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अंसल ग्रुप ने बिना जमीन के ही कर दी हजारों प्लॉटों की बुकिंग, पुलिस तैयार कर रही कुंडली

Mon, 30 Sep 2019 03:57 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 30 Sep 2019 03:57 PM IST
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without land ansal group booked millions of plot, police preparing full chargesheet
पुलिस हिरासत में प्रणव अंसल। - फोटो : amar ujala
अंसल एपीआई ग्रुप ने बिना जमीन के ही हजारों लोगों को प्लॉट की बुकिंग कर दी ग्राहकों से करोड़ों रुपये लेने के बाद भी उन्हें जमीन नहीं दी। उसने बिना जमीन खरीदे ही लोगों को प्लॉट, विला और फ्लैट बेच दिए। इनमें से ज्यादातर लोगों ने शिकायत की है कि उनसे रुपये लेने के बाद कंपनी ने प्लॉट नहीं दिया। 
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पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि अंसल ग्रुप के पास जितनी बुकिंग थी, उसके हिसाब से जमीन ही नहीं थी। जो लोग विरोध करते, कार्यालय पहुंचकर हंगामा करते, उनके खिलाफ कंपनी के अधिकारी मुकदमे दर्ज कराकर उन्हें परेशान करना शुरू कर देते थे। अंसल ग्रुप के खिलाफ प्रदेश ही नहीं, देश केकई जगहों पर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस इन मुकदमों की लिस्ट तैयार कर रही है। इसके लिए पूरे देश के थानों से पत्राचार किया जा रहा है।
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एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक अंसल एपीआई ग्रुप के कर्मचारी ग्राहक को जमीन दिखाते थे। इसके बाद उनसे सौदा करते। बुकिंग कराने के समय 20 से 40 प्रतिशत रकम जमा करवा लेते थे। जमीन की रजिस्ट्री के लिए लंबा समय लेते थे। 
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इस दौरान कंपनी दबाव बनाकर ग्राहक से पूरी रकम अपने खाते में जमा करा लेती थी। ग्राहक जब रजिस्ट्री केलिए संपर्क करता तो टालमटोल की जाती। फिर ग्राहक जब अपने स्तर से जमीन के बारे में जानकारी करता तो पता चलता कि जो जमीन उसे दिखाई गई थी, वह कंपनी के नाम से है ही नहीं। इस धोखाधड़ी की जानकारी के बाद ग्राहक जब रकम वापस मांगते तो उन्हें अंसल ग्रुप के कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते।

एक की जमीन दूसरे को बेचकर लौटाते थे पैसा

पुलिस के मुताबिक जब ग्राहक ज्यादा दबाव बनाता तो अंसल ग्रुप के कर्मचारी उसे अधिकारी के  नाम पर हरीश गुल्ला और अरुण मिश्रा से मिलवाते थे। दोनों अधिकारी कुछ दिन का समय मांगते। इस दौरान एक पत्र तैयार किया जाता, जिसमें रकम वापस करने के लिए हर तीन महीने की किस्त तय की जाती। 

ग्राहक को बताया जाता कि उसके खाते में रकम हर तीसरे महीने तय तारीख को किस्तों में वापस कर दी जाएगी। रकम खाते में नहीं पहुंचती तो दुबारा दबाव बनाने पर एक-दो किस्तें दे दी जातीं। रकम तभी वापस होती जब जमीन का दूसरा ग्राहक मिल जाता। 

कंपनी दूसरे ग्राहक को वर्तमान दर से जमीन बेचती थी। वहीं पुराने ग्राहक को उसके द्वारा दी गई रकम वापस की जाती, जो धनराशि बचती थी, उसे कंपनी रख लेती थी। जब दूसरे ग्राहक को पता चलता कि धोखाधड़ी हुई, तब तक वह जमीन तीसरे को बेचने की तैयारी कर ली जाती।

कूटरचित नक्शा दिखाकर ठगते थे
अंसल ग्रुप के पुराने नक्शे को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनुमोदित किया है। इन सभी जमीनों को वह बेच भी चुका है। पिछले कुछ सालों से जो नक्शा दिखाकर ग्राहकों से धोखाधड़ी की जा रही है, उनका नक्शा पास ही नहीं है। अंसल ग्रुप के अधिकारी पुराने अनुमोदित नक्शों की आड़ में जालसाजी का खेल कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक जमीन दिखाने के पहले एक नक्शा ग्राहकों के सामने रखा जाता। जो जमीन कंपनी ने न तो खरीदी है और न ही उस पर कब्जा है, उसे भी अपनी बताकर नक्शे में दिखाते। नक्शे में कई ऐसे प्लॉट दिखाए गए, जो पहले बेचे भी जा चुके हैं। 

किसानों के नाम की जमीन की कर दी रजिस्ट्री

एसएसपी के मुताबिक  अंसल ग्रुप ने किसानों के नाम से दर्ज जमीनों को भी बेच दिया। उसकी रजिस्ट्री भी कर दी। किसानों को पट्टे के रूप में आवंटित जमीन जो किसी भी दशा में दूसरे को रजिस्ट्री नहीं की जा सकती, उसका भी एग्रीमेंट करा लिया गया है। 

एग्रीमेंट में दर्ज किया गया है कि जब जमीन दूसरे को बेचने योग्य होगी तो किसान द्वारा अंसल ग्रुप को बेची जाएगी। पुलिस के मुताबिक इस तरह का एग्रीमेंट गैरकानूनी है। इस तरह की जमीन का अनुबंध किसान नहीं कर सकते हैं। बिना मालिकाना हक के ही अंसल ग्रुप ने ग्राहकों को ऐसी ही जमीनों की  रजिस्ट्री कर दी।

जज, आईएएस, आईपीएस व सेना के अधिकारियों को भी लगाया चूना
अंसल ग्रुप ने आम लोगों केअलावा न्यायिक, प्रशासनिक, पुलिस व सेना के अधिकारियों तथा कारोबारियों को भी नहीं छोड़ा। उनको अपनी जमीन के आसपास कई योजनाओं का डेमो दिखाया। फिर उनसे लाखों रुपये हड़प लिए। जब हकीकत सामने आई तो अधिकारियों ने मुकदमे भी दर्ज कराए। इसके बाद कुछ अधिकारियों के रुपये वापस किए गए। कुछ के मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से कुछ अधिकारी लखनऊ में भी तैनात हैं।

ग्राहकों पर दर्ज कराते थे छेड़छाड़ व एससी-एसटी के मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, अपनी रकम वापस पाने के लिए ग्राहक जब अंसल ग्रुप के कार्यालय में पहुंचते तो कर्मचारी उनसे कहासुनी करते। उनकी वीडियो बनाई जाती। ग्राहकों के खिलाफ पेशबंदी कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जाते। इसके लिए कंपनी ने कुछ अनुसूचित जाति के लोग, महिलाएं और अन्य दबंग कर्मचारी भी तैनात कर रखे हैं। ये सुशील अंसल, प्रणव अंसल, हरीश गुल्ला और अरुण मिश्रा के इशारे पर ग्राहकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराते थे। 

अंसल ग्रुप की तहरीर पर उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होता था, जिनके नाम से जमीन का आवंटन होता था। अंसल ग्रुप के अधिकारियों ने पीजीआई थाने में 80 साल के एक बुजुर्ग के खिलाफ भी छेड़छाड़, मारपीट, एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराया है, जो पिछले पांच साल से बिस्तर से उठ भी नहीं सकते।

पुलिस का भी मिलता है सहयोग

भले ही पुलिस ने प्रणव अंसल को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अंसल ग्रुप को जालसाजी के इस मुकाम तक पहुंचाने में लखनऊ पुलिस ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिस ग्राहक की रकम अंसल ग्रुप हड़पता था, पुलिस उसकी सुनवाई न कर ग्रुप के अधिकारियों के साथ मिलकर समझौता कराने में जुट जाती थी। इसके बदले में ग्रुप से उसे कीमत भी मिलती थी। सैकड़ों मामलों में पुलिस ने खेल कर ग्राहक को वापस भेज दिया। जिन मामलों में शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंचीं, उनमें ही मुकदमे दर्ज किए गए। 

सभी विवेचकों ने की पूछताछ
अंसल ग्रुप के वाइस चेयरमैन के गिरफ्तार होने के बाद राजधानी में दर्ज 24 मुकदमों के विवेचकों को विभूतिखंड थाने पहुंचने का निर्देश दिया गया। विवेचकों ने थाने पहुंचकर प्रणव अंसल से पूछताछ शुरू कर दी। करीब आधे घंटे की पूछताछ के बाद प्रणव को मेडिकल के लिए लोहिया अस्पताल भेजा गया।  

लखनऊ पुलिस ने शुरू किया ‘ऑपरेशन-420’, हेल्पलाइन पर करें शिकायत
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी अंसल ग्रुप के वाइस चेयरमैन के गिरफ्तार होने के बाद विशेष अभियान ‘ऑपरेशन-420’ शुरू करने का आदेश जारी किया है।

इसके तहत नौकरी के नाम पर ठगी, गुमराह करने वाले सफेदपोशों, फर्जी एनजीओ चलाकर ठगी करने वाले, बडे़ अधिकारियों से संपर्क बताकर ठगी, सचिवालय का पास, परमिट बनाकर ठगी, फर्जी डिग्री, प्रवेश पत्र बनाकर ठगी, दूसरे के नाम पर काम कराने का झांसा देने और आवासीय योजना के नाम पर रुपये ऐंठने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जालसाजों केखिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनकी हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी।

गैंगस्टर की भी कार्रवाई की जाएगी। ठगी व जालसाजी के शिकार लोग एंटी क्राइम हेल्पलाइन 7839861314 पर सूचना दे सकते हैं। उनके नाम व पते गोपनीय रखे जाएंगे। सूचना वाट्सएप के जरिए भी भेज सकते हैं। 
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