यूपी पंचायत चुनाव: प्रदेश में राजनीति की नई पौध तैयार, विधानसभा चुनाव में निभाएंगे अहम भूमिका
युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए होने वाली खरीद-फरोख्त के चक्रव्यूह से बचें। अभी से इस बाबत उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंचायत चुनाव में इस बार नई बयार चली है। राजनीति की पाठशाला में नई पौध तैयार हो गई है। विभिन्न जिलों में कई ऐसे युवाओं ने जीत हासिल की है जो पहली ही बार चुनावी मैदान में उतरे थे। ऐसे में ये युवा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में ये अपनी पार्टी के लिए आधार तैयार करेंगे।
इस पंचायत चुनाव में सभी दलों ने जोर आजमाइश की है और कई के लिए इसके परिणाम बेहद सार्थक आए हैं। लेकिन सभी दलों में एक बात संयुक्त रूप से सामने आ रही है। वह है युवाओं का जबरदस्त प्रदर्शन। पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में युवाओं ने गजब की परफॉर्मेंस दिखाई है। चाहे मेरठ हो या बागपत।
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, हापुड़, गाजियाबाद, अलीगढ़ ,बरेली, मुरादाबाद, हाथरस समेत विभिन्न जिलों में कई ऐसे युवा जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं जो पहली बार चुनावी मैदान में थे। इन जिलों में ऐसे युवाओं की संख्या 50 से है।
राजनीतिक समीकरण साधने और विकल्प बनने में खास भूमिका अदा करेंगे
अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में इन युवाओं का प्रतिनिधित्व विधानसभा चुनाव में बेहद अहम साबित होगा। न केवल गांवों में ये अपनी अगले साल तक अच्छी पैठ बना चुके होंगे, बल्कि राजनीतिक अनुभव प्राप्त कर चुके होंगे। ऐसे में अपने-अपने दलों में ये अपनी पार्टी के लिए राजनीतिक समीकरण साधने और विकल्प बनने में खास भूमिका अदा करेंगे।
खरीद-फरोख्त के चक्रव्यूह से बचना होगा
युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए होने वाली खरीद-फरोख्त के चक्रव्यूह से बचें। अभी से इस बाबत उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए गए हैं। युवाओं को यह बात समझनी होगी कि यदि राजनीति में लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो इस लालच से बचना होगा। पार्टी के बड़े और पुराने दिग्गज उन्हें यह बात समझा भी रहे हैं।