फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   yogi adityanath to go to chitrakoot after ayodhya.

अयोध्या के बाद अब चित्रकूट चमकाने की तैयारी में सीएम योगी, ये है प्लान

Sat, 21 Oct 2017 11:09 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 21 Oct 2017 11:09 AM IST
विज्ञापन
yogi adityanath to go to chitrakoot after ayodhya.
अयोध्या में सरयू आरती करते सीएम योगी - फोटो : amar ujala

योगी सरकार ने अयोध्या के बाद अब चित्रकूट के सहारे एजेंडे की धार और शान बढ़ाने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 23 अक्तूबर को चित्रकूट जाने का कार्यक्रम तय हो रहा है। अयोध्या की तरह वह चित्रकूट में भी एक रात गुजारेंगे।

विज्ञापन


यहां के प्रमुख स्थलों का दर्शन करेंगे और कई विकास योजनाओं की शुरुआत करेंगे। पूरे कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। चित्रकूट यात्रा से पहले योगी 22 को हमीरपुर जाएंगे और वहां भी विकास कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे।
विज्ञापन


अयोध्या के बाद चित्रकूट पहुंचने का लक्ष्य न तो अकारण है और न अनायास। यह पूरी तरह सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। क्योंकि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है तो चित्रकूट उनकी लीला भूमि। यहीं नहीं, बुंदेलखंड भाजपा के चुनावी एजेंडे का भी हिस्सा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बार भाजपा को बुंदेलखंड में लोकसभा और विधानसभा की सभी सीटों पर जीत हासिल हुई है। इसलिए बुंदेलखंड की यात्रा करके योगी ने एक तीर से कई निशाने साधना चाहते हैं। मोदी और योगी पहले भी कहते रहे हैं कि राम विकास का पर्याय हैं। शायद इसी संदेश के चलते योगी की मंजिल अयोध्या के बाद अब चित्रकूट तय हुई है।

ये है चित्रकूट की मान्यता

yogi adityanath to go to chitrakoot after ayodhya.

मान्यता है कि आज उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच बंटा चित्रकूट प्राचीन काल में दोनों राज्यों के बड़े भूभाग तक फैला था। कहा जाता है कि चौदह वर्षों के वनवास के दौरान भगवान राम के 11 वर्ष इस भूमि पर बीते थे। यहीं पर उनके अनुज भरत उन्हें वन से वापस अयोध्या ले जाने के लिए मनाने आए थे। इसी धरती पर राम को हनुमान मिले तथा सुग्रीव से उनकी मित्रता हुई। एक तरह से कहा जा सकता है कि जिस रावण वध के कारण राम भगवान कहे गए। उसका केंद्र चित्रकूट की धरती ही रही। अगर अयोध्या की पहचान राम से होती है तो चित्रकूट की प्रसिद्धि के पीछे भी राम ही हैं।

इस तरह धार
जाहिर है कि अयोध्या के बाद चित्रकूट की धरती अगर योगी और भाजपा का पड़ाव बनी है तो उसके अपने सियासी समीकरण भी हैं। कोशिश भावी संदेश देने की भी दिख रही है। अयोध्या के बाद चित्रकूट की यात्रा बनाकर योगी और भाजपा ने इस संदेश को और प्रभावी बनाने की तैयारी की है कि भगवा टोली ने इस बार हिंदुत्व के एजेंडे से टस से मस न होने का संकल्प ले रखा है। चित्रकूट प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी का कामद गिरि, गुप्त गोदावरी, स्फटिक शिला, सती अनुसुइया आश्रम, हनुमान धारा, जानकी कुंड, भरत कूप व रामघाट जैसे भगवान राम की पहचान  से जुड़े स्थलों पर भी जाने का कार्यक्रम है।

अयोध्या से चित्रकूट को जोड़ने वाले मार्ग को चार लेन और वह भी निषादराज तथा भगवान राम के मिलन स्थल श्रृंगवेरपुर होते हुए बनाने की योजना प्रदेश सरकार पहले ही बना चुकी है। मतलब, भाजपा यह बताने में कोई कसर नहीं रखना चाहती कि राम मंदिर ही नहीं बल्कि राम से जुड़ा हर स्थल उसकी आस्था का सवाल है। इसमें अगर मथुरा और काशी पर केंद्र और प्रदेश सरकार के ध्यान की बात को भी जोड़ लें तो यह एजेंडा और साफ हो जाता है कि भाजपा ने भले ही मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के इंतजार की नीति तय की हो लेकिन राम, कृष्ण और शिव के सहारे मिल रहे उस जनसमर्थन को पूरी तरह संजोकर रखने की तैयारी कर ली है जिसकी बदौलत उसका पूरे देश में विस्तार हो रहा है।

संयोग नहीं सोची-समझी रणनीति

yogi adityanath to go to chitrakoot after ayodhya.

मुख्यमंत्री का 26 अक्तूबर को आगरा जाने का कार्यक्रम है। लेकिन आगरा से पहले चित्रकूट की यात्रा के बीच की डोर के धागों पर गहराई से नजर डालें तो साफ पता चलता है कि आगे-पीछे की यात्रा संयोग नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत है।

इन दिनों जिस तरह ताजमहल को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं ने बयान दिए हैं, उन पर होने वाली प्रतिक्रिया को भगवा टोली भी जानती है और मोदी तथा योगी भी। शायद यही वजह है कि मोदी से लेकर योगी ने पुरातत्व के महत्व के बहाने इस मुद्दे को तूल देने वालों को चुप करने की कोशिश की है। कारण, भगवा टोली के रणनीतिकार कभी नहीं चाहेंगे कि बंटवारा सीधे-सीधे हो क्योंकि ऐसा होने से अकारण विवाद उठेंगे। जिन पर भाजपा भी उलझेगी।

भाजपा ऐसा नहीं चाहती। यही वजह है कि योगी के जरिए जहां अयोध्या और उसके बाद चित्रकूट की यात्रा करके भगवा टोली ने अपने समर्थकों को आस्था के सवालों पर अडिग रहने का संदेश देने की तैयारी की है तो चित्रकूट के बाद आगरा की यात्रा का कार्यक्रम बनाकर यह भी बताने की कोशिश कर रही है कि यह सरकार तुष्टीकरण तो नहीं करेगी लेकिन जो राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़कर चलना चाहते हैं उनका सम्मान भी होगा। धरोहर या विरासत की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। कोशिश शायद ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को और गाढ़ा करने की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed