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30 वर्ष की सेवा पर जबरन सेवानिवृत्ति का फैसला गलत

Tue, 01 Sep 2020 01:12 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Tue, 01 Sep 2020 01:12 PM IST
सार

  • इप्सेफ ने पीएम को भेजा ज्ञापन 
  • संघर्ष की रणनीति बनाने को बुलाई बैठक

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wrong decision to forcibly retire on 30 years of service
old woman - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर 30 वर्ष की सेवा पर कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने के निर्णय को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र ने कहा कि 30 वर्ष की सेवा में कर्मचारियों के बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी-ब्याह और आवास की व्यवस्था करनी होती है। 

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सेवानिवृत्त कर दिए जाने पर कर्मचारी के पूरे परिवार पर विपरीत असर पड़ेगा। मिश्र ने कहा कि वर्तमान सरकार जबसे आई है, भ्रष्टाचार और कामचोरी का नाम लेकर कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त करती जा रही है। रिक्त पदों पर भर्ती न करके संविदा और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखकर काम चला रही है। अनुभवी कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है।
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महामंत्री प्रेमचंद्र ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में मुश्किल से 50 प्रतिशत नियमित कर्मचारी रह गए हैं। पद खाली पड़े हैं और भर्तियां नहीं की जा रही हैं। ठेका पर कर्मचारी रखकर काम कराया जा रहा है। उन्हें बहुत कम पैसा दिया जाता है। कई-कई महीने वेतन नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि 6 सितंबर को दोपहर 1 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में इप्सेफ के वरिष्ठ पदाधिकारी अतुल मिश्रा, डॉ. केके सचान, शशि कुमार मिश्रा, अशोक कुमार उपस्थित रहे।

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