मुख्यमंत्री योगी का दावा, बोर्ड परीक्षा छोड़ने वाले मुन्नाभाई, इनमें से 75% यूपी से बाहर के
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां लोकभवन में सोमवार को अपनी सरकार के एक साल के कामों का हिसाब दिया। इस दौरान उन्होंने बोर्ड परीक्षा छोड़ने वाले 12 लाख विद्यार्थियों पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में नकलविहीन परीक्षा सपना था। नकल के ठेके होते थे। उनकी सरकार ने नकलविहीन परीक्षा की ओर कदम बढ़ाया। नकल माफिया पर अंकुश लगा। 12 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। योगी ने खुलासा किया कि इनमें 75 प्रतिशत का यूपी से कोई लेना-देना नहीं था। ये मुन्नाभाई थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व परीक्षा की प्रणाली को अधिक सरल बनाने जा रहे हैं। इसी सत्र से स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, बेसिक स्कूलों में भी पूरी व्यवस्था बदल रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में सोमवार को अपनी सरकार के एक साल के कामों का हिसाब दिया। कहा, उनकी सरकार को विरासत में खजाना खाली मिला था। कर्मचारियों को वेतन देने तक की चुनौती थी। प्रदेश में जंगलराज था तो अराजकता चरम पर थी। परिवारवाद, जातिवाद और मत-मजहब के आधार पर समाज को बांटने की नीति लागू थी। राज्य की 1.21 लाख किमी सड़कें गड्ढे से भरी हुई थीं। बिजली में वीआईपी कल्चर लागू था और महज चार जिलों को ही ठीक से बिजली मिलती थी। किसान आत्महत्या कर रहा था। बैंक लोन देने को तैयार नहीं थे। उद्योगपति पलायन कर रहे थे। नई नौकरियों पर रोक लगी थीं। ऐसी परिस्थितियों में काम किसी चुनौती से कम नहीं था।
बावजूद इसके उनकी सरकार ने प्रदेश को इन हालातों से मुक्त किया। किसान, नौजवान, गरीब और महिलाओं को केंद्र में रखकर कल्याणकारी कार्य किए व लोक कल्याण संकल्प पत्र के तमाम वादों को पूरा किया। इससे परिस्थितियों बदलीं और लोगों में नया विश्वास जागृत हुआ है।
'एक साल में सरकार का मूल्यांकन नहीं हो सकता है'
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की बिगड़ी परिस्थितियों में एक साल किसी सरकार के मूल्यांकन का पर्याप्त समय नहीं होता है। लेकिन उनकी सरकार ने विपरीत परिस्थितियों में पहली ही कैबिनेट में किसानों से कर्जमाफी का वादा पूरा किया। इस तरह एक वर्ष में धान व गेहूं के समर्थन मूल्य, गन्ना बकाये और किसान कर्जमाफी के रूप में उनके खाते में 80 हजार करोड़ रुपये डीबीटी के जरिए भेजे। इसके लिए कोई नया कर नहीं लगाया और न ही किसी वित्तीय संस्थान से कर्ज लिया गया। इस तरह फिजूलखर्ची रोक कर कर्जमाफ करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बना।
उन्होंने बताया कि पूरे देश में निवेश के लिए सबसे बेहतर माहौल यूपी में बनाया। एक समय था, जब कोई निवेश आना नहीं चाहता था, अब निवेशकों ने खुद आकर 4.68 लाख करोड़ के एमओयू किए। सामानों की खरीद में पारदर्शिता की पहल की और जैम पोर्टल लागू किया। यही नहीं, पुलिस की कमी के बावजूद कानून-व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव किया। इसमें उन्हें संगठन व मंत्रिमंडल के साथियों के साथ ही आमलोगों का पूरा सहयोग मिला। उनकी सरकार ने जनता के प्रति जवाबदेही के साथ कदम बढ़ाया है। आने वाले दिनों में प्रदेश के विकास का काम तेज होता जाएगा।