अगर मनरेगा की सही जानकारी होती तो अब तक कृषि की तस्वीर बदल जाती: योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनरेगा के कार्यों को कृषि से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाई जाए और फसल की लागत कम की जाए। फसल से पहले, बोआई व कटाई के बाद भी मनरेगा योजना से काम कराए जा सकते हैं। यह भी विचार किया जाए कि बाढ़ व अन्य प्राकृतिक आपदा में मनरेगा का उपयोग कैसे किया जाए।
योगी बृहस्पतिवार को बाबा साहब अंबेडकर विश्वविद्यालय के सभागार में कृषकों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि एवं मनरेगा कन्वर्जेंस कार्यशाला में बोल रहे थे। इसमें पांच मंडलों के 25 जिलों के किसानों व मजदूरों, इनसे जुड़ी संस्थाओं व बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की खुशहाली का रास्ता गांवों व किसानों से होकर जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होनी चाहिए। हाल ही प्रधानमंत्री ने 14 फसलों का एमएसपी 50 से 150 प्रतिशत तक बढ़ाया है। योगी ने कहा कि प्रदेश में इस तरह की तीन और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
इन कार्यशालाओं में आए सुझावों पर प्रधानमंत्री द्वारा गठित सात मुख्यमंत्रियों की समिति विचार करेगी। इसी के आधार पर मनरेगा में संशोधन के लिए कदम उठाए जाएंगे। कार्यशाला में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य मंत्री रणवेन्द्र सिंह (धुन्नी सिंह), प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद मौजूद थे।
मनरेगा से ला सकते हैं व्यापक बदलाव
सीएम ने कहा कि मनरेगा के 260 कामों में से 193 से सामुदायिक और 67 से व्यक्तिगत तौर पर किसानों को लाभान्वित किया जा सकता है। डेढ़ साल पहले तक मनरेगा के धन का सदुपयोग नहीं हो रहा था। इस योजना में ईमानदारी से काम करके गांव, गरीब, किसानों की स्थिति में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
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कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री ने सात मुख्यमंत्रियों की जो हाई पावर कमेटी बनाई है, उसमें सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं। प्रदेश की 22.50 करोड़ आबादी में 2.30 करोड़ किसान परिवार हैं। इनमें 2.13 करोड़ यानी 93 फीसदी लघु एवं सीमांत किसान हैं। दो करोड़ खेतिहर मजदूर हैं। इनमें एक करोड़ क्रियाशील मजदूर हैं।