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बदहाल UP: जब नौकरी ही नहीं तो क्यों करें बीएड?

Mon, 14 Jul 2014 03:27 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 14 Jul 2014 03:27 AM IST
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Youth of uttar pradesh not interested in Bed

प्रदेश में युवाओं का बीएड से मोह भंग होता दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल एडमिशन का ग्राफ तेजी से गिर रहा है।

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इस साल पहले चरण की काउंसलिंग के बाद 71,000 सीटें खाली हैं। हालांकि, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय इन सीटों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में है।

प्रदेश में मौजूदा समय 1250 सरकारी और निजी कॉलेजों में 1,38,000 के आसपास सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए पहले चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की शरण में विश्वविद्यालय

Youth of uttar pradesh not interested in Bed

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बीएड प्रवेश परीक्षा कराने वाला विश्वविद्यालय केवल एक बार ही काउंसलिंग करा सकता है और इसके बाद खाली सीटें पूलिंग के आधार पर भरी जाएंगी।

पूलिंग का सीधा सा मतलब है कि खाली सीटों के लिए काउंसलिंग नहीं होगी बल्कि जो इच्छुक हो उसको एडमिशन दे दिया जाएगा।

इस बार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बीएड प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मिली थी। वह चाहता है कि दूसरे चरण की काउंसलिंग 21, 22 और 23 जुलाई को करा ली जाए।

इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट की शरण में गया हुआ है, ताकि इजाजत मिलने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जा सके।

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साल-दर-साल यूं घटा रुझान

Youth of uttar pradesh not interested in Bed

पिछले तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2012 में 10,000, वर्ष 2013 में 25,000 और इस साल पहले चरण की काउंसलिंग के बाद करीब 71,000 सीटें खाली रह गई हैं।

इसलिए युवा जा रहे बीएड से दूर
राज्य सरकार पहले बीएड वालों को छह माह का विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण देकर प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक बना देती थी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद इसमें बदलाव कर दिया गया।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने तय किया कि बीएड वालों को प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। इसी आधार पर बीएड वालों को प्राइमरी स्तर की टीईटी में बैठने का मौका दिया गया।

बीएड वालों को अब केवल उच्च प्राइमरी स्तर की टीईटी की परीक्षा में ही बैठने का मौका दिया जा रहा है। उच्च प्राइमरी में शिक्षकों के सीमित पद हैं। प्राइमरी में सहायक अध्यापक बनने की राह बंद होती देख बीएड के प्रति युवाओं का रुझान कम हो रहा है।

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बीटीसी का बढ़ा क्रेज

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प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता स्नातक व बीटीसी है। बीटीसी दो वर्षीय कोर्स है और इसे स्नातक के बाद किया जा सकता है। प्रदेश में मौजूदा समय बीटीसी की 44,450 सीटें हैं।

इसमें से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायटों) में 10,450 तथा 680 निजी कॉलेजों में 34,000 सीटें हैं। सीटों की संख्या अधिक होने की वजह से बीएड न कर युवा बीटीसी करने की ओर भाग रहे हैं। यही कारण है कि बीटीसी की एक-एक सीट के लिए 20 से 25 दावेदार हैं।

इस पर उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित महाविद्यालय के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी का कहना है कि सीटें खाली रहने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इसके लिए ऐसे नियम बनाने चाहिए, ताकि सीटें भर जाएं। इस बार भी जितनी सीटें खाली रह गई हैं उसे कॉलेज प्रबंधन से बात कर पूलिंग के आधार पर भरना चाहिए।

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