{"_id":"5ad59e144f1c1b3b0b8b4feb","slug":"women-given-birth-to-a-baby-after-sterilization","type":"story","status":"publish","title_hn":"नसबंदी के बाद भी हुआ बच्चा, मुआवजे के लिए महिला ने किया केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नसबंदी के बाद भी हुआ बच्चा, मुआवजे के लिए महिला ने किया केस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 17 Apr 2018 12:41 PM IST
विज्ञापन
नसबंदी फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन विभाग के सचिव को नसबंदी के बावजूद बच्चा होने के मामले में याची को मुआवजा देने पर विचार करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
इस मामले में सरकार का तर्क था कि महिला को मुआवजा पाने के लिए 90 दिन के भीतर आवेदन करना होता है। इसमें वह लेट हो गई।
याचिकाकर्ता कुसुमा ने बताया था कि बाराबंकी के सरकारी अस्पताल में वर्ष 2014 में उसने नसबंदी करवाई थी। इसके बावजूद वह गर्भवती हो गई और उसने एक बालिका को जन्म दिया।
विज्ञापन
नसबंदी विफल रहने पर उसने प्रदेश सरकार के मुआवजा स्कीम के तहत मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने इसे नकार दिया। इसके लिए 90 दिन बाद दावा करने का तर्क दिया गया।
विज्ञापन
इसकी वजह से उन्हें अपात्र माना गया। जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस इरशाद अली ने सुनवाई के बाद कहा कि याची समाज के निचले तबके से ताल्लुक रखती है। ऐसा संभव है कि उसके लिए समय अवधि के भीतर आवेदन करने में कुछ बाधाएं रही होंगी।
वहीं, सामने आए मामले के तथ्यों के आधार यह उचित होगा कि विभाग उसके दावे पर देरी के बजाय योग्यता के अनुसार विचार करे। इसके लिए उसे एक महीने की मोहलत दी जाती है।