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Lucknow News: मेरे लिए लेखन पहला और अंतिम विकल्प
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वरिष्ठ कथाकार भालचंद्र जोशी को सम्मानित करते कथाक्रम के संपादक शैलेेंद्र सागर, आलोचक वीरेंद्र य
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लखनऊ। वरिष्ठ कथाकार भालचंद्र जोशी को रविवार को एक समारोह में आनंद सागर स्मृति कथा सम्मान-2025 से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान पेपरमिल कॉलोनी में स्थित कैफी आजमी सभागार में आयोजित त्रैमासिक पत्रिका कथाक्रम के 33वें वार्षिक समारोह में दिया गया। इस अवसर पर भालचंद्र जोशी ने कहा कि मेरे लिए लेखन पहला और अंतिम विकल्प है क्योंकि लेखन ही मेरी अंतिम शरणस्थली है।
भालचंद्र जोशी ने कहा कि एक लेखक जब दुनिया से हारता है या दुनिया में अपना कुछ हारता है तो वह अपनी जीत को लेखन में खोजता है। यह एक तरीके से लेखक का रचनात्मक प्रतिशोध है। उन्होंने कहा कि मेरा ज्यादातर जीवन आदिवासियों के बीच गुजरा, इसलिए उसका असर भी लेखन पर पड़ा। उन्होंने कहा कि कला और अभ्यास में अंतर होता है और एक लेखक के भीतर कई तरह के लोग रहते हैं। भालचंद्र जोशी ने कहा कि प्रेम और मृत्यु का सारा सौंदर्य उसकी अचानकता में ही है। इस दौरान समारोह के अध्यक्ष आलोचक वीरेंद्र यादव, मुख्य अतिथि कथाकार शिवमूर्ति और लोकबाबू ने उन्हें आनंद सागर स्मृति कथा सम्मान-2025 के मानपत्र के साथ 21 हजार रुपये सम्मान राशि सौंपी। कथाकार रूपा सिंह ने भालचंद्र जोशी के कृतित्व और उनकी रचनाओं से श्रोताओं को अवगत कराया।
कथाक्रम के संपादक शैलेंद्र सागर ने कहा कि लिटफेस्ट जैसे चकाचौंध वाले कार्यक्रमों की अपेक्षा हमारा उद्देश्य समाज और साहित्य के लिए आवश्यक विषयों पर विचार-विमर्श करना और समस्याओं का बौद्धिक समाधान निकालना है। इस अवसर पर ‘हिंदी साहित्य और जनपदीय भाषाएं’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया जिसमें प्रो. राजकुमार, प्रो. राम बहादुर मिसिर समेत अन्य लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. श्रुति और नलिन रंजन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. जगदीश चतुर्वेदी, प्रो. सरोज गुप्ता, प्रो. रोहिणी अग्रवाल, प्रो. शशि भूषण, ईश्वर सिंह दोस्त, उदय प्रकाश, अवधेश मिश्रा, कुमार अनुपम, डॉ. रजनी गुप्त और राकेश वेदा समेत साहित्यकार व समीक्षक मौजूद रहे।
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भालचंद्र जोशी ने कहा कि एक लेखक जब दुनिया से हारता है या दुनिया में अपना कुछ हारता है तो वह अपनी जीत को लेखन में खोजता है। यह एक तरीके से लेखक का रचनात्मक प्रतिशोध है। उन्होंने कहा कि मेरा ज्यादातर जीवन आदिवासियों के बीच गुजरा, इसलिए उसका असर भी लेखन पर पड़ा। उन्होंने कहा कि कला और अभ्यास में अंतर होता है और एक लेखक के भीतर कई तरह के लोग रहते हैं। भालचंद्र जोशी ने कहा कि प्रेम और मृत्यु का सारा सौंदर्य उसकी अचानकता में ही है। इस दौरान समारोह के अध्यक्ष आलोचक वीरेंद्र यादव, मुख्य अतिथि कथाकार शिवमूर्ति और लोकबाबू ने उन्हें आनंद सागर स्मृति कथा सम्मान-2025 के मानपत्र के साथ 21 हजार रुपये सम्मान राशि सौंपी। कथाकार रूपा सिंह ने भालचंद्र जोशी के कृतित्व और उनकी रचनाओं से श्रोताओं को अवगत कराया।
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कथाक्रम के संपादक शैलेंद्र सागर ने कहा कि लिटफेस्ट जैसे चकाचौंध वाले कार्यक्रमों की अपेक्षा हमारा उद्देश्य समाज और साहित्य के लिए आवश्यक विषयों पर विचार-विमर्श करना और समस्याओं का बौद्धिक समाधान निकालना है। इस अवसर पर ‘हिंदी साहित्य और जनपदीय भाषाएं’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया जिसमें प्रो. राजकुमार, प्रो. राम बहादुर मिसिर समेत अन्य लेखकों ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. श्रुति और नलिन रंजन सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. जगदीश चतुर्वेदी, प्रो. सरोज गुप्ता, प्रो. रोहिणी अग्रवाल, प्रो. शशि भूषण, ईश्वर सिंह दोस्त, उदय प्रकाश, अवधेश मिश्रा, कुमार अनुपम, डॉ. रजनी गुप्त और राकेश वेदा समेत साहित्यकार व समीक्षक मौजूद रहे।
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