वाली बात यह है कि अगर किसी हत्यारे ने घटना अंजाम दी है तो उसने मृतक के ही मोबाइल से गोली मारने की सूचना बंथरा पुलिस को क्यों दी। इसके अलावा अगर क्राइम ब्रांच की टीम ने अपराधियों को पकड़ने के लिए दौड़ाकर फायरिंग की तो गोली मृतक की कनपटी पर ही क्यों लगी।
उसके शरीर के अन्य हिस्सों में गोली क्यों नहीं लगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हत्यारों ने घटना अंजाम दी होती तो उसके ही मोबाइल से पुलिस को इसकी सूचना न देते और अगर क्राइम ब्रांच ने अपराधी समझकर फायरिंग की तो यह महज फायरिंग नहीं, बल्कि जानबूझकर मृतक की कनपटी में असलहा सटाने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या की गई है।
पुलिस ने मृतक के भाई से सादे कागज पर कराए हस्ताक्षर
मृतक अमरेश का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने के समय मृतक के भाई से सादे कागज पर पुलिस द्वारा हस्ताक्षर कराना भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। क्योंकि मृतक के भाई सनी ने भरी भीड़ में लोगों को बताया कि पुलिस ने अमरेश का शव ले जाते वक्त उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए हैं। पुलिस ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर क्यों कराए, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
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बंथरा के माती गांव निवासी स्व. रामआसरे का बेटा अमरेश (21) कारपेंटर का काम करता था। परिवारीजनों के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे अमरेश घर पहुंचा और उसके घर पहुंचते ही उसके फोन पर एक कॉल आई। इसके बाद अमरेश घर से बाहर चला गया। देर रात तक जब वह नहीं लौटा तो परिवारीजनों ने उसके फोन पर कॉल की, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला। शुक्रवार सुबह गांव के लोग टहलने निकले तो प्राथमिक विद्यालय के पीछे एक खाली प्लॉट में युवक को खून से लथपथ पड़ा देखा।
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घायल पड़े युवक के पास शराब की खाली बोतल, गिलास और नमकीन व बिस्कुट के खाली रैपर व पानी की बोतल पड़ी हुई थी। उससे कुछ ही दूरी पर एक जोड़ी चप्पल, 20 रुपये और युवक का मोबाइल स्विच ऑफ हालत में पड़ा था। युवक की दाहिनी कनपटी में गोली मारने का निशान बना था और उससे खून का रिसाव होने के साथ ही वहां पर काफी खून फैला पड़ा था। वहां पर आग जलने के बाद उपलों की राख भी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि घटना को अंजाम देने वालों ने उसको जलाने की भी कोशिश की थी।
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ग्रामीणों ने सूचना अमरेश के परिवारीजनों को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की जांच करने के साथ ही खून से लथपथ पड़े युवक को आनन-फानन ट्रॉमा सेंटर भेजा, लेकिन वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं पुलिस ने घटनास्थल के पास पड़ी सभी वस्तुओं को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। मृतक के परिवारीजनों की माने तो पुलिस ने उन्हें बताया कि रात में ही अमरेश के मोबाइल से उसे गोली मारने की सूचना मिली थी।
जिस पर उसी समय पुलिस गांव पहुंची, लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं पता चला। इसके बाद पुलिस लौट गई। फिलहाल मृतक के परिवारीजनों ने इस घटना में गांव के ही कुछ लोगों पर आरोप लगाया है। पुलिस गांव के ही करीब आधा दर्जन युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है, जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
कहीं अमरेश को पुलिस की गोली तो नहीं लगी!
ग्रामीणाें में चर्चा है किबृहस्पतिवार रात क्राइम ब्रांच की टीम ने माती गांव में अपराधियों को पकड़ने के लिए कुछ बदमाशों को दौड़ाया था। उस समय बदमाशों पर फायरिंग भी की थी। ग्रामीणों को संदेह है कि क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा चलाई गई गोली से ही अमरेश घायल हो गया। उसे घायलावस्था में देख क्राइम ब्रांच की टीम वहां से भाग निकली। ग्रामीणों में चर्चा है कि क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा मारी गई गोली से ही उसकी मौत हुई है।
लेकिन बंथरा पुलिस इस मामले को दबाने में जुटी है। ग्रामीणों ने बताया कि रात में गांव के करीब एक दर्जन युवक घटनास्थल के पास आग जलाकर ताप रहे थे, तभी पुलिस ने वहां पर दबिश दी। जिससे सभी युवक इधर-उधर भागने लगे। उस दौरान पुलिस ने वहां पर फायरिंग भी की थी। लेकिन बाद में पुलिस वहां से चली गई। उधर सूत्रों का कहना है कि बुधवार रात पीजीआई इलाके में दवा कारोबारी सौरभ कपूर के साथ हुई लूट के मामले में संदिग्ध अपराधियों की धरपकड़ के लिए क्राइम ब्रांच की टीम माती गांव गई थी। तभी उसने एक जगह इकट्ठा युवकों को दौड़ाकर फायरिंग की थी।
पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा बदमाशों को दौड़ाकर फायरिंग करने की ग्रामीणों में फैली चर्चा भी पुलिस कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रही है। क्योंकि इसमें सोचने वाली बात यह है कि अगर किसी हत्यारे ने घटना अंजाम दी है तो उसने मृतक के ही मोबाइल से गोली मारने की सूचना बंथरा पुलिस को क्यों दी। इसके अलावा अगर क्राइम ब्रांच की टीम ने अपराधियों को पकड़ने के लिए दौड़ाकर फायरिंग की तो गोली मृतक की कनपटी पर ही क्यों लगी।
उसके शरीर के अन्य हिस्सों में गोली क्यों नहीं लगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हत्यारों ने घटना अंजाम दी होती तो उसके ही मोबाइल से पुलिस को इसकी सूचना न देते और अगर क्राइम ब्रांच ने अपराधी समझकर फायरिंग की तो यह महज फायरिंग नहीं, बल्कि जानबूझकर मृतक की कनपटी में असलहा सटाने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या की गई है।
पुलिस ने मृतक के भाई से सादे कागज पर कराए हस्ताक्षर
मृतक अमरेश का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने के समय मृतक के भाई से सादे कागज पर पुलिस द्वारा हस्ताक्षर कराना भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। क्योंकि मृतक के भाई सनी ने भरी भीड़ में लोगों को बताया कि पुलिस ने अमरेश का शव ले जाते वक्त उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए हैं। पुलिस ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर क्यों कराए, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।