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दस दिन की मासूम को मिला आश्रय
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चार दिन के नवजात को छोड़ा मां ने, बोली- भूल हो गई
एक 19 साल की बिन ब्याही मां चार दिन के अपने नवजात को शनिवार सुबह 181 आशा ज्योति केन्द्र के दरवाजे पर छोड़कर जा रही थी।
अचानक वहां काम करने वालों की नजर उस पर पड़ी और पकड़ लिया। केंद्र की प्रभारी अर्चना सिंह ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि एक भूल की वजह से वह बिन ब्याही मां बनी।
उसका प्रेमी छोड़ कर चला गया। लड़की के घरवालों ने उसे घर से निकाल दिया। हालांकि उसने बच्चे को दुनिया में लाने का फैसला किया।
दोस्तों ने उसे सहारा दिया और चार दिन पहले उसने एक बेटे को जन्म दिया। लोकलाज के डर से वह उसे यहां छोड़ने आई थी।
अर्चना सिंह के मुताबिक, वह यह मानती है कि उससे भूल हुई। वह उस लड़के से शादी करना भी नहीं चाहती और शहर छोड़ कर जा रही है।
इसलिए कोई कार्रवाई नहीं चाहती। रही बात बच्चे की तो वह इसे अपना नहीं सकती क्योंकि दुनिया जीने नहीं देगी।
झाड़ियों में न फेंके बच्चे
अर्चना सिंह व बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता शर्मा कहती हैं कि लगातार बच्चों को फेेंक देने के मामले बढ़ रहे हैं। यूं तो ऐसी घटनाएं हों न हो इसका ध्यान सबको रखना होगा। कम से कम बच्चों को जानवरों का निवाला बनने के लिए सड़कों, झाड़ियों में न फेंके।
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एक 19 साल की बिन ब्याही मां चार दिन के अपने नवजात को शनिवार सुबह 181 आशा ज्योति केन्द्र के दरवाजे पर छोड़कर जा रही थी।
अचानक वहां काम करने वालों की नजर उस पर पड़ी और पकड़ लिया। केंद्र की प्रभारी अर्चना सिंह ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि एक भूल की वजह से वह बिन ब्याही मां बनी।
उसका प्रेमी छोड़ कर चला गया। लड़की के घरवालों ने उसे घर से निकाल दिया। हालांकि उसने बच्चे को दुनिया में लाने का फैसला किया।
दोस्तों ने उसे सहारा दिया और चार दिन पहले उसने एक बेटे को जन्म दिया। लोकलाज के डर से वह उसे यहां छोड़ने आई थी।
अर्चना सिंह के मुताबिक, वह यह मानती है कि उससे भूल हुई। वह उस लड़के से शादी करना भी नहीं चाहती और शहर छोड़ कर जा रही है।
इसलिए कोई कार्रवाई नहीं चाहती। रही बात बच्चे की तो वह इसे अपना नहीं सकती क्योंकि दुनिया जीने नहीं देगी।
झाड़ियों में न फेंके बच्चे
अर्चना सिंह व बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता शर्मा कहती हैं कि लगातार बच्चों को फेेंक देने के मामले बढ़ रहे हैं। यूं तो ऐसी घटनाएं हों न हो इसका ध्यान सबको रखना होगा। कम से कम बच्चों को जानवरों का निवाला बनने के लिए सड़कों, झाड़ियों में न फेंके।
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