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गांव में सुना ‘भगवान’ हैं योगी, जनता दरबार में दिखा और कुछ, जानें तस्वीर के पीछे की कहानी
काजल शर्मा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:53 AM IST
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बच्चे को रुपये देते मंत्री
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यूपी के पिछड़ा वर्ग कल्याण व विकलांग विकास मंत्री ने आज बुंदेलखंड से आए एक बच्चे को 2500 रुपये देकर उसे पिता के लिए टाइपराइटर खरीदने में मदद की। इस बात के लिए उनकी तारीफ जरूर की जानी चाहिए लेकिन बात इतनी सामान्य भी नहीं है जितनी नजर आ रही है। तो साधारण सी दिखने वाली इस घटना के पीछे की पूरी कहानी भी जान लीजिए।
ये बच्चा नमन तिवारी अपने पिता जी के साथ आज मंत्री ओमप्रकाश से मिलने आया था। हमने जब इससे मंत्री से मिलने वाली पैसों की मदद के बारे में पूछा तो इसने पूरी कहानी सुनाई। पता चला कि मंत्री ने ये पैसे उसे पिता के लिए टाइपराइटर खरीदने के लिए दिए हैं। बच्चा इस मदद से बेहद खुश और मंत्री जी का आभारी भी है। लेकिन जब हमने उसे और कुरेदा तो सिस्टम के लूप होल्स नजर आए।
नमन तिवारी ने बताया कि वह बांदा जिले से है। किडनी की बीमारी से उसकी मां का देहांत हो चुका है। इलाज में जमा पूंजी चली गई, बचे-खुचे पैसे और घर बहनों की शादी में चले गए। नमन के विकलांग भाई की भी मौत हो चुकी है।
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नमन के पिता जी टाइपिंग करते हैं लेकिन उनके पास खुद का टाइपराइटर नहीं है। वह दूसरे के टाइपराइटर से टाइपिंग का काम करते हैं। दिनभर में वह तीन-साढ़े तीन सौ रुपये कमा लेते हैं जिसमें से तीन सौ रुपये मशीन का मालिक ले लेता है। 60 ले 70 रुपये उसके पिता जी को मिल पाते हैं।
उसने बताया कि अभी तक उसने कक्षा आठ तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है। अब वह नौंवी कक्षा में आ गया है। उसे कॉपी-किताबों और पढ़ाई के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत है। घर का खर्चा चलाने के लिए पिता खुद की टाइपिंग मशीन लेना चाहते थे। गांव में किसी ने बताया कि मुख्यमंत्री के पास चले जाओ, वे भगवान के समान हैं जरूर मदद करेंगे।
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ये बच्चा नमन तिवारी अपने पिता जी के साथ आज मंत्री ओमप्रकाश से मिलने आया था। हमने जब इससे मंत्री से मिलने वाली पैसों की मदद के बारे में पूछा तो इसने पूरी कहानी सुनाई। पता चला कि मंत्री ने ये पैसे उसे पिता के लिए टाइपराइटर खरीदने के लिए दिए हैं। बच्चा इस मदद से बेहद खुश और मंत्री जी का आभारी भी है। लेकिन जब हमने उसे और कुरेदा तो सिस्टम के लूप होल्स नजर आए।
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नमन तिवारी ने बताया कि वह बांदा जिले से है। किडनी की बीमारी से उसकी मां का देहांत हो चुका है। इलाज में जमा पूंजी चली गई, बचे-खुचे पैसे और घर बहनों की शादी में चले गए। नमन के विकलांग भाई की भी मौत हो चुकी है।
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नमन के पिता जी टाइपिंग करते हैं लेकिन उनके पास खुद का टाइपराइटर नहीं है। वह दूसरे के टाइपराइटर से टाइपिंग का काम करते हैं। दिनभर में वह तीन-साढ़े तीन सौ रुपये कमा लेते हैं जिसमें से तीन सौ रुपये मशीन का मालिक ले लेता है। 60 ले 70 रुपये उसके पिता जी को मिल पाते हैं।
उसने बताया कि अभी तक उसने कक्षा आठ तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है। अब वह नौंवी कक्षा में आ गया है। उसे कॉपी-किताबों और पढ़ाई के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत है। घर का खर्चा चलाने के लिए पिता खुद की टाइपिंग मशीन लेना चाहते थे। गांव में किसी ने बताया कि मुख्यमंत्री के पास चले जाओ, वे भगवान के समान हैं जरूर मदद करेंगे।
मंत्री, बोले अप्वाइंटमेंट लेकर आओ
मंत्री के साथ बच्चा नमन
नमन ने बताया कि वह जनता दरबार गया तो वहां अंदर नहीं जाने दिया गया। सुरक्षाकर्मियों से कई बार बहस भी हुई। वहां सुनवाई नहीं हुई तो उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य से मिलने की कोशिश की लेकिन वह भ्ाी नहीं मिले।
किसी के बताने पर बाप-बेटे मंत्री सुरेश खन्ना के पास पहुंचे। नमन ने बताया, मंत्री जी सामने बैठे थे लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया। कहा अप्वाइंटमेंट लेकर आओ। मेरे पिता जी ने कहा कि आप तो सामने हैं फिर कैसी अप्वाइंटमेंट तो बोले कि मैं ऐसे किसी से बिना अप्वाइंटमेंट नहीं मिलता। बच्चे ने बताया कि वहां से भी निराशा हाथ लगी।
किसी के बताने पर बाप-बेटे मंत्री सुरेश खन्ना के पास पहुंचे। नमन ने बताया, मंत्री जी सामने बैठे थे लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया। कहा अप्वाइंटमेंट लेकर आओ। मेरे पिता जी ने कहा कि आप तो सामने हैं फिर कैसी अप्वाइंटमेंट तो बोले कि मैं ऐसे किसी से बिना अप्वाइंटमेंट नहीं मिलता। बच्चे ने बताया कि वहां से भी निराशा हाथ लगी।
मूंछ वाले अंकल ने कहा कि मदद कर दीजिए
जनता दरबार में मंत्री
दर-दर भटकने के बाद ऐसे कई लोग थे जो जनता दरबार में हमें देख चुके थे। उन्होंने बताया कि ओम प्रकाश राजभर के पास चले जाओ तो वह मदद कर देंगे। ओम प्रकाश के यहां सुनवाई हुई और कुछ लिखा-पढ़ी की गई। इसके बाद कहा गया कि एक महीने में गांव में खबर करके बता देंगे और नया टाइपराइटर मिल जाएगा।
बच्चे ने बताया कि डेढ़ महीने बाद भी कोई खबर नहीं आई तो आज यहां आए थे। मंत्री जी पहले ध्यान से नहीं सुन रहे थे लेकिन किसी मूंछ वाले अंकल जी ने उनसे कहा कि मदद कर दीजिए बहुत दिनों से भटक रहा है। तब मंत्री जी ने पूरी बात सुनी और 2500 रुपये दिए।
बच्चे ने बताया कि डेढ़ महीने बाद भी कोई खबर नहीं आई तो आज यहां आए थे। मंत्री जी पहले ध्यान से नहीं सुन रहे थे लेकिन किसी मूंछ वाले अंकल जी ने उनसे कहा कि मदद कर दीजिए बहुत दिनों से भटक रहा है। तब मंत्री जी ने पूरी बात सुनी और 2500 रुपये दिए।
स्कूल जाने के लिए साइकिल की भी जरूरत
जरूरतमंद की मदद करते मंत्री
नमन ने बताया कि गांव में उन लोगों ने 7 हजार रुपये जोड़ रखे हैं। नई मशीन के लिए 6300 रुपये कम पड़ रहे थे। लेकिन 2400 रुपये भी मिल जाते तो पुरानी मशीन आ जाती। हमने पुरानी मशीन के लिए ही मंत्री जी से रुपये मांग लिए। मंत्री जी ने उसे 2500 रुपये दे दिए और इससे पिता और बेटे खुश भी हैं।
दबी जुबान से उसने ये भी बताया कि उसे स्कूल जाने के लिए साइकिल की भी जरूरत है, लेकिन शायद अब हिम्मत नहीं कि लखनऊ वाले ‘भगवानों’ के दरबार में इतने चक्कर काट सके। ( Pics: Arjun Sahu, Amar Ujala)
दबी जुबान से उसने ये भी बताया कि उसे स्कूल जाने के लिए साइकिल की भी जरूरत है, लेकिन शायद अब हिम्मत नहीं कि लखनऊ वाले ‘भगवानों’ के दरबार में इतने चक्कर काट सके। ( Pics: Arjun Sahu, Amar Ujala)